mother’s love :आग की लपटों में घिरी पार्वती ने खिड़की तोड़ बच्चों को बचाया, लेकिन खुद जल गई

Surrounded by flames, Parvati broke a window to save the children, but was burnt herself.

इस हादसे में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 19 हो गया है।

मथुरा। mother’s love​ यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए दिल दहलाने वाले हादसे में कइयों की जिंदगी खत्म हो गई तो कइयों को जीवन भर का गम मिला। कुछ ऐसा ही हुआ पार्वती के साथ जो दो बच्चों के साथ उसी बस में सफर कर रही थी, जो हादसे के बाद आग का गोला बनी थी। आग ​में घिरी पार्वती ने अपने बच्चों को तो किसी तरह बचा लिया, लेकिन खुद की जान बचाने में नाकाम रही। अब उसकी पहचान के लिए उसके बच्चों के डीएनए से उसका मिलान किया जाएगा। हालांकि इस हादसे में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 19 हो गया है।

​पति के पास जा रही थी पार्वती

पार्वती यमुना एक्सप्रेस-वे पर मंगलवार तड़के हुआ भीषण हादसे का शिकार हो गई थीं। वह हमीरपुर के राठ की रहने वाली थीं। वह बेटी प्राची (12) और बेटे सनी (8) के साथ डबल डेकर बस से नोएडा अपने पति गोविंद के पास जा रही थीं। इसी दौरान रास्ते में वह हादसे का शिकार हो गईं, लेकिन उसने दोनों बच्चों को कांच की खिड़की तोड़कर बाहर फेंक दिया, जबकि खुद आग की लपटों में फंस गई थीं और जिंदा जल गईं। हालांकि उनके शव की पहचान के लिए उनकी बेटी प्राची का डीएनए सैंपल लिया गया है। डीएनए रिपोर्ट आने के बाद अब उनके शव की शिनाख्त हो सकेगी। यह रिपोर्ट करीब एक सप्ताह में आएगी। इसलिए पति गोविंद व दोनों बच्चे इधर-उधर घूमकर रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं।

नोएडा के सेक्टर-87 में किराए के मकान में रहने वाले गोविंद राजमिस्त्री का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार शाम 6 बजे उनकी पत्नी दोनों बच्चों के साथ स्लीपर बस में सवार होकर उनके पास लौट रही थीं। हादसे के बाद बच्चे किसी दूसरी बस से किसी तरह घर पहुंच गए। बेटी प्राची की कमर में गंभीर चोट है, बेटे सनी के सिर में चोट आई है। पार्वती का मोबाइल फोन लगातार बंद आ रहा है।

जिला अस्पताल से 33 घायलों को मिली छुट्टी

बलदेव यमुना एक्सप्रेस में हुए हादसे के बाद जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों की छुट्टी का सिलसिला बुधवार को शुरू हो गया। बुधवार को 30 मरीजों की छुट्टी हो गई जबकि तीन को एसएन मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर दिया। तीन मरीज ऐसे हैं जिनका उपचार जिला अस्पताल चल रहा है। राहत की बात यह है कि वर्तमान में कोई भी मरीज गंभीर हालत में नहीं है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि सभी घायलों को आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। डॉक्टरों की टीम लगातार मरीजों की निगरानी कर रही है और दवाइयों के साथ जरूरी जांचें की जा रही हैं।

मंगलवार को दुर्घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक मशीनरी भी अस्पताल पहुंची और घायलों का हालचाल जाना। अधिकारियों ने चिकित्सकों को बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए और घायलों के परिजनों से बातचीत कर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। बुधवार को जिला अस्पताल में भर्ती 36 मरीजों में से 30 मरीजों की छुट्टी करके उन्हें एंबुलेंस से घर भेजा गया। जबकि 3 मरीजों की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें शाम को एसएन मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया।

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