गाजियाबाद। अधिकांश लोग पनीर को सेहत बनाने के लिए उपयोग करते हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता जो पनीर वह खरीदकर बाजार से ला रहे है, वह कितना खतरनाक है। वह आपकी सेहत बनाने की जगह बिगाड़ देगा। इसलिए पनीर खरीदते समय ब्रांडेड कंपनी का ही खरीदे। गत दिवस गाजियाबाद जिले के भोजपुर थाना क्षेत्र के नाहली गांव में पनीर तैयार करने वाली तीन फैक्टरियों पर खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी में बड़े पैमाने पर मिलावट का खुलासा हुआ है। यहां पनीर को सफेद और ज्यादा वजनदार बनाने के लिए कपड़े धोने में इस्तेमाल होने वाला Correction fluid, पामोलीन ऑयल, दूध पाउडर और कई हानिकारक केमिकल मिलाए जा रहे थे। खाद्य विभाग की टीम ने बुधवार रात कार्रवाई करते हुए तीनों फैक्टरियों से 868 किलो पनीर और 170 किलो खोया मौके पर ही नष्ट कराया। साथ ही वहां से विभिन्न केमिकल समेत 20 नमूने जांच के लिए लखनऊ लैब भेजे गए हैं।
सहायक आयुक्त खाद्य-2 सुरेश कुमार मिश्रा ने बताया कि लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने के मामले में नाहली निवासी फैक्टरी संचालकों कलवा, सकील और कफील के खिलाफ भोजपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। लखनऊ से नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस भी मामले की जांच कर रही है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी आशुतोष राय ने बताया कि जिन तीन फैक्टरियों पर कार्रवाई की गई है, वहां पनीर तैयार करने में प्रयोग होने वाले कुछ केमिकल आरोपी खुद ही तैयार कर रहे थे। इसमें शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले कई रसायन मिलाए जा रहे थे। उन्होंने बताया कि इन केमिकल के प्रयोग के बाद सामान्य घरेलू तरीकों से नकली पनीर को पहचानना भी मुश्किल हो जाता है। दिखने और स्वाद में यह असली पनीर जैसा ही लगता है।
त्योहारों पर बढ़ा दी थी सप्लाई
पूछताछ में सामने आया कि तीनों फैक्टरियों से हर दिन करीब 300 से 400 किलो पनीर त्योहारों के सीजन में तैयार कर बाजार में भेजा जा रहा था। आरोपी गाजियाबाद के साथ दिल्ली, फरीदाबाद, गुरुग्राम, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ में केमिकल से तैयार पनीर की सप्लाई कर रहे थे। यह पनीर बाजार में लोगों को 200 से 250 रुपये प्रति किलो में मिल जाता था। सस्ता होने के चलते दुकानदार और आम लोग इसे खरीद लेते थे। खाद्य विभाग का कहना है कि आने वाले त्योहारों को देखते हुए नकली पनीर की मांग बढ़ने पर इन्होंने उत्पादन भी बढ़ा दिया था।
मस्तिष्क, यकृत, गुर्दे पर पड़ेगा असर
विशेषज्ञयों का कहना है कि वाइटनर या फ्लूड से निकलने वाली वाष्प और रसायन शरीर के लिए बेहद खतरनाक हैं। ये सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर फेफड़ों के माध्यम से तेजी से रक्तप्रवाह में पहुंचते हैं और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं। इसके लंबे समय तक सेवन से चक्कर आना, समन्वय में कमी, बेहोशी, लीवर और किडनी फेल जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। अन्य रसायन, जैसे एरोसोल स्प्रे या नाइट्राइट, रक्त वाहिकाओं को फैला सकते हैं, जिससे हृदय गति बढ़ना और हृदय संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर सबसे ज्यादा होता है।
