खाकी मानवीय पहल: आजमगढ़ हत्याकांड के आरोपित अरविंद की दोनों बच्चियों को एसपी ने लिया गोद, यह सुविधाएं भी मिलेंगी

SP adopts both daughters of Arvind, the accused in the Azamgarh murder case; they will also receive these facilities.

आजमगढ़:AzamgarhMurderCase  पूरे प्रदेश को हिलाकर रखने वाले आजमगढ़ हत्याकांड में मृतक अरविंद की दोनों बेटियों की मदद के लिए पुलिस अधीक्षक ने आगे बढ़कर उन्हें गोद लिया है। एसपी अपनी एक महीने की वेतन और पुलिसकर्मियों की एक दिन की वेतन राशि दोनों बच्चियों के नाम सावधि जमा में कराएंगे। इस पहल से बच्चियों के भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। एसपी डॉ. अनिल कुमार ने गुरुवार देर शाम मीडिया से मुखातिब हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि मृतक अरविंद की अनाथ हो चुकी दोनों बच्चियों को गोद ले रहे हैं। अपनी एक महीने की सैलरी और अन्य कर्मियों की, जो सहमत होंगे, उनकी एक दिन की सैलरी बच्चियों के नाम से फिक्स्ड डिपॉजिट कराएंगे। जो उनके 18 वर्ष पूरे होने पर मिलेगी।

एसपी डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर में जो घटना हुई है, उससे हम काफी दुखी हैं। हमने इस संबंध में डीएम से भी वार्ता की है। सरकार की ओर से बच्चियों को जो भी सहायता मिलती है, वह उपलब्ध कराई जाएगी। बाल सेवा योजना की तरफ से उन्हें हर महीने 2500-2500 रुपये दिया जाएगा, जब तक कि वह बालिग नहीं हो जाती हैं। इसके अलावा सरकार की ओर से भी इन्हें 30 हजार रुपये की सहायता दिलाई जाएगी।

मृतक की जेब में मिलीं 18 गोलियां

एसपी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि कोई भी पुलिस कर्मी बच्चों को नहीं मार सकता। हमने पहले ही तय किया था कि उस 10 बाई 15 के कमरे में सिर्फ हम तीन लोग घुसेंगे। हमारी तरफ से निर्देश था कि कोई भी चौथा पुलिसकर्मी कमरे में नहीं घुसेगा, भले ही हम मर जाएं। आरोपी के पास रिवाल्वर के साथ ही एक टॉर्च भी था। उसे अंदेशा था कि पुलिस कार्रवाई करने के लिए घर की बिजली काट सकती है। जब हम कमरे में घुसे तो उसने हमारे ऊपर फायर झोंक दिया। हमारी पीठ के पीछे जो अलमारी रखी थी, उसमें कई गोलियां लगी हैं। मृतक की जेब में 18 गोलियां मिलीं हैं। एसपी ने कहा कि हमारी ओर से प्रयास था कि हम तीनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालें। बच्चों को उसने बंधक बना रखा था, इसलिए अयोध्या से एटीएस को भी बुलाया गया था। क्योंकि इन लोगों को ऐसे समय के लिए ही प्रशिक्षित किया जाता है। बच्ची काफी रो रही थी, लेकिन कुछ देर बाद ही बच्ची का रोना भी बंद हो गया। हमें डर था कि कहीं उसने बच्ची को मार न दिया हो। हम मौका मिलने का इंतजार कर रहे थे। हमारी ओर से तैयारी थी कि मौका मिलने पर एक-दो सेकेंड में दरवाजा तोड़कर बच्चों को बचाया जाए। लेकिन, जब फायर की आवाज आई तो हमें दरवाजा तोड़कर अंदर घुसना पड़ा। क्योंकि हम नहीं चाहते थे कि वह दूसरी गोली चलाए।

सरकारी योजनाएं दिलाई जाएंगी

वहीं इस संबंध में आजमगढ़ डीएम रविंद्र कुमार ने बताया कि इस घटना से तीन परिवार पीड़ित हुए हैं। हमने इसकी सूचना शासन को भी भेज दी है। साथ ही स्थानीय अधिकारियों को इन्हें सहायता राशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही इन्हें जो भी अन्य योजनाएं जैसे विधवा पेंशन, पारिवारिक हित लाभ आदि हैं उनके तहत यह जिसके भी पात्र होंगे उसका लाभ दिलाया जाएगा

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