वाराणसी। The game of unrighteousness in the holy city.भगवान शिव की नगरी काशी लोग धर्म के उददेश्य से जाते है। श्रद्धालुओं का मानना है कि काशी के कण—कण में शिव का वास है। इसलिए देश—विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर भगवान शिव की पूजा— अर्चना करते है। लेकिन कुछ लालची लोग इस धार्मिक नगरी की पवित्रता को भंग करने में जुटे है। ताजा मामला शनिवार शाम सामने आया, जब एक प्रसिद्ध मंदिर के सामने गेस्ट हाउस में देह व्यापार का पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए कोलकाता की तीन लड़कियों के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया। सभी को हिरासत में लेकर भेलूपुर थाने लाया गया, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। एक सप्ताह के अंदर कैंट पुलिस ने भी इस तरह की कार्रवाई की थी।देह व्यापार के खुलासे के बाद पुलिस जांच में रोज नए खुलासे हो रहे हैं।
बाहर से लाई जाती है लड़कियां
पुलिस पूछताछ में लड़कियों ने बताया कि उन्हें कोलकाता से पांच दिन पहले लाया गया हैं। त्रिदेव मंदिर के सामने स्थित विजय लक्ष्मी पेइंग गेस्ट हाउस में हुई छापेमारी के बाद पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुट गई है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि गेस्ट हाउस की आड़ में देह व्यापार का यह धंधा लंबे समय से संचालित हो रहा था। तीन मंजिला गेस्ट हाउस में अनैतिक देहव्यापार की जानकारी मिलने पर शनिवार की शाम एसओजी-2 ने छापेमारी कर तीन युवतियों सहित एक कस्टमर और होटल मैनेजर को गिरफ्तार किया है। हाल ही में पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर पर अज्ञात कॉलर द्वारा अनैतिक देह व्यापार की सूचना दी गई थीं। जिसके बाद सादी वर्दी में एसओजी-2 की टीम मौके पर पहुंची और छापेमारी की कार्रवाई की गई।
हेल्पलाइन नंबर मिली थी शिकायत
एसीपी अपूर्व पांडेय ने बताया कि पुलिस कमिश्नर को हेल्पलाइन नंबर पर सूचना मिली थी कि गेस्ट हाउस में अनैतिक देहव्यापार हो रहा है। जहां टीम की छापेमारी मेंमौके से छह मोबाइल, आपत्तिजनक चीज सहित 30 हजार रुपये बरामद किए गए हैं। इसके साथ ही मौके से पश्चिम बंगाल निवासी तीन युवतियों और एक कस्टमर सहित होटल मैनेजर को गिरफ्तार किया गया है। हिरासत में ली गई तीनों युवतियों और ग्राहक से पूछताछ की जा रही है। बताया जा रहा है कि ग्राहकों को मोबाइल फोन के जरिए संपर्क कर बुलाया जाता था। व्हाट्सएप कॉल और मैसेजिंग के माध्यम से सौदे तय किए जाते थे, ताकि किसी तरह का रिकॉर्ड न रह सके। इसके बाद ग्राहकों को सीधे गेस्ट हाउस भेजा जाता था।
गेस्ट हाउस का मालिक संदेह के घेरे में
जांच में पत चला है कि विजय लक्ष्मी गेस्ट हाउस का कोई नियमित रजिस्टर नहीं रखा जाता था। न ही ठहरने वाले लोगों का सत्यापन कराया जाता था। इससे साफ है कि संचालक की जानकारी में ही यह अवैध गतिविधियां चल रही थीं। दुर्गाकुंड चौकी से महज 400 मीटर की दूरी पर इस तरह का रैकेट चलने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गेस्ट हाउस में अक्सर संदिग्ध लोगों की आवाजाही देखी जाती थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी।
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