जानिए कौन है मोहम्मद यूनुस जो शेख हसीना के तख्ता पलट के पीछे बनी वजह

नई दिल्ली: पड़ोसी देश बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश छोड़ दिया, अब सेना देश को संभालने की कोशिश कर रही है। वहीं हसीना ने इस समय भारत में शरण ले रखी है। सूत्रों के अनुसार वह लंदन जा सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हसीना की इस बर्बादी के पीछे छात्रों का सिर्फ आरक्षण विरोधी प्रदर्शन ही नहीं है, बल्कि हसीना ने देश की दो बड़ी महत्वपूर्ण हस्तियों के साथ की गई नाइंसाफी भी थी, जिनकी वहां के लोगों में अच्छी-खासी प्रतिष्ठा थी।

ये हैं नोबेल पुरस्कार विजेता और ग्रामीण बैंक के सूत्रधार मोहम्मद यूनुस और बांग्लादेश के पूर्व चीफ जस्टिस सुरेंद्र कुमार सिन्हा। इन दोनों को वहां की जनता अपने सिर आंखों पर बिठाती रही है। इन दोंनों के खिलाफ की गई बदले की कार्रवाई ने वहां की जनता के मन में हसीना सरकार के प्रति गुस्सा भर दिया। इस गुस्से को बस एक चिंगारी मिलनी थी, जो आरक्षण विरोधी आग के रूप में मिल गई और हसीना की सत्ता खाक में मिल गई। माना जा रह है कि यूसुफ को केयरटेकर पीएम बनाया जा सकता है।

वित्तीय सुधारों के लिए मिला नोबेल

28 जून, 1940 को जन्मे मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश के एक सामाजिक उद्यमी, एक बैंकर, एक अर्थशास्त्री और सिविल सोसायटी के नेता हैं। यूनुस ने 2006 में ग्रामीण बैंक की स्थापना की और माइक्रोक्रेडिट और माइक्रोफाइनेंस जैसे नए-नए आइडिया दिया। इसी बात के लिए उन्हें 2006 में नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया। नोबेल कमेटी ने यूनुस और ग्रामीण बैंक को एक साथ माइक्रो क्रेडिट के माध्यम से नीचे से आर्थिक और सामाजिक विकास करने के उनके प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा।

2009 में उन्हें यूनाइटेड स्टेट्स प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम से सम्मानित किया गया था। 2010 में उन्हें कांग्रेसनल गोल्ड मेडल दिया गया। इसके साथ ही उन्हें कई और भी अवॉर्ड मिल चुके हैं।हसीना के कार्यकाल में ही मोहम्मद यूनुस पर 20 लाख अमेरिकी डॉलर गबन करने का आरोप लगाए गए थे। इस मामले और श्रम कानूनों को न मानने के आरोप में यूनुस को 6 महीने की जेल की सजा भी सुनाई गई थी। हालांकि, युनूस अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से नकारते रहे हैं। वह जमानत पर जेल से बाहर भी आ गए।

यूनुस पर 200 से ज्यादा मुकदमे दर्ज करवाए

मोहम्मद यूनुस पर हसीना सरकार ने 200 से ज्यादा मामले दर्ज करवाए हैं, जिनमें भ्रष्टाचार के बड़े आरोप भी शामिल हैं। इन मामलों में दोषी पाए जाने पर उन्हें वर्षों तक की जेल की सलाखों में रहन पड़ सकता है। इसे लेकर भी जनता के बीच काफी नाराजगी थी। यूनुस को श्रम कानूनों के उल्लंघन के आरोप में 6 महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन उन्हें जमानत दे दी गई थी।

यूनुस को प्रतिद्वंद्वी मानने लगी थीं हसीना

यूनुस के काम से खुश होकर देश में उनके समर्थक बढ़ते जा रहे थे। उन्हें अंतरराष्ट्रीय मीडिया और समूहों का बड़ा समर्थन हासिल हे। उन्हें खुद अवामी लीग की हसीना अपना प्रतिद्वंद्वी मानने लगी थीं। ऐसे में यूनुस जैसे अर्थशास्त्री को दोषी ठहराने के लिए कानूनों का सहारा लेना और मुकदमों में उलझाने के पीछे नेता हसीना के मंसूबे को पहचान चुकी थी। आम जनता के बीच हसीना की छवि दिनोंदिन बिगड़ती जा रही थी। मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी यूनुस की सजा पर कहा था कि यूनुस को दोषी ठहराया जाना बांग्लादेश में मानवाधिकारों की संकटग्रस्त स्थिति का प्रतीक है, जहां अधिकारियों ने स्वतंत्रता को खत्म कर दिया है और आलोचकों को अधीनता के लिए मजबूर कर दिया है।

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