बड़ा अजीब है अखबार का मुलाज़िम भी, वो खुद खबर है मगर दूसरों की लिखता है

The newspaper employee is a rather peculiar figure, too—he himself is a story, yet he writes about others.

चौथे स्तंभ की सबसे बड़ी ताकत संघर्षरत मीडिया कर्मियों को प्रोत्साहित कर समस्याओं के रास्ते निकाल रहे हैं।

विशाल पत्रकार समन्वय की पहल

पत्रकारिता और साहित्य के हमारे पहले उस्ताद स्वर्गीय राजेश विद्रोही ने तीन दशक पहले पत्रकारों के पीड़ा भरे अहसास को दो लाइनों में ढाल दिया था। जो पत्रकार दुनिया जहान की खबरें जमाने भर को बताता है उसकी पेशेवर दुश्वारियों और चुनौतियों की क्या खबर है इसे कोई नहीं समझना चाहता। ये सुखद आशा की किरणें दिखने लगी हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार का सूचना तंत्र पत्रकारों से समन्वय स्थापित कर उनकी पेशेवर चुनौतियों और दुश्वारियों को समझने और उसके समाधान का निरंतर प्रयास कर रहा है। उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक विशाल सिंह ने पत्रकारों से विशाल समन्वय स्थापित किया है। संघर्षशील-संघर्षरत सैकड़ों पत्रकारों से वो मिल रहे हैं,उन्हें सम्मान के साथ सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में आमंत्रित कर उनकी समस्याओं का समाधान निकाल रहे हैं। बड़े मीडिया घरानों,टीवी चैनलों-स्थापित अखबारों से अधिक लघु एवं मध्यम समाचार पत्र-पत्रिकाओं की मुश्किलों को समझ रहे हैं। लघु व मध्यम समाचार पत्रों के कार्यालय जाकर पब्लिकेशन की जटिलताओं और संघर्षों का अहसास कर विशाल सिंह संघर्षशील अखबार कर्मियो व प्रकाशकों की सराहना कर रहे हैं। चौथे स्तंभ की सबसे बड़ी ताकत संघर्षरत मीडिया कर्मियों को प्रोत्साहित कर समस्याओं के रास्ते निकाल रहे हैं।

आर्थिक सहयोग की हर संभव कोशिशें जारी

न्यूज़ चैनलों, वेब मीडिया, न्यूज एजेंसियों और लघु व मध्यम समाचार पत्रों और उससे जुड़े मीडियाकर्मियों/पत्रकारों के स्वास्थ्य,सुरक्षा और आर्थिक सहयोग की हर संभव कोशिशें जारी हैं। बता दें कि मीडियाकर्मियों/पत्रकारों के वेतन की व्यवस्था विज्ञापन से होती है। और सभी बड़े,छोटे,मध्यम मीडिया हाउस/अखबारों का नब्बे फीसद आर्थिक आय का आधा सरकारी विज्ञापन है। इसलिए पत्रकारों/मीडियाकर्मियों की आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए सूचना निदेशक विशाल सिंह ने विज्ञापन प्रदान करने में पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और सबका साथ सबका विकास उद्देश्य का पालन किया है। पत्रकारों को कवरेज/फील्ड रिपोर्टिंग में हर संभव सहयोग मिले, साथ ही व्हाट्सएप/ईमेल द्वारा समय से विज्ञप्ति और सरकारी सूचना समय से मीडिया तक पहुंचे इसके लिए सूचना विभाग का हाईटेक सूचना तंत्र और कर्मठ प्रेस ब्यूरो काबिले तारीफ काम कर रहा है। अखबारों/चैनलों/न्यूज एजेंसियों और डिजिटल मीडिया तक सूचना विभाग द्वारा सरकारी सूचनाएं पहुंचने में यदि किसी भी किस्म की कमी हो तो उसे समझने के लिए सूचना निदेशक मीडिया के साथ और भी बेहतर सामंजस्य बना रहे हैं।

अपनों  के दुख से अनजान

सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और जनता के बीच जनहित की योजनाओं को पहुंचाने के उद्देश्य का पालन तो सूचना विभाग कुशल तरीके से कर ही रहा है सूचना निदेशक विशाल सिंह विभाग के एक और महत्वपूर्ण उद्देश्य पत्रकारों के सहयोग में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सर्वविदित है कि पत्रकार सबके लिए सबकी खबरें और सूचनाएं पहुंचाता है। सत्ता-विपक्ष, राजनीति से लेकर व्यापार, स्वास्थ्य ,शिक्षा, खेल, मनोरंजन, धर्म-अध्यात्म, परिवहन,कला-संस्कृति, कानून व्यवस्था, शासन, प्रशासन और हर खास-ओ- आम से संपर्क बनाकर चलना पत्रकारिता का हुनर। बड़े संसाधनों वाले मीडिया घराने हो या न्यूज एजेंसियां, डिजिटल मीडिया, टीवी मीडिया या सैकड़ो-हजारों लघु-मध्यम पत्र-पत्रिकाओं के ख़बरनवीस हों, ये पेशेवर पत्रकार देश-दुनिया से लेकर गली-कूचे की खबरें जन-जन तक पहुंचते हैं। गली की टूटी नाली से लेकर ईरान-इजराइल -अमेरिका की मिसाइलों के खतरे झेल कर हर किस्म की खबरों से वाकिफ करने वाली पत्रकार बिरादरी अपने पेशे की चुनौतियों से किस तरह मुकाबला करता है।

पत्रकारों का दर्द जान रहे

इन कड़वी सच्चाई को समझने और समाधान निकालने के लिए विशाल सिंह ना सिर्फ अखबारों और चैनलों के कार्यालयों जा रहे हैं बल्कि सैकड़ों की संख्या में पत्रकारों को बुलाकर उन्हें संवाद स्थापित कर रहे हैं। मीडिया से समन्वय और सामंजस्य स्थापित करने के पवित्र अनुष्ठान की एक तस्वीर पिछले दिनों सोशल मीडिया में वायरल हुई। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के कांफ्रेंस हाल की इस तस्वीर में सैकड़ों पत्रकारों का हुजूम देखकर लग रहा है कि पत्रकारों का विशाल सम्मेलन आयोजित हो रहा है। तस्वीर में बैठे पत्रकारों की कुर्सियां बराबर है, ना कोई सेंट्रलाइज्ड ऊंची कुर्सी है ना कोई डायस या मंच। सैकड़ों पत्रकारों में घुले-मिले निदेशक सूचना सबकी बातें और समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना रहे है। बड़े से हाल में बैठे बड़े मजमे वाली तस्वीर में निदेशक अलग से आसानी से नजर नहीं आ रहे, वो पत्रकारों के बीच पत्रकार की तरह ही बैठे हैं क्योंकि उन्होंने कोई विशिष्ट आसन (ऊंची कुर्सी)पर बैठना बेहतर नहीं समझा।

विशाल हृदय वाले विशाल सिंह की सराहना की एक और चर्चा पत्रकारिता के गलियारों में गूंज रही है कि वो निंदक और आलोचक को भी पूरा सम्मान और समय दे रहे हैं, क्योंकि -निंदक नियरे राखिए, ऑगन कुटी छवाय, बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।

नवेद शिकोह
(राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार)
निर्वाचित सदस्य राज्य मुख्यालय संवाददाता समिति

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