नई दिल्ली। INDIA Alliance चुनाव में गठबंधन करना आसान होता है, लेकिन सीट बंटवारा काफी मुश्किल होता है, जैसा कि हर चुनाव में देखने को मिलता है। कुछ ऐसा ही यूपी विधानसभा चुनाव से पहले इंडिया गठबंधन में शामिल सपा—कांग्रेस के सामने आई है। सपा जहां कांग्रेस को 50 भी सीट देने को तैयार नहीं, वहीं कांग्रेसी आधी सीट पर चुनाव लड़ने की मंशा पाल रहे है। दोनों दलों के नेताओं तेवर देखे दोनों तरफ से दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस सीटों को लेकर जल्द निर्णय चाहती है, तो सपा जीत सुनिश्चित किए जाने के लिए मजबूत प्रत्याशियों के उतारने पर जोर दे रही है। हालांकि इस समय सपा का पूरा फोकस राज्यसभा सीटें जीतने का है। माना जा रहा है कि दिवाली के बाद सीटों की संख्या तय हो जाएगी, ताकि उसके बाद दोनों दल अपने अपने प्रत्याशियों का एलान सुविधा व तत्कालीन हालात व जातीय समीकरणों के आधार पर करेंगे।
जिलेवार घोषणा पत्र की तैयारी
चुनाव का एलान होने के बाद दोनों दल संयुक्त रैलियां, संयुक्त मुद्दों के साथ सामने आएंगे। सपा जिले के हिसाब से घोषणा पत्र तैयार कराएगी। उसमें कांग्रेस की भी राय ली जाएगी। वोट चोरी के मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के तहत आगे होने वाली रैलियों में सपा भी अपनी सहभागिता दिखाएगी। अब कांग्रेस को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल गया है जिनके सपा से अच्छे रिश्ते माने जाते हैं। ऐसे में सीटों को लेकर पहले जैसी तल्ख बयानबाजी कम होने के आसार हैं।
हर जिले में एक सीट चाहती है कांग्रेस
बता दें कि कांग्रेस की मंशा हर जिले से कम से कम एक सीट लड़ने की है। सपा 2017 के चुनाव के वक्त बने फार्मूले पर सहमत नहीं है। वह 2022 के चुनाव में सहयोगियों को दी गई सीटों से कुछ ज्यादा देकर कांग्रेस को तैयार करने की कोशिश में है। सपा ने उस वक्त कांग्रेस से समझौता नहीं किया था। सपा ने उस वक्त सुभासपा, रालोद समेत कई सहयोगियों को 55 सीट दी थी और बाकी पर खुद लड़ी थी। 2017 में कांग्रेस 105 सीटें दिए जाने का ऐलान हुआ लेकिन कांग्रेस 114 सीट पर लड़ गई यानी कुछ सीटों पर सपा कांग्रेस दोनों के प्रत्याशी आमने सामने थे। सपा अब दस साल बाद 311 सीट के बजाए 350 सीट पर लड़ने के मूड में है।
