गोरखपुर। GorakhpurZoo : पूर्वांचल के प्रमुख शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) में बहुत जल्द सिंह की दहाड़ सुनाई देगी, साथ ही देसी भालू के एक जोड़े को यहां लाया जाएगा। इसके बदले गोरखपुर से बाघ, मगरमच्छ और बारासिंघा के एक-एक जोड़े को तिरुपति भेजा जाएगा। बता दें कि बारासिंघा का जोड़ा लखनऊ चिड़ियाघर से मंगाया जाएगा। पहले इसे गोरखपुर लाया जाएगा और फिर यहां से तिरुपति भेजा जाएगा। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) ने वन्यजीवों के इस आदान-प्रदान को मंजूरी दे दी है।
इसका मकसद चिड़ियाघरों में वन्यजीवों की विविधता बढ़ाने के साथ उनके प्रजनन को भी प्रोत्साहित करना है। तिरुपति चिड़ियाघर में पहले से बाघ मौजूद हैं, लेकिन वहां गोरखपुर से तराई के बाघ भेजे जाएंगे। इनके जरिये ब्रीडिंग कराकर तराई की इस प्रजाति का कुनबा बढ़ाने की योजना है। इसी तरह गोरखपुर में भी शेर और भालू के नए जोड़े लाने के पीछे प्रजनन को बढ़ावा देना है। गोरखपुर चिड़ियाघर में फिलहाल एक बब्बर शेरनी गौरी है। वहीं, देसी भालू भी पहले से मौजूद हैं। नए जोड़े आने से इनके प्रजनन की संभावनाएं बढ़ेंगी।

गोरखपुर चिड़ियाघर अभी नया है और यहां वन्यजीवों की संख्या सीमित है। ऐसे में तिरुपति भेजे जाने वाले बारासिंघा का जोड़ा यहां उपलब्ध नहीं है। इसके लिए लखनऊ चिड़ियाघर से एक जोड़ा मंगाया जाएगा। इसके बाद उसे तिरुपति भेजा जाएगा। इस तरह वन्यजीवों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया में तीनों चिड़ियाघर शामिल होंगे। हाल ही में चिड़ियाघर के निदेशक सूरज कुमार और उप निदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने तिरुपति चिड़ियाघर का दौरा किया था। वहां उन्होंने वन्यजीवों को देखा और आदान-प्रदान की तैयारियों का जायजा लिया। डॉ. योगेश ने बताया कि चिड़ियाघर प्रशासन की कोशिश है कि इसी महीने के अंत तक सभी वन्यजीवों को यहां लाने और भेजने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। इसके बाद दर्शकों को नए वन्यजीवों को देखने का मौका मिलेगा।
