BSP बिहार में खेला करने को तैयार: जानिए कैसे फायदा और किसे होगा नुकसान

BSP is ready to play a game in Bihar: Know how it will benefit and who will suffer loss

बसपा बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी।

पटना। पिछले कई चुनावों से BSP कोई कमाल नहीं कर पा रही है। हर चुनाव में एक नई उम्मीद लेकर उतरती हैं, लेकिन नतीजा एक जैसा हर बार आता हैं, लेकिन उसकी वजह से बीजेपी को फायदा हो जाता है। कुछ वोटों को काटकर कांग्रेस समेत दूसरी पार्टियों को नुकसान ही पहुंचाती है। कुछ ऐसा ही होने जा रहा है बिहार के चुनाव में, सूत्रों के अनुसार बसपा यहां सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। हालांकि बसपा की जमीन यहां पर बहुत मजबूत नहीं है, लेकिन देश के कुछ ​अनुसूचित जाति के लोग अभी भी मायावती को बड़ा नेता मानते है। इसके अलावा वह नेता जिन्हें उनकी पार्टी टिकट नहीं देंगी उनके लिए बसपा संजीवनी काम करेगी।

BSP के राज्यसभा सांसद सह नेशनल कोऑर्डिनेटर रामजी गौतम ने हालिया में में कहा था, ‘बीएसपी बिहार चुनाव की तैयारी कर रही है। हम सभी सीटों पर अकेले लड़ेंगे।’ इससे पहले पटना मे बसपा ने छत्रपति शाहू जी महाराज की जयंती समारोह का आयोजन किया। इस दौरान बसपा सुप्रीमो मायावती के भतीजे और मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद खुद मौजूद रहे।

दूसरों की खिसकेगी जमीन

इससे पहले अप्रैल में रामजी गौतम ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा एलान किया हथा। उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि पार्टी बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। वह किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं करेगी। पटना में प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा था कि अगर बहुजन समाज पार्टी की सरकार बिहार में बनती है तो मायावती की ओर से गरीबों और वंचितों के लिए शुरू की गई योजनाओं को उत्तर प्रदेश की तरह यहां भी लागू किया जाएगा। बसपा समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के अधिकार और सम्मान के लिए काम करती रही है और आगे भी करती रहेगी।

वोट की गणित

इस बार विपक्ष पूरी ताकत से मैदान में उतरने को तैयार है, ​क्योंकि नीतीश कुमार पहले के मुकाबले कमजोर हुए है। वहीं भाजपा अकेले के दम पर बहुतमत लाने से दूर दिख रही हैं। ऐसे में विपक्ष की एकता को तगड़ा झटका लगेगा जब पीके की सुराज के साथ ही एक और पार्टी BSP सभी सीटों पर वोट बांटने के लिए मैदान पर होगी। क्योंकि बीजेपी का जो वोट बैंक वह अपनी जगह मजबूत है। बाकी सारी लड़ाई सरकार से नाराज लोगों को अपने पाले में करने की है। ऐसे में सबकी नजर मुस्लिम मतदाताओं पर टिकी है। वह किस तरफ जाता है यह प्रत्याशियों पर निर्भर करेगा।

 

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