एआई महत्वाकांक्षा से क्रियान्वयन तक: Microsoft ने भारत में अपने क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में एआई-रेडी कैपेबिलिटीज़ का विस्तार किया

From AI Ambition to Execution: Microsoft Expands AI-Ready Capabilities in Its Cloud Infrastructure in India

एन्क्रिप्शन कीज़ पर कंट्रोल रखने और माइक्रोसॉफ्ट के ऑपरेशनल एक्सेस को गवर्न करने में मदद कर सकती हैं।

  • इंडिया साउथ सेंट्रल रीजन को एशिया और ग्लोबल साउथ के लिए स्ट्रैटेजिक हब के रूप में स्थापित किया

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। Microsoft एआई इंफ्रास्ट्रक्चर समिट में कंपनी ने आज बताया कि वह भारत की फ्रंटियर एआई महत्वाकांक्षा को किस तरह बड़े पैमाने पर वास्तविक क्षमता में बदल रही है। माइक्रोसॉफ्ट ने घोषणा की कि हैदराबाद में उसका नया डेटासेंटर रीजन, इंडिया साउथ सेंट्रल, एशिया और ग्लोबल साउथ के लिए स्ट्रैटेजिक हब के रूप में डिज़िग्नेटेड किया गया है। यह क्षेत्र में कैपेसिटी एक्सपैंशन, रेज़िलिएंस और एआई इनोवेशन के प्रति कंपनी की लॉन्ग-टर्म कमिटमेंट को दर्शाता है। पुनीत चंडोक, प्रेसिडेंट, माइक्रोसॉफ्ट इंडिया एंड साउथ एशिया, ने अपने कीनोट एड्रेस में यह भी घोषणा की कि भारत में माइक्रोसॉफ्ट के डेटासेंटर रीजन्स अब एआई-इनेबल्ड हैं। इनमें एआई-कैपेबल हार्डवेयर, हाई-एफिशिएंसी कूलिंग सिस्टम्स और एडवांस्ड एआई वर्कलोड्स को होस्ट और रन करने के लिए आवश्यक प्लेटफॉर्म फाउंडेशन शामिल है, जिससे फ्रंटियर एआई कैपेबिलिटी भारतीय संगठनों के और करीब आती है।
हैदराबाद में अब लाइव इंडिया साउथ सेंट्रल डेटासेंटर रीजन में रेज़िलिएंट थ्री-ज़ोन आर्किटेक्चर है, जिसे लगातार विस्तार के लिए तैयार किया गया है। इस रीजन में एडिशनल एज़्योर और एआई सर्विसेज़ की योजना है। जैसे-जैसे सपोर्टेड सर्विसेज़ उपलब्ध होंगी, संगठन भारत में एलिजिबल सेंसिटिव वर्कलोड्स को ऐसे कंट्रोल्स के साथ डिप्लॉय कर सकेंगे, जिन्हें उनकी सिक्योरिटी, कंप्लायंस और सॉवरेन्टी रिक्वायरमेंट्स को सपोर्ट करने के लिए तैयार किया गया है।

माइक्रोसॉफ्ट का यह नवीनतम डेटासेंटर

भारत में माइक्रोसॉफ्ट का यह नवीनतम डेटासेंटर रीजन देश के लिए उसकी यूएस$20.5 बिलियन कमिटमेंट में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह इन्वेस्टमेंट भारत के क्लाउड और एआई फ्यूचर के लिए ऑपरेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर में बदल रहा है। अदाणी ग्रुप, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक और पीबी पे जैसे लीडिंग एंटरप्राइज़ेज़ और क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर ऑर्गनाइज़ेशन्स इस नए रीजन के लिए पहले ही साइन अप कर चुके हैं।बीसीजी स्टडी का अनुमान है कि भारत में डेटासेंटर बिल्डआउट एक व्यापक इकॉनमिक फ्लाईव्हील को गति दे सकता है और 2030 तक भारत के लिए यूएस$140-200बी का इकॉनमिक आउटपुट उत्पन्न कर सकता है। देश में सबसे बड़ी हाइपरस्केल क्लाउड प्रेज़ेन्स के साथ माइक्रोसॉफ्ट के इन्वेस्टमेंट्स भारत की बढ़ती आर्थिक वृद्धि में सार्थक योगदान देना जारी रख रहे हैं।

 

जितिन प्रसाद,  वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री ने कहा, “भारत की महत्वाकांक्षा एआई-फर्स्ट राष्ट्र बनने की है। माइक्रोसॉफ्ट के इंडिया साउथ सेंट्रल डेटासेंटर रीजन का लॉन्च इस महत्वाकांक्षा को साकार करने के लिए जरूरी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करता है।

जैसे-जैसे हम इंडिया एआई मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं, इस तरह के निवेश देश की एआई क्षमता का विस्तार करते हैं, इनोवेशन को गति देते हैं और डेवलपर्स, एंटरप्राइज़ेज़ तथा सार्वजनिक संस्थानों को भरोसे के साथ एआई बनाने और डिप्लॉय करने में सक्षम बनाते हैं। अपने टैलेंट, उद्यमशीलता की ऊर्जा और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ भारत बड़े पैमाने पर एआई को अपनाने में नेतृत्व करने और ऐसे इनोवेशन्स में योगदान देने के लिए मजबूत स्थिति में है, जिनसे भारत और दुनिया भर के लोगों को लाभ मिले।”

20.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश

पुनीत चंडोक, प्रेसिडेंट, माइक्रोसॉफ्ट इंडिया एंड साउथ एशिया:“भारत ने हमारी प्रतिबद्धता के बारे में सुना था। आज भारत इसे साकार होते देख सकता है—यह तैयार है, लाइव है और काम कर रहा है। इंडिया साउथ सेंट्रल देश में हमारा चौथा क्लाउड रीजन है, जिसे एडवांस्ड एआई वर्कलोड्स के लिए तैयार किया गया है और यह एशिया तथा ग्लोबल साउथ के लिए एक स्ट्रैटेजिक हब है। यहीं हमारा 20.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश ऑपरेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर का रूप लेता है और प्रमुख भारतीय एंटरप्राइज़ेज़ पहले से इस पर काम कर रहे हैं। लेकिन केवल कंप्यूट किसी देश को एआई-रेडी नहीं बनाता। इसके लिए क्षमता जरूरी है—यानी एआई को पायलट से प्रोडक्शन तक ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर ले जाने की क्षमता, जो सॉवरेन-रेडी, सुरक्षित और सस्टेनेबल हों और ऐसे रीजन में उपलब्ध हों जहां कूलिंग के लिए पानी का इस्तेमाल प्रभावी रूप से शून्य है। यही वजह है कि हम अब तक 10 मिलियन से अधिक भारतीयों को एआई स्किल्स से लैस कर चुके हैं और 2030 तक 20 मिलियन के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। भारत के पास टैलेंट और महत्वाकांक्षा है। अब उसके पास अगली पीढ़ी की फ्रंटियर फर्म्स तैयार करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर भी है और हम भारत के साथ मिलकर इसका निर्माण कर रहे हैं।”

लाइव इंफ्रास्ट्रक्चर से रीजनल कनेक्टिविटी तक

इंडिया साउथ सेंट्रल रीजन एज़्योर सर्विसेज़ के एक व्यापक पोर्टफोलियो के साथ लॉन्च हुआ है और इसे एज़्योर तथा एआई सर्विसेज़ के पूरे पोर्टफोलियो को सपोर्ट करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें माइक्रोसॉफ्ट फाउंड्री भी शामिल है, क्योंकि आने वाले महीनों में एडिशनल कैपेबिलिटीज़ उपलब्ध कराई जाएंगी। ‘स्ट्रैटेजिक हब’ बनने की महत्वाकांक्षा केवल डोमेस्टिक डिमांड को पूरा करने तक सीमित नहीं है। भारत में हाइपरस्केल इंफ्रास्ट्रक्चर, इंजीनियरिंग टैलेंट, तेजी से बढ़ती डिजिटल इकॉनमी और कॉम्प्लेक्स तथा डाइवर्स मार्केट्स के लिए टेक्नोलॉजी बनाने का अनुभव एक साथ मौजूद है। यह संयोजन साउथ एशिया में कस्टमर्स को सपोर्ट कर सकता है, एशिया में इनोवेशन को तेज कर सकता है और ग्लोबल साउथ के लिए रेलेवेंट सॉल्यूशन्स तैयार कर सकता है।

एआई-रेडी डेटासेंटर्स के अलावा माइक्रोसॉफ्ट उस क्रिटिकल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भी निवेश कर रहा है जो एआई को बड़े पैमाने पर संभव बनाता है। प्रस्तावित इंडिया-साउथईस्ट एशिया (आई-2एसईए) सबमरीन केबल सिस्टम में कंसोर्टियम पार्टनर के रूप में माइक्रोसॉफ्ट भारत, मलेशिया और सिंगापुर को जोड़ने वाले 3,600-किलोमीटर सबसी कॉरिडोर के डेवलपमेंट को सपोर्ट कर रहा है। भारत में मछलीपट्टनम और साउथ चेन्नई में ड्युअल लैंडिंग्स के साथ यह सिस्टम रीजनल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा, नेटवर्क रेज़िलिएंस को बेहतर बनाएगा और भारत तथा पूरे रीजन में बढ़ती एआई, क्लाउड और हाइपरस्केल डिमांड को सपोर्ट करने के लिए आवश्यक हाई-कैपेसिटी फाउंडेशन उपलब्ध कराएगा। केबल सिस्टम को 2029 में सर्विस के लिए तैयार करने का लक्ष्य है।

फ्रंटियर वर्कफोर्स का निर्माण 

इंफ्रास्ट्रक्चर में इन्वेस्टमेंट के साथ माइक्रोसॉफ्ट ने भारत के प्रति अपनी एआई कमिटमेंट में एक और माइलस्टोन की घोषणा की है। माइक्रोसॉफ्ट एलीवेट इंडिया ने 2030 तक 20 मिलियन लोगों को स्किल्स प्रदान करने की कमिटमेंट की दिशा में 10 मिलियन से अधिक भारतीयों को एआई स्किल्स से लैस किया है। लगभग 25 परसेंट लर्नर्स फाउंडेशनल एआई कोर्स से आगे बढ़ चुके हैं और एडिशनल लर्निंग पाथवेज़ के लिए क्रेडेंशियल्स हासिल कर चुके हैं। यह प्रगति माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित भारत की नेशनल स्किलिंग एम्बिशन को मजबूत गति देती है, जिसका उद्देश्य ऐसी नई पीढ़ी के फ्रंटियर प्रोफेशनल्स तैयार करना है जो एआई इकॉनमी में भाग लेने के साथ उसका नेतृत्व भी कर सकें।

माइक्रोसॉफ्ट अपने डेटा सेंटर अकैडमी के माध्यम से भारत के डिजिटल फ्यूचर में निवेश जारी रख रहा है। यह अकैडमी तेजी से बढ़ती डेटासेंटर इंडस्ट्री में करियर्स के लिए स्टूडेंट्स को तैयार करती है। यह 600-आवर इंडस्ट्री-अलाइन्ड स्किलिंग प्रोग्राम यंग इंडिया स्किल्स यूनिवर्सिटी (वाईआईएसयू), गवर्नमेंट ऑफ तेलंगाना के सहयोग से चलाया जाता है। प्रोग्राम स्टूडेंट्स को क्रिटिकल डेटासेंटर ऑपरेशन्स और इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट में हैंड्स-ऑन एक्सपर्टीज़ प्रदान करता है।

 

सेंसिटिव क्लाउड और एआई वर्कलोड्स के लिए ग्रेटर कंट्रोल

इंडिया साउथ सेंट्रल रीजन भारत में माइक्रोसॉफ्ट के सॉवरेन पब्लिक क्लाउड फाउंडेशन का विस्तार करता है, जिससे ऑर्गनाइज़ेशन्स को एलिजिबल क्लाउड और एआई वर्कलोड्स को अपने डेटा, यूज़र्स और ऑपरेशन्स के अधिक करीब डिप्लॉय करने के अधिक विकल्प मिलते हैं। यह रीजन लोकल कैपेसिटी, डेटा रेज़िडेंसी ऑप्शन्स, अवेलेबिलिटी ज़ोन्स और गवर्नेंस कैपेबिलिटीज़ प्रदान करता है, जिन्हें कस्टमर्स को लागू रेगुलेटरी, सिक्योरिटी, ऑपरेशनल और सॉवरेन्टी रिक्वायरमेंट्स को एड्रेस करने में मदद करने के लिए तैयार किया गया है।

माइक्रोसॉफ्ट के इंडिया क्लाउड रीजन्स ऐसी कैपेबिलिटीज़ प्रदान करते हैं जो माइटी(Meity) गाइडलाइंस के अनुरूप हैं और कस्टमर्स को भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) फ्रेमवर्क तथा आरबीआई और सर्ट-इन सहित अथॉरिटीज़ की सेक्टर-स्पेसिफिक एक्सपेक्टेशन्स के तहत लागू रिक्वायरमेंट्स को एड्रेस करने में मदद करने के लिए तैयार की गई हैं। यह निर्धारित करने की जिम्मेदारी कस्टमर्स की रहती है कि उनके ऑर्गनाइज़ेशन्स और वर्कलोड्स पर कौन-सी रिक्वायरमेंट्स लागू होती हैं।माइक्रोसॉफ्ट डिजिटल सॉवरेन्टी को वर्कलोड-बेस्ड रिस्क डिसीजन के रूप में देखता है। अलग-अलग वर्कलोड्स के लिए डेटा लोकेशन, कॉन्फिडेंशियलिटी, एन्क्रिप्शन कीज़, ऑपरेशनल एक्सेस, गवर्नेंस और कंटिन्यूइटी पर अलग-अलग स्तर के कंट्रोल की आवश्यकता होती है। जैसे-जैसे इंडिया साउथ सेंट्रल में सपोर्टेड सर्विसेज़ उपलब्ध होंगी, एज़्योर कॉन्फिडेंशियल कंप्यूटिंग, कस्टमर लॉकबॉक्स और एज़्योर की वॉल्ट जैसी कैपेबिलिटीज़ कस्टमर्स को डेटा इन यूज़ की प्रोटेक्शन मजबूत करने, एन्क्रिप्शन कीज़ पर कंट्रोल रखने और माइक्रोसॉफ्ट के ऑपरेशनल एक्सेस को गवर्न करने में मदद कर सकती हैं।

ऐसी रिक्वायरमेंट्स के लिए जिनमें कस्टमर-कंट्रोल्ड इंफ्रास्ट्रक्चर, डिसकनेक्टेड ऑपरेशन्स या स्पेशलाइज़्ड लोकल एक्सपर्टीज़ की जरूरत हो, माइक्रोसॉफ्ट अपने ब्रॉडर कंटिन्यूअम ऑफ कंट्रोल के हिस्से के रूप में सॉवरेन प्राइवेट क्लाउड और सॉवरेन पार्टनर इकोसिस्टम भी प्रदान करता है।

रिस्पॉन्सिबल इंफ्रास्ट्रक्चर के केंद्र में कम्युनिटीज़

इंडिया साउथ सेंट्रल रीजन ज़ीरो वाटर कूलिंग पर ऑपरेट करता है, जो 2030 तक कार्बन नेगेटिव, वाटर पॉज़िटिव और ज़ीरो वेस्ट बनने की माइक्रोसॉफ्ट की ग्लोबल कमिटमेंट्स के अनुरूप है।अपने डेटासेंटर कम्युनिटी प्लेज के माध्यम से माइक्रोसॉफ्ट एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन्स, नॉन-प्रॉफिट्स और गवर्नमेंट के साथ मिलकर उन प्रायोरिटीज़ को सपोर्ट करता है जो स्थानीय स्तर पर सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं। हैदराबाद रीजन में कंपनी लोकल पार्टनर्स के साथ ग्राउंडवॉटर रिचार्ज, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और वॉटरशेड रेज़िलिएंस पर काम करती है। एलिकट्टा ग्राउंडवॉटर-रिचार्ज प्रोग्राम ने जून 2026 तक लगभग 5 मिलियन लीटर्स की रिचार्ज कैपेसिटी जोड़ी है, जिससे एलिकट्टा को स्केलेबल वाटर-सिक्योर कम्युनिटी के रूप में स्थापित करने में मदद मिली है।लोगों, कम्युनिटीज़ और लोकल इकोसिस्टम्स में इन्वेस्टमेंट के माध्यम से माइक्रोसॉफ्ट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उसका डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर हैदराबाद रीजन में लॉन्ग-टर्म रेज़िलिएंस, इकॉनमिक ऑपर्च्युनिटी और सस्टेनेबल ग्रोथ में योगदान दे।

 

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