बरसात ने तोड़ी कमर,साहूकारों के डर से कर्जदार किसान ने फांसी लगाकर दी जान

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Rain broke his waist, the debtor farmer hanged himself due to fear of moneylenders
परिजनों का कहना है कि उस पर 12 लाख रुपये का कर्ज था।

झांसी। यूपी का बुंदेलखंड वैसे तो हमेशा पानी की कमी से जूझता हैं, किसान किसी तरह फसल पैदा करते है।लेकिन इस बार किसानों की मेहनत को बेमौसम हुई बारिश ने बर्बाक कर दिया। इससे उन किसानों को सबसे ज्यादा झटका लगा, जिन्होंने कर्ज लेकर फसल बोई थी, उन्हें रात दिन साहूकार डर सताए जा रहा था। इसी डर की वजह से झांसी के लहचूरा थाना इलाके में एक किसान ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बुधवार की तड़के सुबह घर से 500 मीटर दूर पेड़ से लटकता हुआ उसका शव पाया गया। परिजनों का कहना है कि उस पर 12 लाख रुपये का कर्ज था।

फसल बर्बाद होने का था गम

किसान ने 40 बीघा जमीन पर फसल बाई थी जो बेमौमस बारिश से बर्बाद हो गई थी, इसके बाद से वह परेशान रह रहा था। कर्ज की वजह से वह लगातार तनाव में था। इस वजह से उसने देर रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उधर, किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी मौके पर पहुंचे। परिजनों को आर्थिक मदद दिलाए जाने की मांग की है।

दोनों भाई करते है खेती

मामला मऊरानीपुर के ग्राम बम्होरी का है। स्वामी प्रसाद पेशे से किसान हैं। उनके दो बेटे हैं, ब्रगभान (25) और उमेश (42)। स्वामी नारायण की अब उम्र हो चुकी है, इसलिए दोनों बेटे ही खेती करते हैं। वह सिर्फ घर पर ही रहते हैं। इन दोनों के पास 40 बीघा खेती है। जिसमें ये लोग खेती करते हैं। अभी बंटवारा नहीं हुआ है।

सुबह करीब 5 बजे की बात है। ब्रगभान का शव पेड़ से लटकता हुआ पाया गया। इसकी सूचना किसी ग्रामीण ने ही परिजनों को दी। भाई उमेश ने बताया, “कई दिनों से वह परेशान चल रहा था। हम दोनों ने 40 बीघा जमीन पर खरीफ की फसल व दहलन की फसल बोई थी। 6 लाख रुपये केसीसी और 6 लाख रुपये साहूकारों से उधार लिया था। कुल 12 लाख रुपये का कर्जा था। लेकिन फिर भी सब ठीक चल रहा था।”

बरसात से फसल हुई थी बर्बाद

भाई ने बताया “हम दोनों ने यह सोचा था कि इस बार अच्छी फसल होगी। अच्छी पैदावार होगी तो अच्छा आय होगा। लोगों का कर्ज चुका देंगे, लेकिन सब बर्बाद हो गया। बे मौसम बरसात होने से फसलें बर्बाद हो गईं। तभी से भाई ब्रगभान बहुत परेशान रहता था। इस वजह से उसने देर रात आत्महत्या कर लिया।”वहीं, पत्नी रचना ने बताया, “रात में सब लोग खाना खाकर सो गए थे। रात करीब 12 बजे नींद खुली तो देखा कि ये घर में नहीं थे। घरवालों को बताया, लेकिन कुछ पता नहीं चला। काफी देर बाद भोर में इनके जाने की खबर मिली। मेरा पांच साल का बेटा है। उनके चले जाने के बाद अब उसे किस तरह से पालूंगी।

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