
14 सितंबर 2025, सोनीपत । सोनीपत बार एसोशिएसन के हाल में आज सेंटर फॉर प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स एंड सेक्युलरिज़्म (सीपीडीआरएस) का सम्मेलन आयोजित हुआ। सम्मेलन की अध्यक्षता श्रद्धानंद सोलंकी ने की और संचालन एडवोकेट सुरेंद्र सिंह ने किया।
सम्मेलन में वक्ताओं ने लोकतांत्रिक अधिकारों और धर्मनिरपेक्षता पर मंडराते ख़तरों पर गंभीर चिंता जताई। सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट प्रवीण कुमार ने संविधान के अनुच्छेदों का उल्लेख करते हुए विस्तार से बताया कि अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार देता है, अनुच्छेद 19 नागरिकों को मौलिक स्वतंत्रताएँ देता है, अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है तथा अनुच्छेद 25 से 28 धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और धार्मिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करते हैं।
दिल्ली यूनिवर्सिटी में इक्नोमिक्स के प्रोफेसर दिबेंदु मईती ने अपने संबोधन में कहा कि मौजूदा सरकार नवजागरण काल से उपजे प्रगतिशील मूल्यों को नष्ट करने की दिशा में कार्य कर रही है और समाज को पीछे ले जाने की कोशिश कर रही है। एडवोकेट राजेंद्र ने कहा कि ये अधिकार किसी ने खैरात में नहीं दिए बल्कि कुर्बानियों से हासिल किए गए हैं । यदि इनकी रक्षा नहीं होगी तो लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता दोनों ही खोखले सिद्ध हो जाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि संगठन के बिना लोकतांत्रिक अधिकारों और धर्मनिरपेक्षता की रक्षा संभव नहीं है, इसलिए एक मज़बूत संगठन का निर्माण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता प्राण शर्मा ने सीपीडीआरएस की ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1975 की आपातकाल के बाद, वर्ष 1983 में इस संगठन की स्थापना हुई थी। इसके संस्थापकों में जस्टिस कृष्ण अय्यर, जस्टिस राजेंद्र सच्चर, कुलदीप नैयर तथा शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की बहन बीबी अमर कौर जैसी शख्सियत शामिल थीं। संगठन की स्थापना का उद्देश्य लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा करना था और आज भी यह संगठन उसी ध्येय के साथ निरंतर सक्रिय है।
रुस्तम अली, नरदेव सहित कई अन्य वक्ताओं ने भी सम्मेलन को संबोधित किया और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष को और मज़बूत करने का आह्वान किया। सम्मेलन के समापन पर यह संकल्प लिया गया कि लोकतांत्रिक अधिकारों और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा के लिए जनसंघर्ष को और संगठित किया जाएगा। इसी कड़ी में सीपीडीआरएस की 13 सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया गया, जिसमें वीरेंद्र सिंह दहिया, एडवोकेट जितेंद्र कुमार, एडवोकेट सुरेंद्र सिंह, बलबीर सैनी, एडवोकेट कपिलदेव, समाजसेवी रुस्तम अली और प्रवीण कुमार को शामिल किया गया।
