लखनऊ। यूपी के विधानसभा चुनाव अभी तक तो को त्रिकोणीय होने का अनुमान लगाया जा रहा था, लेकिन Owaisi’की एंट्री ने नए समीकरण की ओर इशारा शुरू कर दिया। एआईएमआईएम प्रमुख ने रविवार को बहराइच के मटेरा में जनसभा कर विधानसभा चुनाव के लिए अपनी भावी रणनीति का संकेत दे दिया है। उन्होंने मुस्लिम समाज से बड़ी पार्टियों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी राजनीतिक ताकत मजबूत करने की अपील की। ओवैसी ने कहा, एआईएमआईएम यूपी की राजनीति में बदलाव लाने की क्षमता रखती है। मटेरा विधानसभा सीट से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली को उम्मीदवार घोषित कर उन्होंने चुनावी तैयारी का संदेश दे दिया है। यह सीट सपा का गढ़ मानी जाती है, इसलिए यहां से अभियान शुरू करना राजनीतिक लिहाज से अहम माना जा रहा है। यही नहीं ओवैसी ने यूपी में 200 सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान भी किया है।
इसलिए बहराइच से रखा कदम
ओवैसी ने काफी सोच—समझकर विधानसभा चुनाव के लिए यूपी के बहराइच जिले से एंट्री ली। दरअसल इन दिनों बहराइच के महाराजा सुहेलदेव और सैयद सालार मसूद गाजी की विरासत को लेकर बहस तेज है। भाजपा और उसके सहयोगी दल इस क्षेत्र में महाराजा सुहेलदेव की विरासत को प्रमुखता से उठा रहे हैं, जबकि एआईएमआईएम ने धार्मिक स्थलों और अल्पसंख्यक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा है। एआईएमआईएम पूर्वांचल के मुस्लिम बहुल और सामाजिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का प्रयास कर रही है। बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, आजमगढ़ और आसपास के जिलों में पार्टी संगठन मजबूत करने पर जोर दे रही है। ओवैसी की रणनीति भाजपा और सपा दोनों के परंपरागत वोट आधार को चुनौती देने की मानी जा रही है।
आंकड़ों की बात करे तो निश्चिति रूप से एआईएमआईएम का संगठन अभी यूपी में सपा, बसपा और भाजपा के मुकाबले कमजोर है, लेकिन ओवैसी की सभाएं मुस्लिम मतदाताओं के बीच राजनीतिक जागरूकता और स्वतंत्र प्रतिनिधित्व की बहस को मजबूत कर रही हैं। इससे विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति और गठबंधन समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। यदि एआईएमआईएम कुछ क्षेत्रों में प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराती है, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर मुकाबले का स्वरूप बदल सकता है। ओवैसी केवल चुनाव लड़ने नहीं, बल्कि यूपी की राजनीतिक बहस को प्रभावित करने की रणनीति के साथ मैदान में हैं।
कैबिनेट मंत्री राजभर ने किया विरोध
भाजपा और सहयोगी दलों ने ओवैसी के बयानों का विरोध किया है। सुभासपा के नेताओं ने महाराजा सुहेलदेव की विरासत को लेकर एआईएमआईएम की राजनीति पर सवाल उठाए। इस कारण बहराइच की सभा केवल राजनीतिक कार्यक्रम न रहकर वैचारिक- ऐतिहासिक बहस का केंद्र भी बन गई। राजभर ने ओवैसी को नसीहत दी कि जब वे यूपी आएं तो अपने नेताओं को इतिहास और मर्यादित भाषा का ज्ञान भी दें। दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एआईएमआईएम के एक नेता महाराजा सुहेलदेव के अस्तित्व पर सवाल उठाते हुए कह रहे हैं कि अगर सुहेलदेव राजा होते तो बहराइच में उनका कोई किला होता।
वोट बंटवारे से बिगड़ेगा खेल
यूपी में अभी तक सपा, बसपा और कांग्रेस तीनों ही मुस्लिम वोटों पर नजर बनाए हुए है। वहीं कई जगह तो आंतरिक सर्वे के आधार पर इन दलों ने मुस्लिम प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने की तैयारी के इशारे भी कर चुकी है। ऐसे में ओवैसी की पार्टी द्वारा उतारे गए प्रत्याशी वोटों का बंटवारा करके विपक्ष के अरमानों पर पानी फेर सकते है। इस तरह एक बार फिर योगी सरकार का आना तय लग रहा है।
