Black goldके लिए एशिया का सबसे बड़ा विस्थापना, जमींदोज होंगी 22 हजार इमारतें, खत्म होगा शहर का अस्तित्व

Asia's biggest displacement for black gold, 22 thousand buildings will be razed to the ground, the city will cease to exist

पांच हजार से ज्यादा छोटे-बड़े दुकानदार भी हटाए जाएंगे।

सोनभद्र। धरती की कोख से Black gold निकालने के लिए एक प्राचीन शहर को विस्थापित किया जाएगा। यह विस्थापन देश ही नहीं एशिया का सबसे बड़ा विस्थापन होने जा रहा है। इस विस्थापन में कई स्कूल कॉलेज, मंदिर—मस्जिद, लोगों के घरों के साथ ही सरकारी आवास और कार्यालय को जमीदोज कर दिया जाएगा। एक बसे बसाए शहर को उजाड़ा जाएगा। देश की उर्जा राजधानी सिंगरौली से चार बड़े कॉलेज, 20 से ज्यादा प्रमुख स्कूल और कई बड़े अस्पताल शामिल हैं। मंदिर और मस्जिद सहित अन्य धर्मस्थल भी टूटेंगे। पांच हजार से ज्यादा छोटे-बड़े दुकानदार भी हटाए जाएंगे।

विस्थापन में 30 हजार करोड़ होगा खर्च

बता दे मोरवा शहर सिंगरौली का दिल है। यह जिस जगह पर बसा है, वहां जमीन के नीचे कोयले का विशाल भंडार मिला है। कोल इंडिया की संस्था नाॅर्दन कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) यूपी-एमपी सीमा पर स्थित अपनी जयंत कोयला खदान का विस्तार करते हुए यहां 927 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण करेगा। इस पूरी प्रक्रिया पर करीब 30 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे।एनसीएल के सर्वे के मुताबिक यहां से करीब 800 मिलियन टन कोयला निकाला जाएगा। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पिछले साल फरवरी में कोल बियरिंग एरिया एक्ट की धारा-9 (अधिग्रहण की तैयारी) लागू की गई थी। अब इसे आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके लिए भूमि, मकान, दुकान और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान की नाप जोख शुरू की गई है। इस आधार पर विस्थापितों के पुनर्वास का आकलन करते हुए मुआवजा दिया जाएगा।

30 हजार परिवार होंगे विस्थापित

जयंत परियोजना के विस्तार के लिए मोरवा में 927 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होना है। करीब 30 हजार परिवारों को विस्थापित किया जाएगा। यह कोल इंडिया का सबसे बड़ा विस्थापन है। इसी के अनुरूप तय मानकों के तहत प्रभावित परिवारों के बेहतर पुनर्वास की भी व्यवस्था की जाएगी। जिस भूमि का अधिग्रहण होना है, उस पर एनसीएल का मुख्यालय, आवास और सिंगरौली नगर निगम के 11 वार्ड और मुख्य बाजार भी हैं। इस विस्थापन के बाद सिंगरौली शहर एक तिहाई ही रह जाएगा। विस्थापन और अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया के लिए अभी कोई डेडलाइन तय नहीं है, लेकिन इसमें करीब डेढ़ से दो साल लगने का अनुमान है। जयंत परियोजना से कोल उत्पादन करीब 30 मिलियन टन प्रति वर्ष है। इसे अगले तीन साल में 35 मिलियन टन करने का लक्ष्य है।

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