नई दिल्ली। मोदी सरकार देश को स्वच्छ और प्रदूषण रहित यातायात सुविधा मुहैया कराने के उदृेश्य से 18 शहरों में Water Metro Project शुरू करने की योजना पर काम कर रही है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने सोमवार को इस बारे में जानकारी दी। मंत्रालय ने नेशनल वाटर मेट्रो पॉलिसी का एक ड्राफ्ट तैयार किया है। इसे चर्चा के लिए दूसरे मंत्रालयों के पास भेजा गया है ताकि जल्द ही इस प्रोजेक्ट को पूरे देश में लागू किया जा सके। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से परिवहन के क्षेत्र में एक नई क्रांति आएगी सड़कों और ट्रेनों का लोड कम होने के साथ ही एक सस्ते सफर का विकल्प लोगों के सामने उपलब्ध होगा।
दो चरणों में पूरी होगी योजना
इस योजना को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में उत्तर प्रदेश के वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज के साथ-साथ श्रीनगर और पटना में वाटर मेट्रो शुरू करने की तैयारी है। दूसरे चरण में असम के दो शहरों, तेजपुर और डिब्रूगढ़ को इस सुविधा से जोड़ा जाएगा। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की प्रगति जानने के लिए एक समीक्षा बैठक की। अधिकारियों के मुताबिक, कोच्चि वाटर मेट्रो की सफलता और वहां से मिले अनुभवों के आधार पर अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर ले जाया जा रहा है। सरकार उन शहरों में पानी के रास्ते यातायात को बढ़ावा देना चाहती है जहां नदियां या नहरें मौजूद हैं। इस पहल का मकसद जलमार्गों को आधुनिक और टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन के रूप में विकसित करना है।
कम लागत में अच्छा विकल्प
मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि वाटर मेट्रो सिस्टम में लागत काफी कम आती है। इसमें पहले से मौजूद जलमार्गों का उपयोग होता है, इसलिए बड़े निर्माण कार्यों की जरूरत नहीं पड़ती। यह प्रोजेक्ट कम समय में पूरा हो जाता है और इसमें जमीन की आवश्यकता भी बहुत कम होती है। बिजली और हाइब्रिड ईंधन से चलने वाली नावों के इस्तेमाल से प्रदूषण भी नहीं होगा। इससे शहरों में सड़कों पर लगने वाले जाम से राहत मिलेगी और यात्रियों को एक आरामदायक सफर मिलेगा।
इन शहरों में होगी सुविधा
यह वाटर मेट्रो आम जनता और पर्यटकों, दोनों के काम आएगी। सरकार ने इसके लिए कुछ मानक तय किए हैं। यह सुविधा मुख्य रूप से उन शहरों में दी जाएगी जिनकी आबादी 10 लाख से अधिक है। हालांकि, दूर-दराज के इलाकों या बाढ़ की समस्या वाले क्षेत्रों में इन नियमों में छूट दी जा सकती है। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) ने इस प्रोजेक्ट की जांच के लिए कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड की मदद ली है। अब तक 18 शहरों का सर्वे पूरा हो चुका है और 17 शहरों की रिपोर्ट भी मिल गई है। केवल लक्षद्वीप की रिपोर्ट आना अभी बाकी है।
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