लखनऊ। यूपी का चुनावी मैदान रोचक होता जा रहा है। भाजपा,सपा,बसपा और कांग्रेस के अलावा कुछ नौकरशाह भी मैदान में उतरकर बदलाव लाने की तैयारी में जुटा हुआ है। इसी क्रम में चर्चित नाम दिव्या मित्तल का जुड़ गया। 13 साल की प्रशासनिक सेवा छोड़ चुकीं पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल अब राजनीति के मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। उनके ताजा वीडियो संदेश ने संकेत दिए हैं कि वह किसी पुरानी राजनीतिक दल का हिस्सा बनने के बजाय अपनी अलग राजनीतिक राह बनाने का फैसला किया है।
बता दें कि दिव्या मित्तल ने कुछ दिन पहले IAS Divya Mittal सेवा से त्यागपत्र देकर यह सवाल छोड़ दिया था कि आखिर प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद उनका अगला कदम क्या होगा। अब उन्होंने खुद सामने आकर लोगों से संवाद शुरू किया है। उन्होंने कहा कि यदि लोगों को लगे कि यह उनकी भी आवाज है तो वे दिए गए वाट्सएप नंबर (9198956957) पर संदेश भेज सकते हैं। दिव्या मित्तल के इस कदम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उनके सामने राजनीति में आने के कई रास्ते हो सकते थे। इस्तीफे के बाद इंटरनेट मीडिया पर उन्होंने खुद उन संभावनाओं का जिक्र किया था- परिवार को समय देना, विदेश लौटना, कोचिंग, किताब लिखना या राजनीति में आना।
यूपी की राजनीति में लेंगी एंट्री
29 सितंबर को उनके अगले कदम के एलान का इंतजार था। उन्होंने मंगलवार को अलग राजनीतिक दल बनाने की घोषणा की। यह उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक अलग प्रयोग होगा। खासकर ऐसे समय में जब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं, किसी पूर्व नौकरशाह का सीधे राजनीतिक संगठन खड़ा करने की दिशा में बढ़ना अपने आप में चर्चा का विषय बनेगा।दिव्या मित्तल का ताजा संदेश सिर्फ घोषणा तक सीमित नहीं है। उन्होंने लोगों से वाट्सएप पर जुड़ने की अपील की है। इससे संकेत मिलता है कि उनकी रणनीति में शुरुआती दौर में प्रत्यक्ष जनसंवाद और डिजिटल माध्यम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद नई पारी
2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने गत 30 अगस्त को प्रशासनिक सेवा से त्यागपत्र देने की घोषणा की थी, जिसे 15 सितंबर 2026 को शासन द्वारा स्वीकार कर लिया गया। इसके साथ ही उनके लगभग 13 वर्षों के प्रशासनिक सफर का समापन हो गया। आईआईटी दिल्ली और आइआइएम बेंगलुरु से पढ़ाई करने वाली दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा में आने से पहले विदेश में भी काम किया था। यूपी में वह संत कबीरनगर, मीरजापुर और देवरिया समेत कई जिलों की जिलाधिकारी रह चुकी हैं। मीरजापुर के लहुरियादह गांव में पाइप से पानी पहुंचाने की पहल से उन्हें विशेष पहचान मिली।
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