मैनपुरी। TalcumPowder अगर आप भी बाजार का ब्राडेड आटा खरीदते है तो सावधान हो जाए,क्योंकि यह मुनाफाखोर अपनी जेब भरने के लिए आपकी सेहत से खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे हे। आटे को अधिक सफेद और चिकना बनाने के लिए क्या—क्या मिला रहे है यह आप सोच भी नहीं सकते। गत दिवस कुछ शिकायत के बाद आटा मिलों की हुई जांच में कई खुलासे हुए मिल संचालक चूना, पत्थर और टेलकम पाउडर के साथ— साथ बहुत कुछ मिल रहे है। मिलावट में पकड़े गए मैनपुरी में मिल संचालक अजीत कुमार के पिता नरेंद्र 2001 से 2006 तक नगर पालिका ज्योती खुड़िया के चेयरमैन रहे हैं।
बता दें कि नरेंद्र कुमार का राजनीतिक रसूख होने की वजह से कोई भी रोक-टोक नहीं कर पाता था। पहले वह समाजवादी पार्टी में भी इनके अच्छे संबंध थे, इस वजह से उनका आज भी विभागों में अधिकारियों से मिलना जुलना है। इस वजह से कोई विभाग भी उनके ऊपर हाथ नहीं डालता था। वर्तमान में भी एक राजनीतिक पार्टी से उनके संबंध है। हालांकि खाद्य विभाग ने इस बार उनकी आटा मिल पर बड़ी कार्रवाई की है। यहां बनाए जाने वाला नकली आटा मैनपुरी के अलावा कौन-कौन से जनपद में भेजा जाता था इसकी भी खाद्य विभाग जानकारी कर रहा है।
तीन दिन में 15 आटा यूनिटों पर छापा
आटा में मिलावट की रोकथाम के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने सहायक खाद्य आयुक्त द्वितीय डॉक्टर श्वेता सैनी के निर्देशन में चार अगस्त से छह अगस्त तक छापामार कार्रवाई की। तीन दिन में हुई कार्रवाई के दौरान जिले की 15 आटा यूनिटों पर जांच की गई। इस दौरान चार यूनिटों से नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। जबकि 14 यूनिट संचालकों को नोटिस जारी कर व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए गए हैं।
ऐसे करें पहचान
खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह ने बताया कि एक कटोरी में आटा लें और उसमें नींबू की कुछ बूंदें डाल दें। बुलबुले उठने लगें तो मिलावट है। ऐसे ही गिलास में पानी भरें और आटा डालकर चम्मच से मिलाएं। आटा तली में बैठ जाए तो मिलावटी है। तीसरा तरीका यह है कि हथेली पर आटा रखकर रगड़ें। शुद्ध आटा खुरदरा लगेगा, असामान्य चिकनाहट हो तो मिलावट हो सकती है। सीएमओ आगरा डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि लंबे समय तक सेलखड़ी शरीर में पहुंचने से पेट के विकार तेजी से बढ़ते हैं। पेट में दर्द, अपच और आंतों में रुकावट का खतरा बढ़ जाता है। शरीर में कैल्शियम या सिलिकेट के बारीक कण जमा होकर गुर्दे में पथरी की वजह बन सकते हैं। दांतों की ऊपरी परत घिसने के साथ मसूढ़ों में जख्म भी बन सकते हैं। सीने में सेलखड़ी जमने से टीबी के संक्रमण का खतरा भी रहता है।
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