लखनऊ। यूपी की पहचान तेजी से बदल रही है, परंपरागत व्यवस्या के अलावा अब उद्योग धंधे तेजी से पांव पसार रहे है। योगी सरकार ने भी रोजगार व स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े कदम उठाए। जिसका परिणाम अब देखने को मिलने लगा है। यहां छोटे स्तर पर शुरू किए गए आठ Startups एक अरब डॉलर से अधिक के मूल्यांकन वाले यूनिकॉर्न बन चुके हैं, जबकि एक अन्य कंपनी सूनिकॉर्न की कतार में है। आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग की सूची में पेटीएम, फिजिक्सवाला, पाइनलैब्स, इंफोएज, मॉजलिक्स, इंडियामार्ट, इनोवेसर और रेटगेन यूनिकॉर्न हैं। रैफे एमफिन सूनिकॉर्न है। इन कंपनियों को यूनिकॉर्न बनने में 10 से 25 साल लगे।
वर्ष 2000 में शुरू हुआ पेटीएम आज बड़े डिजिटल वित्तीय मंचों में शामिल है। वित्त वर्ष 2025-26 में इसका परिचालन राजस्व 8,437 करोड़ रुपये और सालाना शुद्ध लाभ552 करोड़ रुपये रहा। फिजिक्सवाला ने 2016 में यूट्यूब चैनल से शुरुआत की और 2020 में कंपनी के रूप में स्थापित हुआ। आज यह ऑनलाइन, ऑफलाइन और हाइब्रिड शिक्षा का प्रमुख मंच है। पाइनलैब्स की शुरुआत 1998 में हुई थी। यह डिजिटल भुगतान और मर्चेंट कॉमर्स के क्षेत्र में प्रमुख कंपनी है। मार्च 2026 तक इसके करीब 5,357 कर्मचारी थे। वर्ष 1995 में शुरू हुई इंफोएज ने नौकरी डॉट कॉम से सफर शुरू किया और बाद में विवाह, रियल एस्टेट और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में विस्तार किया। वित्त वर्ष 2025-26 में इसका समेकित शुद्ध राजस्व करीब 3,285 करोड़ रुपये रहा। मॉजलिक्स ने बी2बी ई-कॉमर्स, इंडियामार्ट ने कारोबारियों को ऑनलाइन खरीदारों से जोड़ने और रेटगेन ने यात्रा व होटल उद्योग के लिए सॉफ्टवेयर समाधान विकसित कर पहचान बनाई। रेटगेन में करीब 800-1,000 कर्मचारी हैं और इसका राजस्व करीब 293 करोड़ रुपये रहा। इनोवेसर का मुख्यालय सैन फ्रांसिस्को में है, जबकि नोएडा और बंगलूरू में प्रमुख संचालन है। मार्च 2026 में कंपनी में करीब 2,515 कर्मचारी थे।
एक अरब डालर की कंपनी बनती है यूनिकॉर्न
यूनिकॉर्न वह निजी स्टार्टअप है जिसका मूल्यांकन कम से कम एक अरब डॉलर यानी करीब 8,900 करोड़ रुपये हो। सूनिकॉर्न के जल्द यूनिकॉर्न बनने की संभावना होती है। इन कंपनियों में पेटीएम का राजस्व करीब 7,000 करोड़, फिजिक्सवाला 2,000 करोड़, पाइनलैब्स 1,500 करोड़, इंफोएज 3,900 करोड़, मॉजलिक्स 5,700 करोड़, इंडियामार्ट 1,380 करोड़, इनोवेसर 1,250 करोड़, रेटगेन 1,000 करोड़ और रैफे एमफिन 268 करोड़ रुपये है। आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रमुख सचिव आलोक कुमार का कहना है कि प्रदेश में स्टार्टअप नीति के जरिये निवेश और विस्तार के अवसर उपलब्ध कराकर कारोबारी माहौल को बेहतर बनाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य यूपी के स्टार्टअप को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान दिलाना है, जिसमें एआई, डीप-टेक, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्वास्थ्य तकनीक जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर रहेगा।
