धर्म डेस्क, यूपी। सुहागिनों के सौभाग्य का त्योहार करवाचौथ आज देश भर में हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। इसके लिए महिलाओं ने कई दिन पहले से तैयारी कर रखी है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। व्रत का पारण चांद निकलने के बाद ही किया जाता है। हम आपकों इस त्योहार के महत्व मनाने के तरीके और शुभ मुहूर्त के बारे में विस्तार से बताते है।
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि सुहागिनों के लिए सबसे अहम दिन होता है,यह उनके लिए प्रेम, समर्पण और सौभाग्य का प्रतीक है। इस दिन महिलाएं पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। मान्यता है कि जो भी महिला इस दिन व्रत रखती हैं और करवा माता की पूजा-अर्चना करती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्य, दांपत्य सुख और पारिवारिक समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इसके अलावा करवा चौथ में चंद्र देव की पूजा करने का विधान है। व्रत का पारण हमेशा चंद्र दर्शन के बाद किया जाता है और बिना इसके व्रत अधूरा होता है। ऐसे में आइए इस दिन के महत्व और पूजन को विस्तार से जानते हैं।
पूजा का शुभ मुहूर्त
- पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 9 अक्तूबर को देर रात 10 बजकर 54 मिनट से हो चुका है। इस तिथि का समापन 10 अक्तूबर को शाम 07:38 मिनट पर होगा।
- करवा चौथ पर शाम 5 बजकर 57 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 11 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। करवा चौथ पर कृत्तिका नक्षत्र बना हुआ है, जो शाम 5 बजकर 31 मिनट तक है।
- इसपर सिद्ध योग का संयोग है, जो शाम 5:41 मिनट तक है और इसके बाद ही व्यतीपात योग प्रारंभ होगा। चन्द्रमा वृषभ राशि में रहेंगे। राहुकाल सुबह 10 बजकर 40 मिनट से दोपहर 12:07 मिनट तक रहेगा।
- अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12:30 तक रहने वाला है।

Karwa Chauth की पूजा विधि
- महिलाएं एक साफ चौकी पर करवा माता की तस्वीर रखें।
- चौकी के पास कलश में साफ जल भरकर रखें।
- साफ थाली में सिंदूर, दीपक, गंगाजल, अक्षत और हल्दी रखें।
थाली में फूल और गुड़ भी अवश्य रखें। - दीपक और धूपबत्ती जलाएं।
- माता करवा को फूल माला पहनाएं और देवी को फूल अर्पित भी करें।
- इस दौरान कुछ पैसे, हल्दी, मिठाई, अक्षत और ताजे फल भी रखें।
- करवा चौथ के व्रत की कथा सुनें और दान के लिए जरूर सामग्रियों को निकाल के रखे दें।
- रात को चंद्रमा के निकलने के बाद फिर चंद्रदेव की पूजा करें और उन्हें जल से अर्घ्य दें।फिर छलनी से चंद्रमा देखें।
- इसी छलनी से फिर पति की ओर देखें और उनके हाथों से जल ग्रहण करें।
- अब पति के पैर छूकर आशीर्वाद लें और व्रत का पारण करें।
Karwa Chauth पूजा सामग्री
मिट्टी का एक कलश, चंदन और तांबे का लोटा रख लें।
फूल, फूल माला, दीपक ,धूप रोली, चावल, मिठाई, फल।
मेवे, करवा चौथ की कथा की पुस्तक।
छलनी शुद्ध जल, दूध और दान का सामान।

व्रत के पांच नियम
- करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले ही सरगी ग्रहण करना शुभ होता है, इसके बाद किसी भी चीज का सेवन न करें।
- करवा चौथ के व्रत की कथा का पाठ हमेशा 16 श्रृंगार और लाल जोड़े में करना चाहिए।
- चंद्रमा देखने के बाद ही व्रत का पारण करें अन्यथा व्रत अधूर माना जाता है।
- इस दिन निर्जला उपवास रखें।
- व्रत में तामसिक चीजों का सेवन करें और नुकीली चीजों का उपयोग न करें।
Karwa Chauth व्रत कथा
प्राचीन समय की बात है, एक साहूकार था जिसके सात बेटे और एक बेटी थी। करवा चौथ के दिन उसकी बहुओं और बेटी ने व्रत रखा। पूरे दिन उपवास रखने के बाद शाम को सब चांद निकलने का इंतजार करने लगे।बेटी बहुत भूखी और कमजोर हो गई थी, यह देखकर उसके भाइयों को उसकी हालत पर दया आ गई। वे नहीं चाहते थे कि उनकी बहन और ज्यादा कष्ट झेले, इसलिए उन्होंने एक चाल चली। वे नगर से बाहर गए और एक ऊंचे स्थान पर आग जलाकर एक छलावा किया ताकि वह आग का प्रकाश चांद जैसा लगे।भाइयों ने बहन से कहा कि चांद निकल आया है।
बहन ने बिना जांचे-परखे उनकी बात मान ली और अग्नि को चांद समझकर अपना व्रत तोड़ दिया। लेकिन जैसे ही उसने व्रत तोड़ा, उसी समय उसका पति बीमार पड़ गया और घर की सारी दौलत इलाज में खत्म हो गई।बाद में जब बहन को सच्चाई का पता चला, तो उसे अपने छल से टूटे व्रत पर बहुत पछतावा हुआ। उसने पूरी श्रद्धा से भगवान गणेश की पूजा की और अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी। उसकी सच्ची प्रार्थना और पूजा से उसका पति धीरे-धीरे ठीक हो गया और घर में फिर से सुख-शांति लौट आई।
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