लखनऊ।Ramkishore Ji पीपुल्स यूनिटी फोरम के तत्वावधान में सोशलिस्ट चिंतक, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता रामकिशोर जी के प्रथम स्मरण दिवस पर स्मरण सभा का आयोजन किया गया। अध्यक्षता वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता जय प्रकाश ने व संचालन एडवोकेट वीरेन्द्र त्रिपाठी ने किया। स्मरण सभा में बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि रामकिशोर जी को याद करने का अर्थ है आज के नये दौर के जनांदोलनों के लिये प्रेरणा और ऊर्जा प्राप्त करना, अपने सामाजिक दायित्व के प्रति सचेत होना है। रामकिशोर जी के जीवन का अर्थ ही था सतत् संघर्षरत, आंदोलनरत रहना। उन्होंने आजीवन हर तरह के अन्याय, उत्पीड़न के खिलाफ प्रतिवाद, प्रतिरोध का मशाल जलाये रखा, और अब उसे जलाये रखने का साझा दायित्व हम सभी का है। उन्होंने हम सभी को जीवन जीने का एक नया अर्थ दिया और सतत संघर्षों की प्रेरणा दी।
साम्राज्यवाद के खिलाफ निरंतर संघर्ष
वैसे तो उनकी सामाजिक सक्रियता बहुआयामी थी और वे मूलतः समाजवादी-गांधीवादी सोच के व्यक्ति थे। फिर भी कुछ मुद्दे उनके लिए ज्यादा महत्वपूर्ण थे। साम्राज्यवाद के खिलाफ निरंतर संघर्ष, धर्मनिरपेक्षता के लिये प्रयास एवं संघर्ष, मानव अधिकार एवं लोकतंत्र के लिये संघर्ष। आज अपने देश में ही नहीं पूरी दुनिया में ही ये तीनों सवाल बेहद महत्वपूर्ण हो गये हैं। इन विचारों की विरोधी ताकतों द्वारा जनजीवन और प्रकृति पर विनाशकारी हमला बढ़ता जा रहा है। ऐसे में मानवता का भविष्य ही खतरे में है। यदि आज रामकिशोर जी हमारे बीच में होते तो निश्चित तौर पर हम एक नये आंदोलन के मोर्चे पर होते। इसलिये, उन्हें हम सच्ची श्रध्दांजलि दे पायेंगे, जब हम उन आंदोलनों को आगे बढायेंगे।
रामकिशोर जी ने डा. राही मासूम रज़ा साहित्य अकादमी की स्थापना किया तथा वे सोशलिस्ट फाउंडेशन के अध्यक्ष , यूपी जर्नलिस्ट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष, सीएफडी उत्तर प्रदेश प्रभारी, भारत बांग्लादेश पाकिस्तान पीपुल्स फोरम सहित विभिन्न जन संगठनों के पदाधिकारी थे।उन्होंने कुल 15 पुस्तकों का लेखन व सम्पादन भी किया था। स्मरण सभा में ओपी सिन्हा, कौशल किशोर, प्रभात कुमार, असगर मेंहदी, राकेश श्रीवास्तव, अजय शर्मा, आकांक्षा, विजय श्रीवास्तव सहित अन्य लोगों ने रामकिशोर जी को याद कर अपनी श्रध्दांजलि दिया।
