यूपी में मर गया सिस्टम: डाक्टर बोले पर्चा बनवाकर लाओ, जब तक बेटे पर्चा बनवाते पिता ने तोड़ा दम, घर वालों ने किया हंगामा

System fails in UP: Doctors demanded a registration slip; the father passed away while his sons were getting it made, sparking an uproar by the family.

स्टाफ ने मरीज को भर्ती करने से साफ मना कर दिया और कहा कि पहले गेट नंबर 2 पर जाकर नया पर्चा बनवाकर लाओ तब भर्ती करेंगे।

फिरोजाबाद। 200-BedHospital यूपी के अस्पतालों में बैठे कर्मचारियों की संवेदना मच चुकी है, उनकी संवेदनहीनता का उदाहरण समय—समय पर देखने को मिल जाता है। ताजा उदाहरण यूपी के फिरोजाबाद के अस्पताल में देखने को मिला। यहां एक बुजुर्ग स्ट्रेचर पर तड़पता रहा है, बेटे डाक्टर से इलाज की गुहार लगाते रहे,वहीं डाक्टर बोले पहले पर्चा बनवाकर लाओ तब इलाज करेंगे। जब तक बेटे पर्चे का इंतजाम करते तब तक पिता ने तड़प— तड़प कर दम तोड़ दिया।

फिरोजाबाद के नारखी थाना क्षेत्र के गांव आतीपुर निवासी महावीर सिंह (55) की तबीयत रविवार दोपहर बिगड़ी थी। बेटे दिलीप ने बताया कि पिता के सीने में तेज दर्द था और कफ के साथ खून आ रहा था। वह उन्हें लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे लेकिन स्टाफ ने बेड खाली न होने की बात कहकर इमरजेंसी में ही ड्रिप लगा दी और दवा देकर शाम छह बजे घर भेज दिया। सोमवार को फिर आने को कहा। दिलीप सोमवार सुबह 8 बजे 10 वर्षीय छोटे भाई जिगर के साथ पिता को एंबुलेंस से लेकर दोबारा मेडिकल कॉलेज पहुंचे। पिता की हालत गंभीर थी लेकिन ट्रॉमा सेंटर में इलाज करने के बजाय डॉक्टरों और स्टाफ ने 200 शैय्या अस्पताल भेज दिया। दिलीप और जिगर पिता को स्ट्रेचर पर लिटाकर 200 शैय्या अस्पताल पहुंचे तो वहां भी स्टाफ ने मरीज को भर्ती करने से साफ मना कर दिया और कहा कि पहले गेट नंबर 2 पर जाकर नया पर्चा बनवाकर लाओ तब भर्ती करेंगे।

पर्चा बनवाकर आए तब तक वृद्ध ने तोड़ा दम

दिलीप का आरोप है कि उन्होंने रविवार को ट्रॉमा सेंटर का पर्चा और डॉक्टरों की अन्य पर्चियां दिखाईं लेकिन स्टाफ अड़ा रहा। बेबस होकर छोटे भाई को पिता के पास छोड़कर वह पर्चा बनवाने चले गए और जब हांफते हुए पर्चा लेकर लौटे तो बहुत देर हो चुकी थी। स्ट्रेचर पर लेटे पिता दम तोड़ चुके थे। कहा कि उनके पिता को समय रहते इलाज मिल गया होता तो उनकी जान बच सकती थी। यह घटना डीएम के निरीक्षण के महज 24 घंटे के भीतर होने से पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं।

मरीज की मौत के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने स्ट्रेचर पर शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। सूचना पर ट्रॉमा सेंटर चौकी प्रभारी शुभम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और आक्रोशित परिजनों को समझाकर मामला शांत कराया। परिजन बिना पोस्टमार्टम कराए शव को घर ले गए। मामले में जब सीएमएस डॉ. नवीन जैन से उनका पक्ष जानने के लिए फोन किया गया तो उनका कहना था कि इस प्रकार के किसी मामले की शिकायत उनके पास नहीं आई है। घटनाक्रम के बारे में उनको जानकारी नहीं है।

यह है नियम

बता दें कि गंभीर मरीजों के इलाज को लेकर स्वास्थ्य विभाग और सुप्रीम कोर्ट के नियम बेहद स्पष्ट हैं। सुप्रीम कोर्ट (परमानंद कटारा बनाम भारत संघ केस) के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में मरीज की जान बचाना डॉक्टर और अस्पताल की पहली ड्यूटी है। पर्चा बनवाने या किसी भी अन्य कागजी औपचारिकता के आधार पर इलाज में एक मिनट की भी देरी नहीं की जा सकती। नियम के मुताबिक, गंभीर मरीज के अस्पताल पहुंचते ही उसे तुरंत ट्रॉमा सेंटर या इमरजेंसी वार्ड में अटेंड करना अनिवार्य है। डॉक्टर सबसे पहले प्राथमिक उपचार देकर मरीज की स्थिति को स्थिर करने के लिए बाध्य हैं। मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत, जब डॉक्टरों की टीम गंभीर मरीज का इलाज शुरू कर दे तब तीमारदार जाकर पंजीकरण पर्चा या अन्य औपचारिकताएं पूरी कर सकते हैं। पर्चे के इंतजार में मरीज को स्ट्रेचर पर तड़पने के लिए बिल्कुल नहीं छोड़ा जा सकता। वहीं इस मामले में डीएम संतोष कुमार शर्मा का कहना है कि घटना संवेदनशील है। इसकी जांच कराई जाएगी। पर्चे के अभाव में गंभीर हालत वाले किसी भी मरीज को उपचार से नहीं रोका जाएगा।

RoadAccident : बागपत में गोगामेड़ी से लौटते समय पिकअप डिवाइडर से टकराई, बदायूं के छह श्रद्धालुओं की मौत, 27 लोग घायल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

गणेश जी के विविध नाम अंतरा बनर्जी की तस्वीर से मचा हड़कंप Rumors of Palak Tiwari and Ibrahim dating. Community unites against child labour, holds awareness rally. ‘राम’ बनकर छाए रणबीर कपूर