अयोध्या।UP Politics सपा मुखिया अखिलेश यादव बड़बोलेपन में तो योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चेतावनी देकर फंसते नजर आ रहे है। योगी ने पलटवार करते हुए अखिलेश यादव को अयोध्या से मैदान में लड़ने की चुनौती दे डाली। अभी तक सुरक्षित सीट खोजकर चुनाव लड़ने वाले अखिलेश यादव क्या योगी के सामने मैदान में उतरेंगे। पूरे प्रदेश की जनता अब उनके जवाब का इंतजार कर रही है। बता दें कि अयोध्या को पुराना गौरव वापस दिलाने में योगी सरकार ने अहम भूमिका निभाई। वहीं सपा का इतिहास देखे तो उसने राभक्तों पर गोली चलनवाने के अलावा अयोध्या के लिए कुछ नहीं किया। वहीं पिछले तीन चुनावों पर नजर डाले तो वहां पर लगातार भाजपा जीत रही है।
सबसे बड़ी हो सकती है लड़ाई
रामनगरी अयोध्या में सीएम योगी आदित्यनाथ और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच यदि मुकाबला होता है तो यह अब तक की सबसे बड़ी लड़ाई हो सकती है। इस जुबानी जंग के बीच पिछले तीन विधानसभा चुनावों के नतीजों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अयोध्या सीट पर दोनों पार्टियों में कौन कितने पानी में है?
लगातार भाजपा का कब्जा
यदि अयोध्या सीट पर दोनों पार्टियोंं की ताकत की बात की जाए तो भाजपा ने 2017 और 2022 में करीब 49 फीसदी वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। हालांकि, भाजपा की जीत का अंतर घटने और सपा का मत प्रतिशत बढ़ने से चुनावी समीकरण अहम हो गए। वर्ष 2012 में सपा ने यह सीट जीती थी, जबकि 2017 में उसे हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2012 से 2017 के बीच भाजपा के मत प्रतिशत में 23.27 प्रतिशत वृद्धि हुई। 2022 में पार्टी का मत प्रतिशत 49 फीसदी रहा। सपा ने 2022 के चुनाव में मत प्रतिशत बढ़ाकर 40.40 फीसदी कर लिया। पिछले चुनाव के मुकाबले इसमें 14.39 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
2027 में अहम होंगे स्थानीय समीकरण
अयोध्या में राम मंदिर और विकास से जुड़े मुद्दों के बीच भाजपा ने मत आधार बनाए रखा। वहीं, सपा ने पिछले चुनाव में मत प्रतिशत बढ़ाया। 2027 में उम्मीदवारों के चयन, स्थानीय मुद्दों, सामाजिक समीकरणों और मतदान के रुझान की भूमिका अहम होगी। सपा अयोध्या से पवन पांडेय को प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। ऐसे में योगी और अखिलेश में अयोध्या को लेकर चुनौती के बीच पिछले चुनावों के आंकड़े राजनीतिक विमर्श का आधार बन सकते हैं।
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