अमेरिका में 13 लोगों को गोली मारने वाले हत्यारे को सब के सामने मिलेगी मौत की सजा, की जाएगी Livestreaming

The killer who shot 13 people in the US will face the death penalty in public; the event will be livestreamed.

हसन को 2009 में टेक्सास के फोर्ट हुड में मास शूटिंग करके 13 लोगों की हत्या करने का दोषी ठहराया गया था।

न्यूयॉर्क। 5 नवंबर 2009 में अपने 13 साथियों की गोली मारकर हत्या करने के दोषी को मौत की सजा सुनाई गई है। अमेरिका में पूर्व आर्मी मेजर निदाल मलिक हसन की सजा-ए-मौत की Livestreaming की जाएगी। हसन को 2009 में टेक्सास के फोर्ट हुड में मास शूटिंग करके 13 लोगों की हत्या करने का दोषी ठहराया गया था। सजा-ए-मौत 3 दिसंबर, 2026 को दी जानी है और बताया जा रहा है कि इसे उसी मिलिट्री बेस पर ‘फायरिंग स्क्वाड’ के जरिए अंजाम दिया जाएगा जहां हमला हुआ था।

लाइवस्ट्रीमिंग का प्लान

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इसकी जानकारी दी, जबकि पेंटागन के एक अधिकारी ने कंफर्म किया कि सजा-ए-मौत की लाइव-स्ट्रीमिंग की जाएगी। अगर ऐसा होता है तो अमेरिकी सेना की तरफ से दी जाने वाली सजा-ए-मौत को सार्वजनिक रूप से दिखाने का ये एक अनोखा कदम होगा । 8 अक्तूबर 2026 को ‘रियल अमेरिकाज वॉयस’ से बात करते हुए हेगसेथ ने कहा कि आम लोग इस सजा को देख सकेंगे। उन्होंने तर्क दिया कि सजा-ए-मौत को सबके लिए लाइवस्ट्रीम कराने से ऐसे अपराधों के अंजाम का पता चलेगा। हेगसेथ ने ये भी कहा कि फोर्ट हुड इसके लिए सही जगह है क्योंकि हसन ने वहीं जानलेवा हमला किया था। अमेरिकी सेना के मुताबिक सजा-ए-मौत 3 दिसंबर को दोपहर 1 बजे (सेंट्रल स्टैंडर्ड टाइम) दी जानी है। सेना ने बताया कि हेगसेथ की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अक्टूबर को हसन की मौत की सजा को मंजूरी दी थी।

2009 की मास शूटिंग में क्या हुआ था?

5 नवंबर 2009 को सेना के पूर्व साइकेट्रिस्ट निदाल हसन ने फोर्ट हुड में अपने साथी सैनिकों पर गोलीबारी की थी. इस हमले में 13 लोगों की मौत हो गई थी और 32 अन्य घायल हो गए थे। ये अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुई सबसे घातक गोलीबारी की घटनाओं में से एक थी, एक सैन्य जूरी ने 2013 में हसन को पहले से योजना बनाकर हत्या करने के 13 मामलों और हत्या की कोशिश के 32 मामलों में दोषी ठहराया था. उसे मौत की सजा सुनाई गई थी और तब से वो सैन्य ‘डेथ रो’ में है।

अपने ट्रायल के दौरान निदाल हसन ने गोलीबारी करने की बात मानी और कहा कि उसने लड़ाई में अपना पक्ष बदल लिया था, ताकि तालिबान लड़ाकों और दूसरे मुसलमानों को अमेरिकी सेना से बचाया जा सके। अगर तय समय पर ऐसा होता है, तो हसन को दी जाने वाली सजा-ए-मौत 1961 के बाद अमेरिकी सेना की पहली और 1945 के बाद आर्मी की फायरिंग स्क्वाड के जरिए दी जाने वाली पहली सजा-ए-मौत होगी।

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