Tuesday, October 4, 2022
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जौनपुर में स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित किया छात्र संकल्प समारोह

बदलापुर जौनपुर। सार्वजनिक शिक्षा को बचाने तथा शिक्षा के निजीकरण व्यापारीकरण व साम्प्रदायीकरण को बढ़ावा देने वाली राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 को रद्द करने की मांग पर छात्र संगठन- ए.आई.डी.एस.ओ के द्वारा 9 से 15 अगस्त तक अखिल भारतीय छात्र संकल्प सप्ताह मनाने के तहत इस अवसर पर छात्र संगठन – AIDSO की जौनपुर जिला ईकाई के द्वारा संगठन के जिला कार्यालय बदलापुर में आज 15 अगस्त 2021 को छात्र संकल्प समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत शहीद क्रांतिकारियों की प्रतीकात्मक शहीद वेदी पर श्रद्धापूर्वक पुष्पांजलि करके किया गया। इसके बाद कई छात्र छात्राओं ने देशभक्ति व क्रांतिकारी गीत प्रस्तुत किये।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए संगठन के राज्य सचिव दिलीप कुमार ने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि ब्रिटिश साम्राज्यवाद की गुलामी की बेड़ियों से भारत को मुक्त कराने के संघर्ष में छात्र युवाओं ने ही बढ़ चढ़कर ऐतिहासिक भूमिका निभाई। जिसके लिए हज़ारों हजार छात्रों और युवाओं ने अपनी पढ़ाई-लिखाई, घर-परिवार, नौकरी व तमाम सुविधाओं को छोड़ कर आजादी आंदोलन में हिस्सा लेते हुए हंसते – हंसते हर तरह की कुर्बानियां दी, लाठियां खाई, जेल गये, फांसी के फंदे चूमे व शहादतें प्राप्त की।

उन सभी क्रांतिकारियों का एक ही सपना था कि देश अंग्रेजों के चंगुल से आजाद हो जाएगा तो भारत को एक ऐसा समाजवादी वतन बनायेंगे जिसमें हर प्रकार के शोषण, अन्याय व अत्याचार का खात्मा हो जाएगा और मानव के द्वारा मानव के शोषण का अंत हो जाएगा। लेकिन देश की आजादी के 75 वर्षों में भी शहीदों के उन सपनों को पूरा होते दिखाई नहीं दे रहा है, वह आज भी अधूरा है। आज देश एक बार फिर अनगिनत जन समस्याओं के बोझ से कराह रहा हैं, जिसकी जिम्मेदार सरकार की गलत नीतियां हैं। अन्य सेवा क्षेत्रों के निजीकरण के साथ साथ शिक्षा क्षेत्र को भी सरकार की गलत नीतियों के द्वारा बर्बाद किया जा रहा है।

घर वालों से बगावत कर जिसे चुना हमसफर उसी ने लगाया जीवन के सफर पर विराम

शिक्षा के निजीकरण, व्यापारीकरण व साम्प्रदायीकरण को बढ़ावा देने वाली राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 घोर छात्र विरोधी व शिक्षा विरोधी है। जिसके द्वारा शिक्षा को महंगा करने के साथ साथ पाठ्यक्रमों में मनमाने ढंग से परिवर्तन करने की भी छूट दिया जा रहा है। अफसोस की बात है कि स्वतंत्रता दिवस व अन्य राष्ट्रीय पर्वों पर सम्मानपूर्वक गाया जाने वाला राष्ट्र गान जिसके रचयिता कविगुरु रविंद्रनाथ टैगोर हैं, उनकी रचनाओं तक को स्कूल के पाठ्यक्रम से बाहर किया जा रहा है। हाल ही में यूपी बोर्ड के अंग्रेजी पाठ्यक्रम से कविगुरु रविंद्रनाथ टैगोर की ‘द कमिंग होम’ डॉ.एस राधाकृष्णन की ‘द विमेंस एजूकेशन’ सहित अन्य कई मानवतावादी साहित्यकारों की रचनाओं को बाहर कर दिया गया है।

जो बेहद निंदनीय है। इसलिए आज देश की तमाम जन समस्याओं को दूर करने लिए आजादी आंदोलन के गैर-समझौतावादी धारा के मनीषियों व क्रांतिकारियों को जीवन आदर्श मानते हुए संगठित होकर संघर्ष करने का संकल्प लेना ही वक्त की जरूरत है।कार्यक्रम में अतिथि के रूप में मौजूद श्री हीरालाल गुप्त (जिला संयोजक AIUTUC) व मिथिलेश कुमार मौर्य (पूर्व राज्य उपाध्यक्ष AIDSO उ.प्र) ने सम्बोधित किया। इसके अलावां कार्यक्रम में उपस्थित पूनम, अनीता, चंदा, विवेक, विनीता, उमा, रवि सहित अन्य छात्र छात्राओं ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सन्तोष प्रजापति (जिला संयोजक AIDSO) व संचालन अंजली (सह संयोजक AIDSO) ने किया।

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