बड़ा सवाल: क्या बागी मनोज पांडेय के सहारे बीजेपी कांग्रेस का आखिरी किला ध्वस्त कर पाएगी

रायबरेली। एक कहावत है कि बीजेपी का संगठन 24 घंटे चुनाव की तैयारी में रहता है, जहां दूसरे दल के नेता और कार्यकर्ता केवल चुनाव के समय सक्रियता दिखाते है, वहीं बीजेपी के रणनीतिकार हर सीट पर हमेशा गुणा गणित बैठाने के फिराक में रहते है। जैसे हालात कांग्रेस के यूपी में आखिरी गढ़ रायबरेली में बने है, उसके पीछे एक ​दो दिन की मेहनत नहीं बल्कि कई साल पहले से बीजेपी संगठन गोटिया बैठाने में जुटा था। पहले कांग्रेस के खास रहे अखिलेश सिंह की बेटी अदिति को अपने पाले में किया, इसके सपा में ब्राह्मणों के सबसे बड़े चेहरे माने जा रहे मनोज पांडेय को अपने पाले में किया। इन दोनों के साथ ही इनके समर्थक जैसे दुष्कर्म के आरोप में जेल में बंद गायत्री प्रजापति के परिवार को भी मिला।

अब मनोज पांडेय के नेतृत्व में रायबरेली को जीतने की पूरी तैयारी हो गई। बता दें कि अमेठी को पहले ही बीजेपी ने छिनकर राहुल गांधी को पलायन के लिए मजबूर कर चुकी है।

यूपी के अवध प्रांत में पांचवे चरण में मतदान होगा, इस चरण की सीटों पर जिस पार्टी का सबसे ज्यादा कब्जा होगा, उसे सरकार बनाने में उतना ​अधिक फायदा होगा। एक तरह देखा जाए तो इस चरण की अधिकांश सीटों पर बीजेपी प्रत्याशी काफी मजूबत स्थिति में दिख रही है। अयोध्या लल्लू सिंह तो सुल्तानपुर से ​मेनका गांधी जैसी ​दिग्गज नेता पार्टी को जीत का आधार रखेंगे।

भगवा ​दल में शामिल हुए मनोज

मतदान से पहले 17 मई को दूसरी बार रायबरेली पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सपा विधायक मनोज कुमार पांडेय के सहारे ब्राह्मणों को साधने की कोशिश की। रायबरेली, अमेठी, कौशांबी व फतेहपुर की जनता के बीच राजनीतिक समीकरण साधने में माहिर ब्राह्मण चेहरा मनोज पांडेय शुक्रवार को 20 साल बाद फिर भाजपा के हो गए। चर्चा है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में ही गृहमंत्री की नजर मनोज पर पड़ गई थी। तभी से वह मनोज को भाजपा में लाने के लिए प्रयासरत थे। इसमें शुक्रवार को वह सफल भी हो गए।

लगातार तीसरी बार बने विधायक

अगर उनके सियासी सफर पर नजर डाले तो भाई राकेश पांडेय की हत्या के बाद मनोज पांडेय मैदान में उतरे। 2000 में भाजपा के टिकट पर नगर पालिका रायबरेली के अध्यक्ष का चुनाव लड़े और जीते। 2004 में वे सपा में शामिल हो गए। उन्हें राज्यमंत्री भी बनाया गया। 2012 से वे लगातार तीसरी बार ऊंचाहार विधानसभा सीट से विधायक बने। सपा से विधानमंडल का मुख्य सचेतक रहते हुए उन्होंने सपा से बीते फरवरी माह में ही दूरियां बना लीं। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद स्पष्ट हो गया था कि कभी न कभी वे भाजपा में शामिल हो जाएंगे।मनोज पांडेय के भाजपा में शामिल होने के बाद यूपी के जिलों में सियासी फायदा भाजपा को मिल सकता है।

खासकर पांचवे चरण में।दौलतपुर में आयोजित जनसभा में डॉ. मनोज पांडेय ने कहा कि भगवान राम व सनातन का साथ नहीं छोड़ेंगे। इसके लिए चाहे राजनीति छोड़नी पड़े या विधायकी। विधानसभा में भी कई बार भगवान राम के साथ ही खड़े हुए। तंज कसते हुए कहा कि राहुलजी, प्रियंकाजी रायबरेली के लोगों से परिवार का खेल करना बंद करिए। अब रायबरेली की जनता सबकुछ समझ गई है।

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