इंडिया गठबंधन में ​सीट की टेंशन: कांग्रेस सौ सीट चाहती है, जबकि सपा 50 देने के मूड में, इसके लिए भी रखी शर्त

The Congress wants 100 seats, whereas the SP is inclined to offer 50—and has even attached a condition to that offer.

लखनऊ। TensionOverSeatSharing यूपी में विधानसभा चुनाव भले ही अगले साल हो, लेकिन सभी राजनीतिक दल अभी से एक—एक सीट पर गुणा गणित करने में जुटे हुए। कांग्रेस और सपा ने 2024 के चुनाव में कमाल करके कमल को पटखनी दी थी। अब दोनों ने साथ चुनाव लड़ने के संकेत तो बहुत पहले ही दे दिया था। लेकिन अभी तक सीटों के बंटवारे को लेकर कोई स्पष्ट नीति सामने नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कांग्रेस अपनी बढ़ी हुई ताकत के बाद कम से कम सौ सीट चाहती है, वहीं सपा उसे 45 से 50 सीटें ही उसे देना चाहती है। वह भी वहीं सीट जहां उसे भाजपा से हार मिली थी। अब देखना यह है कि दोनों दल समय रहते इस विवाद को सुलझा लेते है। या दोनों एकला चलों की राह पर चलेंगे। बता दें कि 2022 के विधान सभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। सपा ने 111 सीटें जीती थीं।

कांग्रेस कर रही है 100 सीटों की मांग

कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि 2017 में सपा-कांग्रेस गठबंधन के तहत कांग्रेस ने 100 से अधिक सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, इसलिए इस बार भी उसे 100 से अधिक सीटें मिलनी चाहिए। 2017 में यह गठबंधन भाजपा के सामने ठहर नहीं सका था। हालांकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि सवाल सीटों की संख्या का नहीं, बल्कि जीत का है। सपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, कांग्रेस जिन सीटों की मांग कर रही है, वहां उसे अपने मजबूत उम्मीदवारों का विवरण देना होगा। उम्मीदवार की जीत-हार की संभावनाओं और स्थानीय राजनीतिक समीकरण के आधार पर सीटों पर फैसला होगा। सपा नेतृत्व का मानना है कि सरकार बनाने के लिए प्रत्येक सीट महत्वपूर्ण है। ऐसे में कमजोर उम्मीदवार को मैदान में उतारना गठबंधन के लिए नुकसानदेह हो सकता है। कांग्रेस के अधिक सीटों पर अड़े रहने की स्थिति में सपा अपने स्तर पर निर्णय ले सकती है।

छोटे दल करेंगे खेला

मिशन 2027 में भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा के अलावा कई छोटे दल शिददत से तैयारी कर रहे है। आजाद समाजपार्टी प्रमुख चंद्रशेखर, ओवैसी भी दमदारी से चुनाव लड़ने को तैयार है, इस​के लिए वह तो कई सभाएं कर चुके है। और कई सीटों पर उम्मीदवार भी तय कर चुके है। इसके अलावा आप, शिवसेना, जदयू, आरआईपी समेत आठ दल उतरकर वोट बंटवारे का काम करेंगे। इसका नुकसान दोनों गठबंधन को हो सकता है।

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