नईदिल्ली। EarthquakeInColombia भूंकप की कंपन से दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में भीषण तबाही मची हुई है। भूकंप के बाद लोगों को बचाने के लिए बड़े स्तर पर रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक मिले आंकड़ों के अनुसार 132 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई लोग मलबे में फंसे हुए हैं। भूकंप से तबाही के बाद कई देशों के नेताओं ने कोलंबिया के लोगों के प्रति संवेदना और समर्थन जताया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि मुश्किल की इस घड़ी में कोलंबिया फ्रांस की दोस्ती और मदद पर भरोसा कर सकता है। उन्होंने भूकंप में मारे गए लोगों, उनके परिवारों, घायलों और प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना जताई। मैक्रों ने राहत और बचाव कार्य में जुटे लोगों की भी सराहना की।
इक्वाडोर ने कोलंबिया की करेगा मदद
भूकंप से प्रभावित कोलंबिया के लिए पड़ोसी देश इक्वाडोर ने तत्काल मदद की पेशकश की है। इक्वाडोर के राष्ट्रपति डेनियल नोबोआ अज़िन ने कहा कि उनका देश कोलंबिया के साथ खड़ा है। उन्होंने कोलंबिया की मदद के लिए 47 बचावकर्मियों, प्रशिक्षित कुत्तों और जरूरी उपकरणों वाली यूएसएआर टीम उपलब्ध कराने की पेशकश की। इस टीम के पास सात दिनों तक अभियान चलाने की क्षमता बताई गई है। इक्वाडोर ने कहा कि कोलंबिया की जरूरत के मुताबिक वह इस टीम को भेजने के लिए तैयार है। अमेरिका ने भी कोलंबिया में आए बड़े भूकंप पर नजर रखने की बात कही है।अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन स्थिति पर करीबी नजर रख रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका कोलंबिया के लोगों और राष्ट्रपति अबेलार्डो डी ला एस्प्रीएला के प्रशासन की मदद के लिए तैयार है।
बचाव अभियान में यह चुनौती
भूकंप के बाद सबसे बड़ी चुनौती मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है। अब भी मलबे में फंसे हुए हैं। ऐसे में बचाव दलों के सामने समय सबसे बड़ी चुनौती है। दूसरी ओर, प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन और घायलों तक सहायता पहुंचाने का काम भी जारी है। कोलंबिया के साथ खड़े देशों की ओर से मदद की पेशकश के बीच अब स्थानीय प्रशासन के सामने राहत अभियान को तेजी से आगे बढ़ाने की चुनौती है।
