कोलकाता। पश्चिम बंगाल की पूर्व सरकार ममता बनर्जी के शासन काल में डिप्टी स्पीकर रहे Ashish Banerjee ने रविवार सुबह फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। वह बीरभूम जिले के रामपुरहाट से लगातार पांच बार विधायक रहे। बात दें कि वर्ष 2001 से 2026 तक रामपुरहाट का प्रतिनिधित्व करने वाले 75 वर्षीय बनर्जी हालिया विधानसभा चुनावों में भाजपा उम्मीदवार ध्रुव साहा से चुनाव हार गए थे।
कमरे से मिला सुसाइड नोट
सूचना पर पहुंची पुलिस को शव के पास से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसने राज्य के सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। अपने अंतिम संदेश में पूर्व डिप्टी स्पीकर ने लिखा है कि मेरी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। लेकिन आज मुझे अहसास हो रहा है कि राजनीति में आना ही मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी। पेशे से शिक्षक रहे आशीष ने नोट में अपने साफ-सुथरे करियर का हवाला देते हुए लिखा कि उन्होंने जीवन भर एक पैसा भी गलत तरीके से नहीं लिया और हमेशा बिना फीस के छात्रों को पढ़ाया।
लिखा—भ्रष्टाचार में कभी नहीं था शामिल
तारापीठ रामपुरहाट डेवलपमेंट अथारिटी (टीआरडीए) में खुद को दरकिनार किए जाने चरित्र पर कीचड़ उछाले जाने से दुखी थे। धूमिल करने की साजिशों का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा कि वे कभी किसी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहे, फिर भी उन्हें अपमानित किया गया। दुख और हताशा व्यक्त करते हुए उन्होंने अपने परिवार की भावी पीढ़ियों को कभी भी राजनीति में न कदम रखने की सलाह दी है। विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल नेताओं पर कसते शिकंजे और राजनीतिक अलग-थलगता के बीच इस घटना ने कई अनसुलझे सवाल खड़े कर दिए हैं। रामपुरहाट थाना पुलिस ने सुसाइड नोट की फोरेंसिक जांच कराने की बात कही है।
पांच बार रहे रामपुरहाट के विधायक
आशीष बनर्जी बंगाल की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे। वह बीरभूम के रामपुरहाट विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक निर्वाचित हुए थे। ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने विधानसभा के उपाध्यक्ष के पद की जिम्मेदारी भी संभाली थी। इसके अलावा ममता बनर्जी के पहली बार सत्ता में आने के बाद वह शिक्षा और कृषि विभाग के मंत्री भी रहे। हाल में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा के ध्रुव साहा के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। उनके अचानक निधन की खबर से राजनीतिक हलकों में शोक की लहर है। तृणमूल सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
राजनीतिक जीवन
शिक्षा और अध्यापन: आशीष बनर्जी ने बर्दवान विश्वविद्यालय से बंगला में स्नातक, परास्नातक और 1985 में पीएचडी की। वे रामपुरहाट कॉलेज में बंगला के एसोसिएट प्रोफेसर रहे। उनके चुनावी हलफनामे में भी उनका पेशा सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर दर्ज है।
छात्र राजनीति: विश्वविद्यालय के दिनों में वे छात्र राजनीति में सक्रिय रहे और छात्र परिषद के महासचिव भी रहे। बाद में सक्रिय दलगत राजनीति में आए।
तृणमूल कांग्रेस से जुड़ाव: वे तृणमूल कांग्रेस के शुरुआती दौर से ही पार्टी से जुड़े रहे और ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिने जाते थे।
रामपुरहाट के विधायक: 2001 में पहली बार रामपुरहाट से विधायक बने। 2006, 2011, 2016 और 2021 में भी उसी सीट से जीतते रहे—अर्थात लगातार पांच विधानसभा चुनाव जीते। 2021 में उन्होंने लगभग 48.3% वोट हासिल किए।
मंत्री पद: 2014 में ममता बनर्जी सरकार में मंत्री बने। उन्होंने आयुष से जुड़े विभाग, फिर जैव-प्रौद्योगिकी/सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन जैसे विभाग संभाले। 2017 से 2021 तक वे कृषि मंत्री रहे।
डिप्टी स्पीकर: जुलाई 2021 में वे निर्विरोध पश्चिम बंगाल विधानसभा के उपाध्यक्ष चुने गए। इस पद पर रहते हुए वे विधानसभा के संचालन और संवैधानिक प्रक्रियाओं से जुड़े कई मौकों पर सामने आए।
सामाजिक और सार्वजनिक छवि
आशीष बनर्जी की सार्वजनिक पहचान केवल पार्टी नेता की नहीं थी। वे लंबे समय तक शिक्षक और अकादमिक रहे, इसलिए उनकी राजनीतिक शैली को अक्सर अपेक्षाकृत शांत और बौद्धिक बताया गया। 2022 में ने उन्हें ऐसा नेता बताया था जो सामान्यतः राजनीतिक शोर-शराबे से दूर रहते थे।
