Bizarre Decisions : जानिए अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान की सभ्यता खत्म करने की धमकी से पीछे क्यों हटे

Find out why the US President backed down from his threat to destroy Iranian civilization.

ईरान की पूरी सभ्यता खत्म करने की धमकी देने वाले ट्रंप उसी दिन युद्ध विराम की घोषणा करते है।

तेहरान।Bizarre Decisions दूसरी बार राष्ट्रपति की कुर्सी संभालने वाले ट्रंप अपने अजीबो—गरीब फैसलों के लिए आलोचना का शिकार हो रहे है। कभी शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए बयान देते है तो कभी दो देशों के बीच चल रहे युद्ध को रुकवाने के लिए बीच में कूदते हैं तो कभी किसी देश के राष्ट्रपति को उठा लेते है। इस बीच जब 28 फरवरी को अमेरिका ने ईरान पर ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया था, तो व्हाइट हाउस में यकीन था कि यह जंग कुछ दिनों में ही खत्म हो जाएगी, लेकिन युद्ध इतना लंबा खींचेगा किसी ने सोचा नहीं था। इस बीच ट्रंप युद्ध से निकलने के लिए अजीबों—गरीब पैंतरे बाजी करते नजर आए। एक दिन पहले ईरान की पूरी सभ्यता खत्म करने की धमकी देने वाले ट्रंप अगले ही दिन युद्ध विराम की घोषणा करते है।

ट्रंप धमकी से पीछे हटे

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक दिन में ईरान को सर्वनाश की धमकी देने से लेकर यह घोषणा करने तक का सफर तय किया कि ईरान के नेतृत्व ने एक ‘काम करने लायक’ प्रस्ताव पेश किया है। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य न खोलने पर ईरान के बिजली संयंत्रों और बुनियादी ढांचे को तबाह करने की जो धमकी दी थी, वह अपनी समय सीमा से करीब 90 मिनट पहले ही वापस ले ली। नतीजा यह हुआ कि अमेरिका, ईरान और इस्राइल ने बुधवार को 14 दिन के संघर्ष विराम पर सहमति जताई। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा करते हुए लिखा- हमने अपने सभी सैन्य उद्देश्य पूरे कर लिए हैं और ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति के लिए एक निर्णायक समझौते के बहुत करीब हैं।

पाक थपथपा रही अपनी पीठ

दरअसल युद्ध​ विराम की घोषणा पर पाकिस्तान खुद की पीठ थपथपा रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और है। यह संघर्षविराम सिर्फ पाकिस्तान की कोशिशों का नतीजा नहीं था। मध्यस्थता में पाकिस्तान और चीन, दोनों शामिल थे। न्यूज एजेंसी AP को दो अधिकारियों ने बताया कि चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वह अमेरिका का सबसे बड़ा आर्थिक प्रतिस्पर्धी भी है। चीन ने ही खामोशी से संघर्षविराम की राह निकालने की रूपरेखा तय की। AFP के अनुसार, चीन ने ही ईरान को बातचीत की मेज तक लाने में मदद की। ट्रंप ने आखिरकार यह सच स्वीकार किया कि अगर युद्ध बढ़ता रहा तो अमेरिका उसी किस्म के अंतहीन युद्ध में फंस सकता है, जिसमें उनके पूर्ववर्ती राष्ट्रपति फंसे थे। ट्रंप ने ऐसी ही स्थिति में अमेरिका को डालने से बचने का वादा मतदाताओं से किया था।

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