यूपीएल ने विश्व आर्द्रभूमि दिवस पर जागरूकता फैलाने के लिए किया दूसरे सारस क्रेन महोत्सव का आयोजन

  • गुजरात में पाए जाते हैं भारत में लुप्तप्राय प्रजाति के सारस क्रेन, इस प्रजाति की उपलब्ध संख्या के लिहाज़ से राज्य दूसरे स्थान पर है
  • वन विभाग, यूपीएल और समुदाय के संयुक्त प्रयासों के परिणामस्वरूप सारस क्रेन की आबादी 2022-2023 में बढ़कर 1254 हो गई जो 2015-16 में 500 थी

गुजरात। वहनीय कृषि समाधानों की वैश्विक प्रदाता, यूपीएल लिमिटेड ने खेड़ा जिले के पारीज वेटलैंड के परिसर में दूसरे सारस क्रेन महोत्सव का आयोजन किया। विश्व आर्द्रभूमि दिवस (वर्ल्ड वेटलैंड्स डे) के मौके पर आयोजित इस उत्सव का उद्देश्य है, जागरूकता बढ़ाना और भारतीय सारस क्रेन (ग्रस एंटीगोन) के संरक्षण को बढ़ावा देना है। वेटलैंड अत्यधिक उत्पादक और जैविक रूप से विविधीकृत प्रणालियां हैं जो पानी की गुणवत्ता को बढ़ाती हैं, क्षरण को नियंत्रित करती हैं, जल धाराओं के प्रवाह को बनाए रखती हैं, कार्बन को अलग करती हैं और सारस क्रेन को आश्रय प्रदान करती हैं।

150 छात्र और शिक्षक हुए शामिल

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एस के श्रीवास्तव, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण विभाग के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, गांधीनगर; विशिष्ट अतिथि, सुश्री नम्रता इटालिया, डीसीएफ, आनंद; श्री रूपक सोलंकी, डीसीएफ, खेड़ा, श्री ऋषि पठानिया, उपाध्यक्ष – सीएसआर, यूपीएल लिमिटेड; डॉ. जतिंदर कौर, प्रोग्राम मैनेजर – यूपीएल सारस कंज़र्वेशन, यूपीएल लिमिटेड के अन्य प्रतिनिधियों के साथ मौजूद रहे। इस कार्यक्रम में 15 स्कूलों की सक्रिय भागीदारी दर्ज हुई, जिसमें 150 छात्र और शिक्षक शामिल हुए। इस समारोह में सारस क्रेन पर एक फोटो प्रदर्शनी और छात्रों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई।

सबसे ऊंचा उड़ने वाला पक्षी

भारतीय सारस क्रेन, विश्व स्तर पर सबसे ऊंचा उड़ने वाला पक्षी है और इसे इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंज़र्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की लाल सूची के तहत संवेदनशील (वल्नरेबल) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिसका पारंपरिक आश्रय वेटलैंड है और यह इंसान के साथ सहस्तित्व में रहता है। यह भोजन और प्रजनन के लिए कृषि क्षेत्रों पर निर्भर है। वेटलैंड की संख्या में गिरावट और मौजूदा पर्यावास (हैबिटैट) की स्थिति ख़राब होने को सारस की संख्या में कमी की वजह माना जाता है।

सारस क्रेन के संरक्षण के लिए, यूपीएल ने 2015 में सारस संरक्षण परियोजना शुरू की। इस परियोजना ने सारस क्रेन की आबादी 2022-2023 तक बढ़ाकर 1254 करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जो 2015-16 में 500 थी। यूपीएल की टीम ने किसानों के साथ मिलकर काम किया, जिसके तहत शिक्षा तथा स्वैच्छिक भागीदारी के माध्यम से सारस के प्रति गलत धारणाओं और व्यवहारिक दृष्टिकोण में सुधार किया गया।

सारस संरक्षण परियोजना

इस महोत्सव के मुख्य अतिथि एस.के.श्रीवास्तव, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण विभाग के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने कहा, ”सारस संरक्षण परियोजना, यूपीएल की एक सराहनीय पहल है जो वन्यजीव संरक्षण के नेक काम के लिए लोगों को एक साथ लाती है। प्रकृति और मानवता के बीच सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए ऐसे प्रयास महत्वपूर्ण हैं। यूपीएल लिमिटेड में वैश्विक कॉर्पोरेट मामलों और उद्योग संबंधों के अध्यक्ष, श्री सागर कौशिक ने इस पहल के बारे में कहा, “सारस संरक्षण परियोजना वहनीयता और जैव विविधता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

हमारे सहयोगी प्रयासों के सकारात्मक प्रभाव को देखना खुशी की बात है। सारस क्रेन और लोगों के लिए एक समृद्ध वातावरण बनाना। खेड़ा और आनंद जिलों में इस पहल ने गुजरात को भारत में सारस की दूसरी सबसे बड़ी जंगली आबादी (वाइल्ड पापुलेशन) को आश्रय देने में मदद की है, और हमने आठ वर्षों में 151% की वृद्धि दर्ज की है।

स्वयंसेवकों का बड़ा नेटवर्क

यूपीएल लिमिटेड के उपाध्यक्ष – सीएसआर, ऋषि पठानिया ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “सारस क्रेन महोत्सव, इस प्रजाति के संरक्षण के प्रति यूपीएल की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। सारस संरक्षण परियोजना के तहत 40 गांवों के 88 ग्रामीण सारस संरक्षण समूह के स्वयंसेवकों का एक व्यापक नेटवर्क बनाया गया है, जो घोंसलों, अंडों और किशोरों को अवैध शिकार और परभक्षियों से बचाने में लगे हुए हैं। इसके अलावा, 32,166 छात्रों तथा स्थानीय समुदाय को सारस क्रेन संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया है, और 5,000 किसानों को सारस क्रेन के संरक्षण की आवश्यकता और महत्व के बारे में शिक्षित किया गया है। “

यूपीएल को इस संरक्षण के असर के अलावा सारस पहल के लिए व्यापक मान्यता मिली है और इसके लिए इसे कई सम्मान मिले हैं जिनमें, एसीईएफ एशियन लीडर्स फोरम एंड अवार्ड्स 2017, इंडिया सीएसआर लीडरशिप समिट 2017, कॉफ़ी फॉर कॉज़: कन्वर्सेशन ऑन सस्टेनेबिलिटी एंड सीएसआर 2018, दैनिक जागरण सीएसआर पुरस्कार 2019, 17वां फेडरेशन ऑफ गुजरात इंडस्ट्रीज (एफजीआई) पुरस्कार 2021, 5वां इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स, सोशल इम्पैक्ट अवार्ड्स 2023 और साथ ही 2023 में मिली एक प्रशंसा पट्टिका शामिल है।

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