मिस मैनेजमेंट की शिकार कांग्रेस: कहीं उम्मीदवार ने नाम वापस लिए तो कही टिकट लौटाया

नईदिल्ली। लोकसभा टिकट के लिए जहां लोग हर तरह का जोड़तोड़ करते है, वहीं कांग्रेस के इतने बुरे दिन आ गए है कि उसके घोषित उम्मीदवार बिना लड़े ही मैदान छोड़ दे रहे है। कही आखिरी दिन नाम वापस ले रहे है तो कहीं​ टिकट वापस लौटा रहे है। पार्टी छोड़ने वालों के बारे में तो पूछिए ही मत हर कोई आलाकमान पर अनदेखी का या तो राममंदिर के उदघाटन के निमंत्रण का विरोध करने को मुददा बना रहा है। इन सब के बावजूद कांग्रेस अपने सामंती रवैये पर आगे बढ़ रही है। सेकंड लाइन के नेता या प्रदेश अध्यक्ष तक की बातों को अनसुना किया जा रहा है। नतीजा सबके सामने है दिल्ली जैसे महत्वूर्ण राज्य में चुनाव के बीच प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़कर विरोध पर उतर रहे है।

मध्य प्रदेश में सबसे बुरे दिन

कांग्रेस के लिए मध्यप्रदेश से सबसे ज्यादा खबरे सामने आ रही है। ऐसे-ऐसे नेता कांग्रेस छोड़ रहे है, जिनके लिए कल्पना करना भी मुश्किल हैं। यहां तक कि प्रदेश कांग्रेस के गृह जिले से लोकसभा प्रत्याशी ने नाम वापसी के आखिरी दिन मैदान छोड़कर बीजेपी को वॉकओवर दे दिया। कुछ ऐसा ही सियासी घटनाक्रम गुजरात के सूरत में भी हुआ, वहां तो बीजेपी प्रत्याशी निर्विरोध जीत गया। राहुल गांधी के दौरे से पहले छह बार के विधायक रामनिवास रावत के भी कांग्रेस छोड़ने की चर्चा जोरों पर है। मानों मध्यप्रदेश में पार्टी छोड़ने के लिए भगदड़ मची हुई हैं, यहां तक कि लोग विधायक छोड़कर बीजेपी ज्वाइन कर रहे है।

इन्होंने टिकट लौटाया

चुनावों के बीच कांग्रेस के कई उम्मीदवारों ने मिले हुए टिकट भी लौटा दिए। इन में सबसे पहला नाम रोहन गुप्ता का है जिन्होंने हाथ का साथ तो छोड़ा ही टिकट भी लौटाने के बाद बीजेपी में शामिल हो गए। उन्होंने कांग्रेस पर सनातन धर्म के अपमान का आरोप लगाया है। उनका कहना है क​ि एक संचार प्रभारी हैं, जिनके नाम में राम है, उन्होंने हमसे सनातन का अपमान होने पर चुप रहने को कहा था।

‘ रोहन का कहना था कि बिना किसी उम्मीद के उनके परिवार ने कांग्रेस के लिए कार्य किया। लेकिन उनका अपमान किया गया और स्वाभिमान को कुचला गया। इसलिए उन्होंने कांग्रेस छोड़ने का फैसला लिया। इसी तरह राजस्थान की राजसमंद लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी सुदर्शन सिंह रावत ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। उन्होंने पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा को पत्र लिखकर किसी और को टिकट देने की बात कही थी। बाद में राजसमंद सीट पर कांग्रेस ने दामोदर गुर्जर को चुनाव मैदान में उतारा था।

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