किसान सभा ने रानी अटारी में खदान को 9 घंटे तक बंद किया, हड़ताल में पंडो जनजाति के किसान तीर-धनुष के साथ हुए शामिल

The Kisan Sabha shut down the mine at Rani Atari for nine hours; farmers from the Pando tribe joined the strike armed with bows and arrows.

रानी अटारी कोयला खदान में खनन प्रभावित गांवों के किसान ठेका मजदूर के रूप में काम करते हैं।

कोरबा। rani atari mein khadan: छत्तीसगढ़ किसान सभा द्वारा एसईसीएल के चिरमिरी क्षेत्र अंतर्गत कोरबा जिले में पड़ने वाले रानी अटारी एवं विजय वेस्ट भूमिगत खदान में आज सुबह 6 बजे से दोपहर 3 बजे 9 घंटे तक खदान बंदी रही। आउट सोर्सिंग कंपनी जेएमएस द्वारा 32 मजदूरों को बिना नोटिस दिए खनन कार्य से निकाले जाने के खिलाफ खनन प्रभावित गांवों के सैकड़ों मजदूरों और किसानों ने खदान बंद करते हुए कोल परिवहन रोक दिया, जिससे उत्पादन पूर्ण रूप से ठप्प हो गया। इस आंदोलन का आह्वान अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा ने किया था। एसईसीएल प्रबंधन द्वारा सभी 32 मजदूरों को काम में वापस रखने की लिखित घोषणा के बाद खदान बंदी वापस ली गई। प्रबंधन ने ठेका श्रमिकों की अन्य समस्याओं के समाधान का भी लिखित आश्वासन दिया है।
छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रशांत झा ने आरोप लगाया है कि पूरे एसईसीएल क्षेत्र में आउटसोर्सिंग कंपनियां किसानों और मजदूरों का बेरहमी से शोषण कर रही है और एसईसीएल प्रबंधन की इन कंपनियों के साथ पूरी मिलीभगत है। उन्होंने इन मजदूरों को निकाले जाने की अवधि की मजदूरी देने की भी मांग की है।   किसान सभा के कोरबा जिला सचिव दीपक साहू ने कहा है कि एक तरफ तो केंद्र सरकार नए लेबर कोड का कड़ाई से पालन कराने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी कंपनी एसईसीएल में इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि भविष्य में अगर ठेका श्रमिकों को परेशान किया गया, तो और उग्र प्रदर्शन होगा।
भू विस्थापित रोजगार एकता संघ के सचिव दामोदर श्याम ने हड़ताल का समर्थन करते हुए कहा कि रानी अटारी कोयला खदान में खनन प्रभावित गांवों के किसान ठेका मजदूर के रूप में काम करते हैं। इनमें से अधिकांश आदिवासी छोटे किसान परिवार से आते हैं, खदान में होने वाले सभी कार्यों में प्रभावित क्षेत्र के प्रभावितों को नियमित और स्थाई रोजगार देने की जिम्मेदारी एसईसीएल की है। एसईसीएल अपनी यह जिम्मेदारी तो पूरा कर ही नहीं रहा है बल्कि ठेका मजदूरों के रूप में काम कर रहे किसानों को रोजगार की सुरक्षा देने से भी इंकार कर रहा है, जबकि इन ठेका मजदूरों का सेवायोजक एसईसीएल ही है। इससे प्रभावित क्षेत्र के किसानों में काफी आक्रोश है।हड़ताल का समर्थन करते हुए पुटीपखना सरपंच चंद्र प्रताप पोर्ते, जनपद सदस्य संतोष मरावी और आनंद सिंह आयाम, अडसरा सरपंच धजवान सिंह आयाम भी खदान बंद आंदोलन में शामिल हुए। हड़ताल में किसान सभा के बृजलाल पंडो, रामेश्वर, उजागर, देवप्रताप, जगबंधन, बाबूलाल, अमर सिंह के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

प्रबंधन ने मांगें मानी

01. आउट सोर्सिंग कंपनी जेएमएस द्वारा  निकाले गए सभी 32 कर्मचारियों को तत्काल काम में बहाल किया गया।
02. जिन प्रभावितों का वीटीसी कराया गया है, उन्हें तत्काल खदान के काम नियोजित  कराया जायेगा।
03. सभी ठेका कर्मचारियों को 7 तारीख तक मजदूरी का भुगतान कर दिया जाएगा।
04. 32 मजदूरों को बैठाए गए दिनों के मजदूरी भुगतान के लिए उच्चाधिकारियों से चर्चा का आश्वासन दिया गया है।
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