सपा नेता Azam Khan पर एक और एफआईआर दर्ज, जानिए अब किस मामले नाम आय पूर्व कैबिनेट मंत्री का नाम

Another FIR registered against SP leader Azam Khan; find out in which case the former cabinet minister has now been named.

विजिलेंस जांच में जमीन की बिक्री से समिति को 2.08 करोड़ रुपये के राजस्व के नुकसान की पुष्टि हुई है।

लखनऊ। यूपी के कदृदावर नेता रहे Azam Khan के सितारे लगातार ​गर्दिश में चल रहे है। एक के बाद एक मुश्किलें उनके सामने आ रही है। पुराने मामले से आजाद नहीं अब उनके नाम राज्य हज समिति की जमीन बेचने में गड़बड़ी के आरोप में विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज की है। आजम उस समय राज्य हज समिति के अध्यक्ष थे। इस मामले में तत्कालीन सचिवों लईक अहमद व डॉ. एमएए खान, आमिश डेवलपर्स के प्रोपराइटर मो. अयूब और मुस्तकीम अहमद को भी आरोपी बनाया गया है। विजिलेंस जांच में जमीन की बिक्री से समिति को 2.08 करोड़ रुपये के राजस्व के नुकसान की पुष्टि हुई है।

विजिलेंस के लखनऊ सेक्टर में इंस्पेक्टर ध्रुव चंद्र मौर्य की तहरीर पर दर्ज एफआईआर के मुताबिक राजधानी के ऐशबाग क्षेत्र के कायमखेड़ा (दुगांवा) में खसरा संख्या-117 में हज समिति की करीब 60 हजार वर्गफीट जमीन थी। उक्त जमीन की बिक्री में आजम व अन्य आरोपियों ने निजी फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया और जमीन बिक्री में नियमों को नजर अंदाज किया गया। जांच के बाद विजिलेंस ने धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज कर विवेचना इंस्पेक्टर संजय कुमार सिंह को सौंपी है।

2024 से चल रही थी जांच

शिकायत मिलने के बाद शासन ने तीन मई 2024 को इस मामले की जांच के आदेश दिए थे। जांच में पता चला कि आमिश डेवलपर्स को फायदा पहुंचाने के लिए जमीन बेचने में नियमों का पालन नहीं किया गया। इसके अलावा पूर्व मंत्री आजम खां के करीबी माने जाने वाले बिल्डर एवं ठेकेदार सैयद खालिद से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पूछताछ करने जा रहा है। ईडी उनको समन भेजकर राजधानी स्थित जोनल कार्यालय में तलब करेगा। वह जौहर एसोसिएट फर्म से जुड़े बताए जाते हैं और दिल्ली समेत कई शहरों में रिहायशी प्रोजेक्ट के निर्माण का कार्य करते हैं। इसके अलावा आधा दर्जन से अधिक बिल्डर भी रडार पर आ चुके हैं।

चंदे के नाम पर खेला

ईडी ने जांच में पता लगाया कि दिल्ली, लखनऊ, नोएडा, रामपुर, मुरादाबाद, सहारनपुर, सहारनपुर, मेरठ, बरेली के कई ठेकेदारों, कारोबारियों, शैक्षणिक संस्थानों ने जौहर ट्रस्ट को चंदा दिया था। इनमें से कुछ लोगों से ईडी ने दो वर्ष पहले पूछताछ की थी, उन्होंने कबूला था कि चंदे की रकम का चेक देने के बदले उन्हें नगदी दी गई थी। जांच में 60 करोड़ की राशि चंदे में मिलने और कुछ शेल कंपनियों का इस्तेमाल होने के सुराग मिलने पर दोबारा पड़ताल की जा रही है।बता दें कि आजम खा अभी जेल में सजा काट रहे है।

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