Mass murder बेटे की बीमारी और ​आर्थिक तंगी ने ऐसा तोड़ा कि पूरे परिवार की हत्या के बाद फंदे पर झूल गया सत्यवीर

Satyaveer hanged himself after killing his entire family due to his son's illness and financial hardship.

यह देख पुलिस वालों का भी कलेजा कांप गया।

कासगंज। Mass murder व्यक्ति अपने परिवार को अच्छा भविष्य देने के लिए जी तोड़ मेहनत करता है, इसके बाद भी वह परिवार की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाता है तो वह गहरे निराशा में चला जाता है। इसके बाद वह सही गलत का फैसला करने में कई बार गलत फैसला उठा लेता है। कुछ ऐसी ही कहानी निकलकर सामने आई है यूपी के कासंगंज जिले में सत्यवीर नामक एक व्यक्ति को बेटे की बीमारी और ​आर्थिक तंगी ने ऐसा तोड़ा कि पूरे परिवार की हत्या करने के बाद खुद फंदे पर झूल गया। शनिवार शाम को जब इसकी जानकारी पड़ोसियों के साथ ही पुलिस को लगी तो हड़क्ंप मच गया। पुलिस जब दरवाजा तोड़कर अंदर गई तो घर में मुखिया की लाश फंदे पर तो परिवार के चार सदस्यों के शव जमीन पर पड़े मिले। यह देख पुलिस वालों का भी कलेजा कांप गया। पुलिस ने परिजनों को सूचित कर बुलाया और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

खबर मिलते ही मचा हड़कंप

कासगंज के अमांपुर के एक परिवार के पांच लोगों के शव एक घर में मिलने से सनसनी फैल गई। दिल दहलाने वाली घटना पर मौके पर पहुंची पुलिस के मुताबिक घर के मुखिया ने अपनी पत्नी और तीन बच्चों की जान लेने के बाद फंदे पर लटकर अपनी जान दे दी। पड़ोसियों और परिजन से बातचीत के बाद डीआईजी प्रभाकर चौधरी ने बताया कि इस वारदात के पीछे प्रथम दृष्टया आर्थिक तंगी का कारण सामने आया है। परिवार के लोगों की मौत तीन दिन पहले हुई है। घटना से पहले मृतक मुखिया ने घर के दरवाजे अंदर से बंद कर लिए और एक दरवाजे पर ताला भी लगा दिया। इसके बाद पत्नी बच्चों की जान लेकर फंदा लगा लिया। इसकी सूचना मिलते ही डीएम, एसपी से लेकर आईजी तक मौके पर पहुंचे।

मृतक सत्यवीर के चाचा गया प्रसाद ने बताया कि पहले से ही सत्यवीर के हालात ठीक नहीं थे, इसके बाद बेटे की बीमारी के भारी भरकम खर्च से और हा बुरे हो गए। उसके बेटे गिरीश को न्यूरो की समस्या थी। जिसके इलाज में काफी खर्चा हो रहा था।

कुछ दिन पहले ही पड़ोसी से एक हजार रुपये उधार लिए थे। उसने लोगों से आर्थिक मदद ली। पड़ोसियों ने बताया कि परिवार के लोग उसे सहयोग नहीं कर रहे थे। इससे वह काफी दुखी था। पड़ोसियों ने बताया कि सत्यवीर चार दिन पहले मदद के लिए गांव गया था, लेकिन मदद नहीं मिली। इसके बाद से ही वह अवसाद में चला गया और पत्नी और बच्चों की जान लेने के बाद खुद भी जान दे दी।

मृतक के चाचा गया प्रसाद के मुताबिक सत्यवीर करीब आठ साल पहले मूल गांव नगला भोजराज से अमांपुर में आकर रहने लगा था, यहां पेट्रोल पंप के पीछे किराए पर रहने लगा, जिसमें एक दुकान थी और पीछे छोटे से कमरे में परिवार रह रहा था। परिस्थितियों ने उसे घोर अवसाद में ढकेल दिया।

न चूल्हा जला, न घर में खाना मिला

तीन दिन से बंद मकान को जब खोला गया तो पुलिस को चूल्हा साफ मिला। इसके आसपास कोई बर्तन भी नहीं था। न ही कोई खाने-पीने का सामान ही मिला। उसके घर में कुछ खास सामान भी नहीं था। मौत कब, किस समय हुई, परिवार के लोगों ने खाना खाया या नहीं, इस बारे में कुछ स्पष्ट नहीं है, लेकिन मौके पर चूल्हे में राख तो दिखाई दी, लेकिन आसपास बर्तन थे और न ही सामान। थाली और बर्तनों में खाना भी रखा नहीं मिला। बच्चे की बीमारी और तंगहाली ने अवसाद में डूबे सत्यवीर को यह खौफनाक कदम उठाने को मजबूर कर दिया। अमांपुर विधायक हरिओम वर्मा ने घटना पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि परिजनों की मौत के मामले के पीछे आर्थिक तंगी के अलावा और कोई कारण नहीं है। परिजन से कोई विवाद हो तो जांच में साफ होगा।

दरवाजा काटकर घुसी पुलिस

घटना में सत्यवीर (45), उसकी पत्नी रामश्री (40), उसकी बड़ी बेटी प्राची (14), आकांक्षा (13) एवं बेटा गिरीश (10) के शव पुलिस ने बंद घर से बरामद किए। शनिवार शाम साढ़े छह बजे बंद घर में परिवार के मुखिया सत्यवीर व अन्य परिजनों के मृत होने की सूचना पुलिस मिली। पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची। चूंकि घर अंदर से बंद था इसलिए पुलिस प्रवेश नहीं कर सकी। इस पर एसपी ने फॉरेंसिक टीम व डॉग स्क्वायड को मौके पर भेजा और वीडियोग्राफी कराकर बंद मकान का दरवाजा कटवाया।

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