ग़ज़ल : छोड़ सारी दुनिया के रिश्ते हम चले आए…

एक बूँद सागर की लेके हम चले आए ।
प्यार के समन्दर से हो के हम चले आए। ।

आपसे मिलने की सिर्फ एक चाहत में,
छोड़ सारी दुनिया के रिश्ते हम चले आए।

मौत का कुँआ ही है आपकी मुहब्बत भी,
अपनी जां हथेली पे लेे के हम चले आए ।

जब से आप रूठे हैं, जिन्दगी भी रूठी है,
चूर-चूर खुद दिल को करके हम चले आए।

हम भी आप जैसे ही बुद्धिमान थे लेकिन
अपने आपको आपसे ठगा के हम चले आए ।

जब से मुँह फेरा है आपने फकत हमसे
घूँट तब से आँसू के पीते हम चले आए ।

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राम नरेश ‘उज्ज्वल’

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