लखनऊ।Politics of Casteism एक समय था,जब यूपी में सभी दल जातिवाद की राजनीति को हथियार बनाकर सत्ता की कुर्सी तक पहुंचते थे। अब हाईकोर्ट के आदेश माने या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच की, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने जातिवाद की राजनीति पर पूर्ण विराम लगा दिया। हाईकमान के फैसले के बाद भाजपा विधायकों ने जाति विशेष के जनप्रतिनिधियों की बैठकों से पैर पीछे खींच लिए हैं। इससे उनकी 5 जनवरी 2026 को होने वाली विशेष बैठक भी खतरे में नजर आ रही है। पंकज चौधरी ने साफ कर दिया है कि ऐसी गतिविधियां भाजपा की संविधानिक परंपराओं के अनुकूल नहीं हैं।बता दें पिछले कुछ चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जातिवाद की राजनीति को मात देने के लिए युवा, नौजवानों और महिलाओं को जाति बताकर उनके विकास का जो खाका खींचा है। वह विपक्ष को चारों खाने चित्त कर रहा है।
बीजेपी प्रदेश मुखिया ने जाति विशेष के भाजपा विधायकों की हाल में हुई बैठकों पर सख्त हिदायत दी है कि वे नकारात्मक और जातिवादी राजनीति का शिकार न बनें। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल खबरों के अनुसार विधानसभा सत्र के दौरान कुछ जनप्रतिनिधियों ने विशेष भोज का आयोजन किया था, जिसमें उन्होंने अपने समाज को लेकर चर्चा की। उनसे बात कर भविष्य में सतर्कता बरतने को कहा गया है।

जातिवादी राजनीति का अंत
प्रदेश अध्यक्ष ने जनप्रतिनिधियों से कहा है कि ऐसी गतिविधियों से गलत संदेश जाएगा। भविष्य में ऐसी किसी भी गतिविधि को अनुशासनहीनता माना जाएगा। पीएम नरेंद्र मोदी की विकासवादी राजनीति और राष्ट्रवाद के सामने प्रदेश में विपक्ष की जाति आधारित राजनीति का अंत हो रहा है। जाति आधारित राजनीति करने वाली सपा, बसपा और कांग्रेस का भविष्य अंधेरे में है। ऐसे दल भाजपा के खिलाफ अंधेरे में तीर छोड़ रहे हैं। भाजपा के जनप्रतिनिधि पार्टी की मर्यादा और अनुशासन में काम करते हैं। ब्राह्मण विधायकों की बैठक के बाद उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक अचानक दिल्ली पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। उनकी इस मुलाकात के सियासी निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। कुछ लोग इसे उप मुख्यमंत्री के बढ़ते कद से जोड़कर देख रहे हैं तो कुछ लोग इसे भाजपा की रणनीति बता रहे हैं।
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