kakori action: आज़ादी आन्दोलन के गौरवशाली इतिहास में काकोरी की घटना एक महत्वपूर्ण

कानपुर।काकोरी ऐक्शन के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आज 24 अगस्त 2025 को दोपहर 1 बजे से कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल काॅलेज लेक्चर थियेटर-1 में काकोरी ऐक्शन शताब्दी वर्ष आयोजन समिति की ओर से राज्य स्तरीय स्मृति सभा व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।


कार्यक्रम की अध्यक्षता- प्रो. ब्रजेश सिंह कटियार (एचबीटीयू कानपुर) ने की। कार्यक्रम के पहले सत्र की शुरुआत “सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है” प्रसिद्ध गीत से हुई। उद्घाटन भाषण इलाहाबाद के एडवोकेट विकास कुमार मौर्य ने किया। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडवोकेट के के राय ने बात रखी। शाहजहांपुर से हमारे बीच मे आये शहीद अशफ़ाक़ उल्ला के परिवार के आफाक उल्ला जी ने बात रखी। इसके बाद संयोजन समिति के सदस्य सचिन जैन ने सम्बोधित किया।आभार मिथलेश मौर्य ने व्यक्त किया व स्मृति सभा का संचालन दिलीप कुमार ने किया।


दूसरे सत्र में चले सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न स्कूल-काॅलेजों व विश्वविद्यालयों के छात्रों ने विभिन्न प्रकार की प्रस्तुतियां दिये। जिसमें नाटक – “काकोरी के शहीदों के नाम” इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों के द्वारा प्रस्तुत किया गया। बीएचयू वाराणसी व लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों की ओर से बांसुरी वादन किया गया। पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के छात्रों ने क्रांतिकारी गीत प्रस्तुत किये।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा- आज़ादी आन्दोलन के गौरवशाली इतिहास में काकोरी की घटना एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है जिसने दिल्ली से लंदन तक अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिला दीं थीं। क्रांतिकारियों को देश की आजादी के लिए धन की आवश्यकता थी, उन्होंने अंग्रेजों के सरकारी खजाने को अपने कब्जे में लेने की योजना बनाई और सुनियोजित ढंग से लखनऊ के पास काकोरी में ट्रेन में रखे अंग्रेजों के सरकारी खजाने को लूटने का निर्णय लिया, जिसे 9 अगस्त, 1925 को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। इस घटना को काकोरी ट्रेन एक्शन के नाम से जाना गया, जिसका नेतृत्व क्रांतिकारी दल हिंदुस्तान रिपब्लिकन आर्मी (HRA) के नेता रामप्रसाद बिस्मिल ने किया। इस एक्शन में कुल 10 क्रांतिकारी शामिल थे। जिनके नाम इस प्रकार हैंः रामप्रसाद बिरिमल, अशफाक उल्ला खां, चंद्रशेखर आजाद, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, मन्मथनाथ गुप्त, केशव चक्रवर्ती, बनवारीलाल, मुरारीलाल, मुकुन्दीलाल और शचीन्द्रनाथ बख्शी। इस घटना को भारतीय आजादी आन्दोलन के इतिहास में काकोरी कांड के नाम से भी जाना जाता है।

मुकदमों का दौर चला

बाद में अंग्रेजी हुकूमत द्वारा क्रांतिकारियों की धरपकड़ शुरू हुई और एक के बाद एक लगभग 40 से अधिक क्रांतिकारी गिरफ्तार कर लिए गये। इस घटना के एक प्रमुख किरदार चंद्रशेखर आजाद को अंग्रेजों की पुलिस कभी गिरफ्तार नही कर सकी। मुकदमों का दौर चला और चार क्रांतिकारियों रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेन्द्र लाहिड़ी व ठाकुर रोशन सिंह को फांसी दी गई व कई अन्य को कालापानी, उम्रकैद, 10 साल और 5 साल कारावास की सजा सुनाई गई। यह वर्ष काकोरी ऐक्शन की घटना का 100 वां वर्ष है। यह हमें उस गौरवशाली संघर्ष की याद दिलाता है। हिंदुस्तान रिपब्लिकन आर्मी (HRA) का उद्देश्य एक ऐसा गणतांत्रिक आजाद भारत बनाना था जिसमें हर एक इंसान के लिए जरूरी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सुरक्षा व आवास की जरूरतें पूरी हो पायें। देश में अमन-चैन, भाईचारा रहे व धर्म-जाति और क्षेत्र के नाम पर कोई बंटवारा न हो। यही सपना लेकर काकोरी के क्रांतिकारी शहीद हुए।

नौजवानों को एक नई राह दिखाएंगे

उत्तर प्रदेश आजादी आन्दोलन के दौरान क्रांतिकारी गतिविधियों का केंद्र रहा है व बिस्मिल-अशफाक सहित कई अन्य क्रांतिकारियों की जन्मभूमि भी है। उनके विचार देश व प्रदेश के छात्रों नौजवानों को एक नई राह दिखाएंगे तथा साम्प्रदायिकता की समस्या से लड़ने में एक कारगर हथियार साबित होंगे। इसी भाव को केन्द्र में रखते हुए और काकोरी के शहीदों के विचार व आदर्श को आमजन खासकर छात्रों, युवाओं व महिलाओं में ले जाने के मकसद से काकोरी की घटना का 100वां वर्ष मनाया जा रहा है। अंत में उत्तर प्रदेश स्तरीय काकोरी शताब्दी वर्ष आयोजन समिति का गठन किया गया। जिसमें सलाहकार समिति के अलावा राज्य अध्यक्ष प्रोफ. ब्रजेश सिंह कटियार, उपाध्यक्ष प्रभात राय, प्रोफ. खान अहमद फारूक, श्रीमती लाता शर्मा, सचिन जैन व अन्य सचिव एडवोकेट विकास मौर्य सहित 42 सदस्यों के साथ कार्यकारिणी चुनी गई।

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