श्री रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी में विश्व में उदारवादी व्यवस्था का उत्थान एवं पतन तथा भारत का एक महाशक्ति के रूप में उभार विषयक अतिथि व्याख्यान का आयोजन हुआ


12 सितम्बर 2025, बाराबंकी / लखनऊ। श्री रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी में विश्व में उदारवादी व्यवस्था का उत्थान एवं पतन तथा भारत का एक महाशक्ति के रूप में उभार विषयक अतिथि व्याख्यान का आयोजन हुआ. मुख्य वक्त के बतौर बोलते हुए बाबासाहब भीमराव आंबेडकर सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रिपु सूदन सिंह ने कहा कि अंतरष्ट्रीय राजनीति किसी रेखीय गति से आगे नहीं बढ़ता बल्कि सृजन एवं विध्वंस के अपने अपने पैरामीटर हैं. चाहें वो मोनार्की को तवज्जो देनेवाला आधुनिक ब्रिटेन, कनाडा, सऊदी अरब, क़तर, जापान या ऑस्ट्रेलिया हो अथवा परिवर्तनगामी धुर वामपंथी शासन वाला आधुनिक चीन, इन सभी मुल्को की तक़दीर बदलते वैश्विक परिदृश्य में ही देखा जा सकता है. उन्होंने कुस्तुन्तुनिआ से लेकर रोमन साम्राज्य तक के बदलाव और पोस्ट-रेनेशा समय के विचारधारा के अंत तक ह्रास होने को वैश्विक राजनीति का पटाक्षेप नहीं बताया और कहा कि ऐआई युग ने हमें अपनी पुरानी सभ्यताओं को एक प्रक्षेप के रूप में देखना होगा. महाशक्तियों का उभार और भारत जैसे नए प्लेयर का समावेश विश्व राजनीति के घूर्णन को गति प्रदान करता है.

मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए निदेशक मानविकी संकाय प्रो. भानु मणि दीक्षित ने कहा कि आज का यह विषय बहुत ही ज्वलंत है और इसे आख्यान से हमें हाल ही में घटे कुछ परिस्थितीजन्य घटनाएं बताती हैं कि इस समय भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है. ऐसे में इस आख्यान से हमारे ढेरों सवालों के जवाब स्वत्: ही मिल जायेंगे.

प्रो. रिपु सूदन सिंह के एकेडमिक जर्नी का उल्लेख करते हुए उक्त कार्यक्रम के समन्यक एवं मानविकी संकाय के प्रोग्राम कोआर्डिनेटर डॉ. राम प्रताप यादव ने कहा कि नेपाल की घटना को एक देश की घटना के बजाय हमें समग्रता में देखना होगा और श्रीलंका , बांग्लादेश एवं म्यांमार के उथल पुथल को डीप स्टेट के सक्रियता के अलोक में देखना होगा.

कार्यक्रम का संचालन मिस पंखुरी अरोड़ा ने किआ तथा धन्यवाद ज्ञापन डा. अनिल कुमार (२) ने किया. कार्यक्रम को सफल बनाने में फैकल्टी कोआर्डिनेटर डा. प्रदीप कुमार सिंह, डा. पल्लवी शर्मा, सुश्री बिदुषी सिंह एवं छात्रों में सिद्धार्थ मिश्रा, ज्योति अग्रवाल एवं अंशिका पुरवार इत्यादि का अथक सहयोग रहा। डा. शिल्पा शुक्ल, डा. जीतेन्द्र यादव, डा. अनिल कुमार इत्यादि फैकल्टी के साथ करब सैकड़ो बच्चो ने भागीदारी की।

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