नोएडा। NoidaViolence 13 अप्रैल को नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के प्रदर्शन में तोड़फोड़ और हिंसा के मास्टरमाइंड सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य आनंद उर्फ रस्टी (28) को पुलिस और एसटीएफ ने तमिलनाडु से धर दबोचा। वह सेक्टर-37 अरुण विहार में किराये के फ्लैट में रहता था। शुरुआती जांच में यह खुलासा हुआ है कि इसके फ्लैट पर 30 मार्च से 1 अप्रैल तक कई बैठकें हुई थीं। इन बैठकों में मजदूर बिगुल, दिशा संगठन, आरडब्ल्यूपीआई, नौजवान भारत सभा व एकता संघर्ष समिति गौतमबुद्ध नगर के सदस्य कई बार जुटे थे। इन बैठकों में ही श्रमिकों को प्रदर्शन के लिए उकसाने और प्रदर्शन को उग्र बनाने की साजिश रची गई थी। आरोपी आदित्य आनंद बिहार के हाजीपुर की छोटी मढैया गांव का मूल निवासी है। गुरुग्राम के सरस्वती विहार सेक्टर-28 उसका अस्थायी पता है।
आरोपी जून 2025 में आरोपी गुरुग्राम से नोएडा आकर अरुण विहार के फ्लैट में रहने लगा था। शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक के जरिए मजदूर बिगुल के बारे में पढ़ा था। मजदूर बिगुल के संपादक अनुभव सिन्हा के संपर्क में वर्ष 2022 में आकर यह 2022 से नोएडा की कंपनियों में होने वाली छुटपुट घटनाओं की रिपोर्टिंग करने लगा। वहां रुपेश राय भी आता था। रुपेश से आदित्य की मुलाकात 2023 में भगत सिंह जन अधिकार यात्रा में हुई थी जिसे मजदूर बिगुल ने निकाला था। इसके बाद यह मजदूर बिगुल के सीनियर लीडर्स व कार्यकर्ताओं के संपर्क में आया। फिर इनके आंदोलनों में शामिल होने लगा था।
आदित्य आनंद उगलेगा राज
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन लोग शामिल थे और इसके पीछे फंडिंग कहां से आ रही थी। अधिकारियों का कहना है कि आदित्य आनंद से पूछताछ के बाद कई और अहम खुलासे हो सकते हैं, जिससे इस साजिश के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होगा। आदित्य कई संगठनों के संपर्क में था और उनके माध्यम से श्रमिकों के बीच अपनी पकड़ बना रहा था। सेक्टर-4 में स्मार्ट मीटर बनाने वाली कंपनी में आग लगने से एक मजदूर की मौत हो गई थी। कई झुलसे भी थे। आदित्य ने यह मुद्दा भी उठाने की कोशिश की थी।
पत्रकार बनकर भड़काया
मजदूर बिगुल का पत्रकार बनकर यह झुलसे श्रमिकों के घर रिपोर्टिंग के लिए गया था। वहीं 19 मार्च को डीएम के कार्यालय पर नौजवान भारत सभा के 5 सदस्यों के साथ पहुंचा था। वहां पर ज्ञापन दिया था इसके साथ ही बैनर लेकर मौके पर प्रदर्शन किया था। ये फोटो आदित्य ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट फेसबुक पर साझा की हुई हैं। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि एक्स के दो अकाउंट से नोएडा श्रमिक प्रदर्शन से जुड़ी अफवाह फैलाने का काम किया गया है। इन अकाउंट को संचालन पाकिस्तान से हो रहा था। इस एंगल से एटीएस भी जांच में लगी हुई है।
उग्र प्रदर्शन के चेन्नई भागा आनंद
पुलिस के मुताबिक आदित्य ने प्रदर्शन के दौरान एक जगह पर श्रमिकों के बीच पहुंचकर भाषण भी दिया था। वहां की फोटो और वीडियो को देखने के बाद ही उसका नाम पुलिस की जांच में सामने आया। इसके बाद हाल के दिनों में उसकी सारी गतिविधियों की जांच की गई। घटना के तीन दिन बाद 16 अप्रैल को जब उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट हुआ था तो वह चेन्नई भाग गया। वहां कई लोगों के संपर्क में वह रहा। फिर वहां से त्रिचुरापल्ली पहुंचा जहां से एसटीएफ और पुलिस की टीम ने इसे पकड़ा।
मानेसर की लपटें नोएडा तक पहुंचीं: फेसबुक पर आदित्य ने मार्च से कोई पोस्ट नहीं की है। सिर्फ मजदूर बिगुल व अन्य संगठनों के पोस्ट साझा किए हैं। श्रमिकों के आंदोलन से जुड़े कई पोस्ट मजदूर बिगुल के साझा किए गए हैं। इनमें लिखा गया है कि मानेसर हड़ताल की लपटें नोएडा तक पहुंचीं। यही नहीं 9 अप्रैल को फेज-2 में रिचा ग्लोबल कंपनी के सामने हुए प्रदर्शन में बैनर भी बनवाकर लाया गया था। साझा किए गए पोस्ट में श्रमिकों के लिए हेल्पलाइन के तौर पर दो मोबाइल नंबर भी जारी किए जाते थे।
