जनप्रतिनिधियों और प्रशासन ने जब खड़े किए हाथ तो ग्रामीणों ने चंदा लगाकर सात दिन में बनाया पुल

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When the public representatives and the administration raised their hands, the villagers made a bridge in seven days by donating
इस पुल को बनाने में कुल पांच लाख रुपये का खर्च आया।

बागपत -अवनीश पांडेय। संघर्ष करने वालों की कभी हार नहीं होती, अगर हो जूनून तो किसी सहारे की दरकार नहीं होती, बागपत में बामनौली के ग्रामीणों ने इसे साबित कर दिखाया है। वहां के ग्रामीण पिछले कई सालों से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पुल बनवाने की मांग कर रहे थे, लेकिन प्रशासन और प्रतिनिधियों ने हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद ग्रामीणों ने हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहने के बजाय खुद ही समस्या का समाधान करने की सोची, इसके लिए चंदा एकत्र करके सिर्फ सात दिन में पुल बनाकर तैयार कर दिया।

दिपावली पर होगा पुल का उद्घाटन

ग्रामीणों ने बनाए गए नए पुल के उद्घाटन के लिए भी शुभ मुहूर्त निकाल लिया है। ग्रामीणों के अनुसार पुल का उद्घाटन दीपावली पर पूजा अर्चना के बाद होगा। मालूम हो कि 15 दिन पहले ग्रामीणों ने बामनौली में पंचायत की। पंचायत खुद पुल बनाने चर चर्चा की गई। पंचायत में सभी ग्रामीणों ने इस पर सहमति दे दी। इसके बाद 500 रुपये प्रति बीघा चंदा एकत्र किया और 21 अक्तूबर को काम शुरू कर दिया। देखते ही देखते पुल बनकर तैयार हो गया।

पांच लाख रुपये में तैयार हुआ पुल

इस पुल को बनाने में कुल पांच लाख रुपये का खर्च आया। इस पुल को बनाने के में रिटायर्ड इंजीनियर ने डिजाइन बनाने से लेकर सारी व्यवस्था देखी। पुल निर्माण के लिए ग्रामीण पहले केवल तीन पिलर बना रहे थे, जो ज्यादा भार पड़ने पर टूट सकता था। इसके बाद पीडब्ल्यूडी की पुल निर्माण शाखा से सेवानिवृत्त इंजीनियर इकबाल सिंह ने इसका तकनीकी डिजाइन तैयार किया और दो पिलर और बनवाए। सीमेंट, रोड़ी, रेत, सरिया कितना इस्तेमाल होना है, इसका भी पूरा ध्यान इकबाल सिंह ने खुद रखा।

कच्चे पुल से होता था आवागमन

आपकों बता दें कि बामनौली के 100 से अधिक ग्रामीणों की करीब 500 बीघा कृषि भूमि कृष्णा नदी के उस पार है। ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर कृष्णा नदी के पार खेती करने जाना पड़ता था। आवागमन के लिए कृष्णा नदी में पाइप दबाकर मिट्टी से कच्चा पुल बनाया, लेकिन कई बार भैंसा-बुग्गी, ट्रैक्टर-ट्रॉली, ग्रामीण नदी में गिरकर हादसों के शिकार हो चुके है। इसके साथ ही बरसात के दिनों में नदी में पानी ज्यादा आने पर समस्या बढ़ जाती है और मिट्टी का पुल भी बह जाता था, जिसके बाद ग्रामीणों ने नई और पक्की पुल बनाने की तैयारी शुरू की। और देखते ही देखते पुल बनाकर तैयार कर दिया।

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