लखनऊ : बैसाख की पूर्णिमा पर बड़ी भुइयन माता मंदिर में यूं उमड़ा आस्था का सैलाब, नागा साधु ने बताया अद्भुत रहस्य

शुक्रवार 1 मई, 2026 को बैसाख की पूर्णिमा के पावन अवसर पर मंदिर में विधि-विधान से हवन-पूजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला। यह भव्य धार्मिक अनुष्ठान माता सेवक, तपस्वी नागा साधु आनंद गिरि महाराज के सानिध्य एवं विद्वान पुरोहितों के नेतृत्व में संपन्न कराया जा रहा है।

लखनऊ । राजधानी के आईआईएम रोड स्थित सरौरा में लखनऊ की पहली धर्मध्वजा तले ख्याति प्राप्त प्राचीन बड़ी भुइयन माता मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मंदिर परिसर में स्थापित 108 फीट ऊंची धर्मध्वजा दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। 7 फरवरी, 2026 से यहां चल रहे अखंड श्री सीताराम नाम जाप में आए दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता हैं।

विधि-विधान से हवन-पूजन संपन्न

यहां हर पूर्णिमा पर भव्य हवन पूजन के साथ बालभोग का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में शुक्रवार 1 मई, 2026 को बैसाख की पूर्णिमा के पावन अवसर पर मंदिर में विधि-विधान से हवन-पूजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला। यह भव्य धार्मिक अनुष्ठान माता सेवक, तपस्वी नागा साधु आनंद गिरि महाराज के सानिध्य एवं विद्वान पुरोहितों के नेतृत्व में संपन्न कराया जा रहा है।

बालभोग अर्पित कर वृद्ध महिलाओं को बांटी साड़ी

मंदिर परिसर में आज विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ, हवन-पूजन और भव्य आरती का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के उपरांत बड़ी संख्या में बालक-बालिकाओं को बालभोग अर्पित कर श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में वृद्ध महिलाओं को वस्त्र वितरित किए गए। वहीं माता बड़ी भुइयन मंदिर एवं माता बड़ी भुइयन मंदिर आनंद गिरि सेवा ट्रस्ट के प्रमुख नागा साधु आनंद गिरि महाराज ने जानकारी देते हुए बताया कि लखनऊ की पहली धर्मध्वजा तले ख्याति प्राप्त प्राचीन बड़ी भुइयन माता मंदिर में श्रद्धालुओं की आपार श्रद्धा है।

सदियों पुरानी आस्था का केन्द्र है बड़ी भुइयन माता मंदिर

यह मंदिर सदियों पुरानी आस्था का केन्द्र है। मंदिर का इतिहास बेहद गौरवशाली है। यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि स्थानीय इतिहास का भी अभिन्न अंग है। यहां हर साल सभी पर्व एवं त्योहार भक्तिपूर्ण वातावरण में श्रद्धापूर्वक मनाए जाते हैं। माता सेवक तपस्वी नागा साधु आनन्द गिरि ने बताया कि वर्ष भर यहां विभिन्न भव्य धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन किया जाता है। जिसमें सुमेरू रूद्र महायज्ञ, शतचण्डी महायज्ञ, हनुमत महायज्ञ आदि प्रमुख हैं।

आकाशीय जल से रोग-दोष, बाधा आदि की मुक्ति

नागा साधु ने बताया कि लोगों में सद्बुद्धि, सद् व्यवहार एवं धर्म का विकास ही इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य है। वहीं उन्होंने एक अद्भत बात बताते हुए कहा कि पूर्णमासी की रात माता के दरबार में आकाशीय जल की वर्षा हुई है। इसे इस विश्वास के साथ श्रद्धालुओं में वितरित किया जा रहा है कि उनके की रोग-दोष की मुक्ति हो, उनके घर आदि की बाधाएं दूर हो सके। इसके लिए नागा साधु ने आकाशीय जल के जरिए कुछ उपाए भी बताए ।

 

21 दिवसीय हनुमत महायज्ञ एवं सूर्य साधना 15 मई से

नागा साधु आनंद गिरि महाराज ने जानकारी देते हुए बताया कि 16 मई, 2026 से मंदिर परिसर में 21 दिवसीय हनुमत महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान तपती धूप में नागा साधु आनंद गिरि महाराज द्वारा सूर्य देव की तपस्या की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान से पूर्व 15 मई को भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी, जो बड़ी भुइयन माता मंदिर से प्रारंभ होकर मां चंद्रिका देवी मंदिर तक जाएगी। इसमें भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। वहां से कलश में जल लेकर कलश यात्रा पुन: मंदिर परिसर में पहुंच कर संपन्न् होगी। जिसके बाद यहां अग्नि स्थापना के साथ यह भव्य धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ हो जाएगा ।

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