गोदरेज एग्रोवेट ने मक्का फसल के लिए नया हर्बिसाइड ‘ashitaaka’ लॉन्च किया

Godrej Agrovet launches new herbicide ‘ashitaaka’ for maize crop

आशिताका' को खरपतवारों में 2-4 पत्तियां होने पर उपयोग करने की सलाह दी जाती है

  • घास एवं चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार नियंत्रण हेतु अभिनव समाधान, आईएसके जापान के सहयोग से विकसित

बिजनेस डेस्क, मुंबई/हैदराबाद : भारत की अग्रणी कृषि-व्यवसाय कंपनियों में से एक गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड (Godrej Agrovet) ने मक्के की फसल के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया एक नया शाकनाशी (हर्बिसाइड) ‘आशिताका’ लॉन्च किया है। आईएसके जापान के सहयोग से विकसित यह अभिनव समाधान, मक्के की खेती में सबसे बड़ी चुनौती माने जाने वाले घास और चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों पर प्रभावी नियंत्रण प्रदान करता है। फसलों के शुरुआती विकास चरणों में खरपतवारों का प्रकोप मक्के की उत्पादकता पर काफी नकारात्मक प्रभाव डालता है। ‘आशिताका’ को खरपतवारों में 2-4 पत्तियां होने पर उपयोग करने की सलाह दी जाती है, जिससे यह खरपतवारों पर प्रभावी नियंत्रण प्रदान करता है।

मक्का की मांग में इजाफा

वैश्विक स्तर पर मक्का की खेती के क्षेत्रफल में भारत चौथे और वार्षिक उत्पादन में पांचवें स्थान पर है। देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था और मध्यम वर्ग की बढ़ती मांग के कारण पशु-प्रोटीन, स्टार्च और अन्य औद्योगिक उत्पादों (जिनमें मक्का का उपयोग होता है) की खपत लगातार बढ़ रही है। इसके चलते पिछले कुछ वर्षों में, पशुओं के चारे, औद्योगिक एवं बायोफ्यूल उपयोग के लिए मक्का की मांग में इजाफा हो रहा है। हालांकि, इस क्षेत्र को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे गुणवत्तापूर्ण बीज और कृषि-इनपुट की सीमित उपलब्धता। साथ ही जलवायु परिवर्तन भी एक गंभीर खतरा है, क्योंकि चरम मौसमी परिस्थितियां, बारिश का असमान पैटर्न, कीट एवं बीमारियों का प्रकोप मक्का उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में अशिताका जैसे शोध-आधारित समाधानों का आना बेहद जरूरी है ताकि उपज बढ़ाई जा सके और फसल का महत्व बनाए रखा जा सके।

किसानों का जीवन सुगम बनाए

लॉन्चिंग के अवसर पर, राजावेलु एनके, सीईओ (क्रॉप प्रोटेक्शन बिज़नेस), गोदरेज एग्रोवेट ने कहा, ‘गोदरेज एग्रोवेट में हमारा मिशन है कि हम नवोन्मेषी और शोध-आधारित समाधान प्रदान करें, जो भारतीय किसानों को सशक्त बनाएं और खेती करने वाले परिवारों के जीवन को बेहतर बनाएं। हमारा लक्ष्य है कि कृषि को पर्यावरणीय और बाज़ार की चुनौतियों से सुरक्षित रखते हुए भविष्य के लिए तैयार किया जा सके। फसल की शुरुआती वृद्धि अवस्था में प्रभावी खरपतवार प्रबंधन, मक्का उत्पादक किसानों के लिए बेहतर उत्पादकता हासिल करने में बेहद महत्वपूर्ण है। भारत में अपनी तरह का पहला प्रोडक्ट अशिताका, किसानों को उपज बढ़ाने और लाभ सुनिश्चित करने के लिए एक सशक्त समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम है।’

अशिताका का प्रभावी खरपतवार नियंत्रण

अनिल चौबे, जीएम, मार्केटिंग (क्रॉप प्रोटेक्शन बिज़नेस), गोदरेज एग्रोवेट ने कहा, ‘ashitaaka का प्रभावी खरपतवार नियंत्रण मक्का की फसल और खरपतवारों के बीच प्रतिस्पर्धा को कम करता है। इससे सीमित मिट्टी की नमी और पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग हो पाता है और फूल आने और दाना बनने जैसे अहम चरणों में पौधों को अधिक पोषण मिलता है। इसकी अनुशंसित खुराक 50 मिलीलीटर प्रति एकड़ हर्बिसाइड और 400 मिलीलीटर प्रति एकड़ सर्फेक्टेंट है, जिसका छिड़काव खरपतवार की 2-4 पत्ती की अवस्था में किया जाना चाहिए।

यह शुरुआती चरण में ही खरपतवारों को नियंत्रित करता है और उपज पर होने वाले नुकसान को कम करने में मदद करता है, जो खराब मौसम की स्थिति में और भी बढ़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप, विशेष रूप से वर्षा-आधारित क्षेत्रों में, मक्के का उत्पादन अधिक स्थिर होता है, दानों की गुणवत्ता बेहतर होती है और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होती है। शुरुआत में यह उत्पाद तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु के प्रमुख मक्का उत्पादक क्षेत्रों में लॉन्च किया गया है। आने वाले महीनों में गोदरेज एग्रोवेट इसे देश के सभी मक्का उत्पादक राज्यों में उतारने की योजना बना रहा है।

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