मेडटेक की नई छलांग: मेरिल ने घुटना प्रत्यारोपण के लिए क्रांतिकारी रोबोटिक सिस्टम मिसो को पेश किया

• भारत में 40 साल से ज्यादा उम्र के 10 में तीन लोग घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या से पीड़ित हैं
• हर साल करीब 32 लाख मरीजों को घुटना प्रत्यारोपण की सर्जरी कराने की आवश्यकता होती है, जिनमें से मात्र 5.5 लाख लोग ही सर्जरी करा पाते हैं

हेल्थ डेस्क,नई दिल्ली। भारत में स्थापित और वैश्विक स्तर पर मेडिकल डिवाइस के क्षेत्र में काम करने वाली अग्रणी कंपनी मेरिल ने आज अपनी एडवांस्ड सर्जिकल रोबोटिक टेक्नोलॉजी मिसो (MISSO) को लॉन्च करने की घोषणा की है। मिसो एक उच्च-गुणवत्ता का रोबोटिक सिस्टम है, जिसे पूरी तरह से भारत में ही विकसित किया गया है। इसकी मदद से सर्जन को घुटना प्रत्यारोपण के दौरान बिलकुल सटीक तरीके से रियल-टाइम असिस्टेंस मिलता है।

अभी भारतीय अस्पताल घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी के लिए आयात की हुई रोबोटिक टेक्नोलॉजी पर निर्भर हैं। इसमें काफी खर्च होता है। मिसो की मदद से इस खर्च को करीब 66 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। इससे रोबोटिक सर्जरी किफायती होगी और ज्यादा लोगों की पहुंच में आ सकेगी। मिसो की तकनीक को आगे चलकर अन्य जोड़ों की सर्जरी (जॉइंट सर्जरी) में भी प्रयोग किया जा सकेगा।

पॉली एथिलीन से बना कृत्रिम जोड़

टोटल नी रिप्लेसमेंट (टीकेआर) एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें चोटिल या खराब हो चुके घुटने को पूरी तरह से हटाकर उसकी जगह धातु एवं अल्ट्रा-हाई मॉलीक्युलर वेट वाले पॉली एथिलीन से बना कृत्रिम जोड़ (जॉइंट) लगा दिया जाता है। गंभीर किस्म के ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित मरीजों को घुटना प्रत्यारोपण की सर्जरी कराने की जरूरत पड़ती है। भारत में इससे पीड़ित लोगों की बड़ी संख्या है।

करीब 22 से 39 प्रतिशत लोग इसके शिकार हैं। वर्तमान समय में भारत में हर साल करीब 5.5 लाख मरीज घुटनों का प्रत्यारोपण कराते हैं। यह पांच साल पहले की तुलना में 2.5 गुना है। वैसे तो घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी कराने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन अभी भी सालाना यहां होने वाली सर्जरी की तुलना में 7 से 8 गुना ज्यादा सर्जरी करने की आवश्यकता है। अनुमान के मुताबिक, मात्र 20 प्रतिशत सर्जन ही घुटना रिप्लेसमेंट की 80 प्रतिशत सर्जरी को अंजाम देते हैं।

प्रत्यारोपण सर्जरी की व्यवस्था

मेरिल के हेड ऑफ मार्केटिंग, इंडिया एंड ग्लोबल मनीष देशमुख ने कहा, ‘मेरिल को मिसो की लॉन्चिंग करते हुए खुशी हो रही है। इसमें भारत में रोबोटिक तरीके से घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी की व्यवस्था को लोकतांत्रिक बनाने की क्षमता है। पिछले 20-25 साल में ऑस्टियोआर्थराइटिस के प्रति संवेदनशील लोगों की संख्या करीब 2.3 करोड़ से बढ़कर 6.2 करोड़ पर पहुंच गई है। दिल से जुड़ी बीमारियों के बाद ये भारत में दूसरी सबसे बड़ी डिजीज मॉडेलिटी हो गई है। घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी की वास्तविक आवश्यकता और घुटना प्रत्यारोपण के लिए होने वाली कुल सर्जरी के बीच के अंतर को पाटने में रोबोटिक सर्जरी से मदद मिल सकती है। वर्तमान समय में भारत में रोबोटिक सर्जरी की लागत बहुत बड़ी चुनौती है।

भारत में रोबोटिक सर्जरी

यहां के अस्पताल दूसरे देशों से रोबोटिक सिस्टम खरीदने के लिए निवेश करने में भी झिझकते हैं, क्योंकि इसके लिए सर्जन और ओटी स्टाफ का प्रशिक्षण भी जरूरी हो जाता है और इस पूरी प्रक्रिया में बड़ा समय लगता है। मिसो के माध्यम से हमारा लक्ष्य स्वदेशी प्लेटफॉर्म प्रदान करते हुए इस चुनौती का प्रभावी समाधान पेश करना है। इस टेक्नोलॉजी के साथ पूरा प्रशिक्षण एवं सपोर्ट भी प्रदान किया जाएगा। इससे रोबोटिक सर्जरी को केवल मेट्रो शहरों ही नहीं बल्कि टियर 2 एवं टियर 3 शहरों में भी उपलब्ध कराना संभव होगा।’उन्होंने आगे कहा, ‘इस लॉन्चिंग से जॉइंट रिप्लसमेंट सर्जरी और रोबोटिक्स के मामले में भारत में हमारी अग्रणी स्थिति को मजबूती मिलेगी। हम इस एडवांस्ड रोबोटिक सिस्टम के निर्यात की संभावना पर भी काम कर रहे हैं, जिससे भारत दुनियाभर में रोबोटिक सर्जरी की उपलब्धता बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाने में सक्षम हो।’

राष्ट्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था

मिसो को सीडीएससीओ से मंजूरी मिल चुकी है और सीई एवं यूएसएफडीए से भी आने वाले दिनों में मंजूरी मिल जाने का अनुमान है। रोबोटिक सिस्टम का प्रयोग करते हुए घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी में सफलता की दर करीब 98 प्रतिशत है। रोबोटिक सिस्टम से अपेक्षाकृत कम अनुभव वाले सर्जन भी अनुभवी सर्जन की तरह ही सटीक तरीके से सर्जरी कर पाने में सक्षम होते हैं। इससे सर्जरी को समान रूप से ज्यादा से ज्यादा सर्जन तक विस्तार देने और पूरी राष्ट्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था में सकारात्मक परिणाम के साथ इलाज के मामले में बेहतर मानक स्थापित करने में मदद मिल सकती है। सर्वोदय हॉस्पिटल, फरीदाबाद के रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट डायरेक्टर एवं एचओडी डॉ. सुजॉय भट्टाचार्य ने कहा, ‘अपनी प्रैक्टिस के दौरान मैंने स्वयं यह अनुभव किया है कि रोबोटिक सर्जरी में हुए इनोवेशन ने कैसे मरीजों का जीवन बदला है।

ऑर्थोपेडिक रोबोट उपलब्ध

रोबोटिक सिस्टम से सर्जरी के पहले सटीक डाटा पाना संभव होता है। इससे व्यक्तिगत स्तर पर प्रत्येक मरीज की जरूरत को समझना और उसके हिसाब से इलाज की प्रक्रिया को तय करना संभव होता है। इससे सर्जरी के बाद मरीजों की संतुष्टि का स्तर बहुत बढ़ा है। मिसो भारत में रोबोटिक सर्जरी की दुनिया को नया स्वरूप देने के लिए तैयार है। भारत में विकसित किया गया यह रोबोटिक सिस्टम एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, जो किफायती होने के साथ-साथ उन्नत क्षमताओं से भी लैस है। मुझे विश्वास है कि अगले पांच साल में भारत के हर जिले में ऑर्थोपेडिक रोबोट सहजता से उपलब्ध होंगे। रोबोटिक सिस्टम के इस व्यापक प्रसार से सुनिश्चित होगा कि ज्यादा से ज्यादा मरीजों को रोबोटिक सिस्टम की मदद से होने वाली सर्जरी के बेहतरीन परिणामों का लाभ मिले और देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर ऊंचा हो।

ज्यादा सटीक परिणाम

’घुटना प्रत्यारोपण के लिए रोबोटिक सिस्टम के रूप में ओआर में मिसो का फुटप्रिंट सबसे कम है, जो इसे छोटे अस्पतालों में प्रयोग के लिए भी आदर्श बनाता है। इस सिस्टम में एआई के प्रयोग से प्री-ऑपरेटिव प्लानिंग टाइम (ऑपरेशन से पहले की योजना में लगने वाला समय) को करीब 83 प्रतिशत तक कम करने में मदद मिलती है और व्यक्तिगत स्तर पर मरीज के हिसाब से इलाज की प्रक्रिया में सुधार करना संभव होता है। ज्यादा सटीक परिणाम और सर्जरी के दौरान ज्यादा सुरक्षा इसकी अन्य खूबियों में शुमार हैं। मरीज के हिसाब से इलाज तय कर पाने की खूबी के कारण सर्जरी के बाद बेहतर परिणाम सुनिश्चित होता है और जटिलताएं कम होती हैं। मरीजों के जोड़ों की गतिविधि (जॉइंट फंक्शन) बेहतर होती है और वे जल्द ही रोजाना के कामकाज को करने में सक्षम हो पाते हैं। इससे घुटना प्रत्यारोपण की प्रक्रिया एक कम जटिल सर्जरी के रूप में सामने आएगी।

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