अपने हौसलों से हर मुश्किल का सीना चीरते हुए आजादी की मंजिल की तरफ बढ़ते ही चले गए…

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With his spirits, breaking the chest of every difficulty, he went on moving towards the destination of freedom.
सबसे महत्वपूर्ण है आज का दिन, आज ही दिन हमारे देश ने गुलामी की जंजीरों को तोड़कर फेंक दिया था। आज हमें आजाद हुए 75 वर्ष हो गए।

यूपी हिन्दी न्यूज। आज हमारा देश आजादी की 75वीं वर्षगाठ मना रहा है। देश अभी सदी की भयानक महामारी की दूसरी लहर से उबरा है। अब फिर से खड़ा होने का प्रयास का कर रहा है। यह हमारे देश की जिंदा दिली है कि इतनी बड़ी महामारी झेलने के बाद भी आज दुनिया के कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। इसके लिए हमारी सरकारों के साथ हम देश वासियों का हौंसला है कि हमारी अर्थव्यवस्था हमारी ताकत दिन- प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

सबसे महत्वपूर्ण है आज का दिन, आज ही दिन हमारे देश ने गुलामी की जंजीरों को तोड़कर फेंक दिया था। आज हमें आजाद हुए 75 वर्ष हो गए। इस आजादी को पाने में हमारे देश हजारों -लाखों दीवानों ने देश के लिए कुर्बानी दी। जितने लोगों का हम नाम जानते है उससे कही ज्यादा गुमनामी के अंधेरे में हे। ऐसे नामी और गुमनामी शहीदों को आज आजादी के पर्व के दिन यूपी हिन्दी न्यूज की तरफ से लाखों श्रद्धासुमन अर्पित है। आजादी के दीवानों की कहानियां कितनों की जबानी और कितनों की जिन्दगानी बन चुकी हैं।

आजादी के इन वीर योद्धाओं में दीवानों की तरह मंजिल पा लेने का हौसला तो था, लेकिन बर्बादियों का खौफ न था। रोटियां भी मयस्सर न हों लेकिन परवाह न था, दीवानों की तरह ये आजादी के दीवाने भी, मंजिलों की तरफ बढ़ते चले गये, बड़े से बड़े जुल्मों सितम भी उनके कदमों को न रोक सके, कोई ऐसी बाधा न हुई, जिसने उनके सामने घुटने न टेक दिए। अपने हौसलों से हर मुश्किल का सीना चिरते हुए आजादी की मंजिल की तरफ बढ़ते ही चले गए, न हिसाब है, न कीमत है उनकी कुर्बानियों का, संभाल कर रख सकें उनके जिगर के टुकड़े आजादी को सही सलामत, यही कीमत हो सकती है उनकी मेहरबानियों का।

हम आजाद हुए, कितना कुछ बदल गया, खुली हवा में सांस तो ले सकते हैं, दो वक्त की रोटियां तो मिल जाती हैं, बेगार के एवज में किसी के लात घुंसे तो नहीं खाने पड़ते हैं, बहुत कुछ बदल गया।कम से कम अपने मौलिक अधिकारों के अधिकारी तो हैं, मुंह से एक शब्द लिकालना गुनाह तो नहीं है। अच्छा है हम आजाद हैं, और भी आच्छा होगा यदि हम आजाद रहें, उससे भी अच्छा होगा यदि हम दूसरों को आजाद कर सकें, गरीबी, भ्रष्टाचार, अज्ञानता और अंधविश्वास की गुलामी से। इंसानों के बंधनों से आजाद हो गये, मन के कुसंस्कारों के बन्धन से आजाद हों तो पूरा आजादी मिलेगी। अभी हमें लंबी लड़ाई लड़नी है। जातिपात के भेदभाव से दहेज के दानव से बेरोजगारी से तमामों ऐसे मुद्दे है जिनकी वजह से आज भी हमारे कई भाई -बहन जूझ रहे है ऐसे लोगों पर हो रहे अत्याचार को हम मजबूती से उठाने का प्रयास करेंगे। हमारा प्रयास छोटा है टीम छोटी है, लेकिन एक दिन जरूर कमजोरों की आवाज बेनेंगे, आप सभी देश वासियों को एक बार फिर आजादी के पर्व की शुभकामनाएं। साथ हीे आपके आशीर्वाद और प्रेम की आकांक्षी यूपी हिन्दी न्यूज टीम….

                                                                     संपादक की कलम से यूपी हिन्दी न्यूज डाट इन

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