नई दिल्ली। Meta Algorithm In India: कभी फेक न्यूज वायरल हो जाती है। कभी डीपफेक लाखों लोगों तक पहुंच जाता है। कभी किसी का अकाउंट बिना वजह सस्पेंड हो जाता है। और इस बार तो मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फेसबुक वीडियो तक पहुंच गया। वीडियो कुछ देर के लिए प्लेटफॉर्म से गायब हुआ, Meta ने कहा- ‘तकनीकी गलती थी’, माफी मांगी और वीडियो वापस भी आ गया।लेकिन सरकार ने कहा- ‘बात सिर्फ एक वीडियो की नहीं है, दिक्कत तो पूरे सिस्टम में है।’यहीं से शुरू हुई Meta की मुश्किल।शुक्रवार को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के दफ्तर में Meta की ग्लोबल टेक्निकल टीम पहुंची। एजेंडा साफ था- एल्गोरिदम आखिर काम कैसे करता है, गलतियां क्यों करता है और इन्हें रोका कैसे जाएगा?Meta ने पहली बार माना- हां, सिस्टम में कमियां हैं
बैठक में कंपनी ने स्वीकार किया कि उसके मौजूदा एल्गोरिदम और ऑटोमेटेड मॉडरेशन सिस्टम में कुछ तकनीकी खामियां हैं। यानी कई बार मशीन ऐसे फैसले ले लेती है, जो नहीं लेने चाहिए।
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सरकार ने भी यहीं सवाल दाग दिया- ‘अगर सिस्टम ही गलत फैसले ले रहा है, तो भरोसा किस पर किया जाए?’
यही वजह है कि अब Meta से सिर्फ माफी नहीं, बल्कि पूरा कॉम्पलाइंस रोडमैप मांगा गया है। यानी कब, कैसे और कितने समय में सिस्टम सुधरेगा, इसका लिखित प्लान।
सरकार ने कहा- पहले बीमारी बताओ, फिर इलाज भी
सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने Meta से पूछा है कि:
– एल्गोरिदम में असली दिक्कत क्या है?
– फेक न्यूज और प्रोपेगेंडा क्यों नहीं रुक पा रहा?
– गलत मॉडरेशन बार-बार क्यों हो रहा है?
– और सबसे जरूरी… इसे ठीक कब तक किया जाएगा?
यानी अब जवाब सिर्फ ‘हम देख रहे हैं’ से काम नहीं चलेगा।
फेक न्यूज और प्रोपेगेंडा पर भी कसता शिकंजा
सरकार की चिंता सिर्फ प्रधानमंत्री के वीडियो तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर फैल रहे भ्रामक दावे, नफरत फैलाने वाला कंटेंट और संगठित प्रोपेगेंडा भी सरकार की निगरानी में है।
सरकार चाहती है कि Meta का एल्गोरिदम ऐसे कंटेंट को तेजी से पहचाने और समय रहते उस पर कार्रवाई करे।
डीपफेक पर सरकार का सीधा संदेश- वायरल होने से पहले रोकिए
AI के दौर में सबसे बड़ी चुनौती डीपफेक बन चुका है। किसी का चेहरा, किसी की आवाज… और तैयार हो जाता है फर्जी वीडियो।सरकार ने Meta से कहा है कि वह अलग-अलग सरकारी विभागों की Quick Response Teams (QRTs) के साथ सीधा तालमेल बनाए, ताकि जैसे ही कोई डीपफेक सामने आए, उसे घंटों नहीं बल्कि मिनटों में रोका जा सके।
डेटा भारत का, तो नियम भी भारत के…
बैठक में डेटा लोकलाइजेशन का मुद्दा भी उठा। सरकार ने दो टूक कहा कि भारत में काम करना है तो भारतीय कानूनों का पूरी तरह पालन करना होगा। सरकारी एजेंसियां जिस कंटेंट को फ्लैग करें, उसे हटाने के लिए तेज और प्रभावी सिस्टम तैयार करना होगा।
VIP अकाउंट्स के लिए नया सुरक्षा कवच
Meta ने सरकार को बताया कि हाई-प्रोफाइल और वेरिफाइड अकाउंट्स के लिए नए सुरक्षा उपाय तैयार किए जा रहे हैं, ताकि ऑटोमेटेड मॉडरेशन की वजह से भविष्य में ऐसी गलतियां दोबारा न हों।
‘सेफ हार्बर’ भी खतरे में पड़ सकता है
बैठक के दौरान सरकार ने साफ संकेत दिया कि अगर बार-बार नियमों का उल्लंघन हुआ या एल्गोरिदम की कमियां दूर नहीं हुईं, तो आईटी कानून के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।मतलब साफ है- प्लेटफॉर्म अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे, तो कानूनी जवाबदेही भी तय होगी।
अभी खत्म नहीं हुई कहानी
सूत्रों का कहना है कि Meta की ग्लोबल टीम फिलहाल भारत में ही रुकेगी। आईटी सचिव की अगुवाई में आगे भी कई दौर की बैठकें होंगी।यानी बातचीत अभी जारी रहेगी… क्योंकि सरकार का कहना है कि ‘जब तक सिस्टम नहीं सुधरेगा, तब तक चर्चा भी चलती रहेगी.’
आखिर बात क्या है?
Meta का एल्गोरिदम सिर्फ यह तय नहीं करता कि आपकी स्क्रीन पर कौन-सी पोस्ट दिखेगी। वही यह भी तय करता है कि कौन-सा वीडियो हटेगा, कौन-सी खबर वायरल होगी और किस कंटेंट की पहुंच लाखों लोगों तक बनेगी।इसलिए इस बार सवाल सिर्फ Meta का नहीं है। सवाल उस डिजिटल दुनिया का है, जहां एक एल्गोरिदम करोड़ों लोगों की जानकारी, राय और सोच को प्रभावित करता है। अब देखना होगा कि Meta का अगला अपडेट सिर्फ ऐप में आता है… या उसके Meta Algorithm में भी।
