
28 सितम्बर 2025, लखनऊ। पीपुल्स यूनिटी फोरम के तत्वावधान में शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती के अवसर पर “क्रांति की तलवार विचारों की शान पर तेज होती है।” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भगवती सिंह ने व संचालन पीपुल्स यूनिटी फोरम के संयोजक वीरेन्द्र त्रिपाठी ने किया। मुख्य वक्ता के रुप में बोलते हुए ओ. पी. सिन्हा ने कहा कि भगतसिंह ने अपने साहस, बहादुरी और बुलन्द इरादों से अत्यंत छोटी उम्र में ही राजनीतिक परिपक्वता हासिल कर क्रान्तिकारियों में विशिष्ट स्थान हासिल कर लिया था। उन्होंने पूरे स्वतंत्रता संघर्ष का मूल लक्ष्य क्या हो और इसे किस जरिए से हासिल किया जाए, इस बारे में सटीक अवधारणा देने की कोशिश की। शोषित पीड़ित के प्रति उनके दिल में गहरा प्यार और स्नेह ही उन्हें क्रांतिकारी संघर्ष में खींच लाया था। भूखे नंगे, निरक्षर शोषितों के प्रति गहरे लगाव ने उन्हें शोषण करने वालों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष में शामिल होने हेतु प्रेरित किया था।
उन्होंने कहा कि भगत सिंह को सिर्फ एक क्रांतिकारी ही नहीं थे, बल्कि हम उन्हें एक विचारक और बुद्धिजीवी व्यक्तित्व के रूप में देखतें है, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण का एक वैकल्पिक विचार प्रस्तुत किया।
वक्ताओं ने भगत सिंह के जीवन संघर्ष को याद करते हुए कहा कि एक बार भारतीय गदर पार्टी के नेता बाबा सोहन सिंह भकना ने भगतसिंह से उनके रिश्तेदारो के बारे में पूछा तो उन्होने उत्तर दिया, “बाबाजी मेरा खून का रिश्ता तो शहीदों के साथ है जैसे खुदीराम बोस और करतार सिंह सराभा हम एक ही खून के है। हमारा खून एक ही जगह से आया है और एक ही जगह जा रहा है। दूसरा रिश्ता आप लोगो से है, जिन्होने हमे प्रेरणा दी और जिनके साथ कालकोठरियों में हमने पसीना बहाया है। तीसरे रिश्तेदार वे होंगे जो इस खून पसीने से तैयार की हुई जमीन में पैदा होंगे और इस मिशन को आगे बढ़ाएंगे।” आज भगतसिंह की निगाहें अपने उस तीसरे रिश्तेदार को ढूंढ रही है।
भगवती सिंह ने कहा कि भगत सिह की विचारधारा आज भी प्रासंगिक है, खासकर जब साप्रदायिक और जातिवादी ताकतें देश की एकता को खंडित करने का प्रयास कर रही हैं।
कार्यक्रम में राजीव पांडेय, मनोरम निश्रा, योगेंद्र उपाध्याय, के पी यादव, वी एन सिंह, के के शुक्ला, डा. मन्दाकिनी राय, सन्तराम गुप्ता, दीनानाथ यादव, अरुण यादव, अजय कुमार, विजय वर्मा सहित अन्य लोग ने अपने विचार रखे।
