The Kidney Trade in Kanpur: दस लाख में खरीदकर 90 लाख में बेची, 50 हजार के फेर में फंसा रैकेट

Bought for 10 Lakhs and Sold for 90 Lakhs: Racket Busted Over a 50,000-Rupee Dispute

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम संयुक्त रूप से देर रात तक जांच में जुटी रही।

कानपुर।The Kidney Trade in Kanpur कानपुर के अस्पतालों में एक बार फिर मानव अंगो के अवैध व्यापार का भंडाफोड़ हुआ। यह खुलासा दलाल की लालच से हुआ,अब तक डॉक्टर दंपती समेत कई लोग पुलिस के हत्थे चढ़ चुके है। इसके साथ ही 50 से ज्यादा अस्पताल रडार पर आ गए है। दरअसल उत्तराखंड निवासी एक युवक की दलाल शिवम के मध्यम से दस लाख में किडनी की खरीदकर 90 लाख में पीड़ित को बेची गई, लेकिन दलाल ने डोनर को 50 हजार कम दिए, परेशान होकर उसने पुलिस से​ शिकायत कर दी, जांच में परत दर परत मामला खुलता गया। इस कांड में जिन तीन प्राइवेट अस्पतालों का नाम सामने आ रहा है, उनमें से एक के पास रजिस्ट्रेशन भी नहीं है। पूरा अस्पताल ही अवैध तरीके से संचालित हो रहा है। इसकी जानकारी खुद स्वास्थ्य विभाग को उस समय हुई जब टीम पुलिस के साथ निरीक्षण करने पहुंची। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मामले में 50 से ज्यादा अस्पताल रडार पर हैं जिनकी जांच की जा रही है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम संयुक्त रूप से देर रात तक जांच में जुटी रही।

डॉक्टरों से पूछताछ जारी

सोमवार को पुलिस की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग से एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी और कल्याणपुर सीएचसी प्रभारी डॉ. राजेश सिंह व टीम के अन्य अधिकारियों ने तीनों अस्पतालों का निरीक्षण किया। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले कई वरिष्ठ डॉक्टरों से भी पूछताछ की जा सकती है, कुछ चिकित्सक कई बड़ी संस्थाओं से भी जुड़े हैं। एसीएमओ ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ऐसे डॉक्टरों की भी तलाश कर रही हैं जो सर्जन या नेफ्रोलॉजिस्ट हैं। दरअसल जिन अस्पतालों के नाम सामने आ रहे हैं, उनके यहां छोटे ऑपरेशन की भी सुविधा नहीं है। इन अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए बाहर से डॉक्टर बुलाए जाते हैं। चिकित्साधिकारियों के अनुसार ऐसे डॉक्टरों से भी पूछताछ की जाएगी। बता दें कि इससे पहले 22 साल पहले भी ऐसा ही मामला सामने आया था।

बाहर से आते थे डॉक्टर

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लखनऊ, मुंबई और दिल्ली से स्पेशलिस्ट बुलाए जाते थे। ट्रांसप्लांट की टीम में नेफ्रोलॉजिस्ट, ट्रांसप्लांट सर्जन, यूरोलॉजी और ग्राफ्टिंग एक्सपर्ट होते थे। साथ ही एनेस्थेसिस्ट, डायटीशियन भी टीम का हिस्सा होते थे। इस मामले में पुलिस ने पांडुनगर निवासी डॉ. इंदरजीत सिंह, उनके भाई सुरजीत सिंह आहूजा, उसकी पत्नी डॉ. प्रीति आहूजा और एक अन्य युवक से जानकारी जुटाने के लिए सोमवार शाम पूछताछ की है। आहूजा हॉस्पिटल डाॅ. इंदरजीत और उनके परिवार का बताया जा रहा है।

बंद हॉस्पिटल में भर्ती था डोनर

पुलिस को आवास विकास स्थित आरोही हॉस्पिटल में किडनी डोनर भर्ती मिला है। यह हॉस्पिटल दो माह पहले बंद हो चुका है। सूत्रों के अनुसार पुलिस जांच में सामने आया है कि इस मरीज को हॉस्पिटल के संचालक राजेश के कहने पर भर्ती कराया गया था। पुलिस को मौके से मरीज के नाम का हॉस्पिटल वाला पर्चा मिला है। किडनी रैकेट का भंडाफोड़ होने के बाद पुलिस ने किडनी डोनेट करने वाले और ट्रांसप्लांट कराने वाले की सेहत को देखते हुए उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया है। देर शाम को एंबुलेंस से पुलिस सुरक्षा में दोनों को अस्पताल भेजा गया था।

दस लोग हिरासत में

कल्याणपुर के एक अस्पताल में उत्तराखंड के युवक से करीब दस लाख रुपये में किडनी खरीदने का सौदा हुआ। किडनी निकलवाने के बाद दलाल ने उसे जरूरतमंद मरीज को 90 लाख रुपये से अधिक में बेच दिया। अवैध तरीके से की गई किडनी की इस खरीद-फरोख्त का सुराग लगने पर सोमवार को पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने अस्पतालों में छापा मारा। पुलिस ने दलाल, अस्पताल संचालक, डॉक्टर दंपती समेत दस लोगों को हिरासत में लिया है। एक अस्पताल का संबंध आईएमए के एक बड़े पदाधिकारी से बताया जा रहा है।

तीन अस्पतालों पर छापा

किडनी रैकेट की जांच कर रही पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सोमवार रात तीन अस्पतालों में छापा मारा। इनमें कल्याणपुर आवास विकास एक नंबर स्थित प्रिया हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर, केशवपुरम रोड स्थित आहूजा हॉस्पिटल, पनकी कल्याणपुर रोड स्थित मेडलाइफ हॉस्पिटल शामिल हैं। टीम ने किडनी संबंधी रोगों के भर्ती मरीजों के बारे में जानकारी जुटाई। छापे की इस कार्रवाई को किडनी रैकेट से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार इसमें से कुछ अस्पताल किडनी के अवैध ट्रांसप्लांट मामले में शामिल हो सकते हैं। कोई भी पुलिस अधिकारी खुलकर आरोपियों की गिरफ्तारी या भूमिका के बारे में बोलने से बच रहे हैं।

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