वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती देने वाले Akhilesh Yadav अब प्रदेश के किसी भी सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे। दरअसल उन्हें लगता है कि यदि प्रदेश की किसी सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ेंगे तो योगी आदित्यनाथ उन्हें बार— बार मैदान से हटने के लिए तंज कसेंगे। इस बात की पुष्टि अखिलेश यादव ने खुद वाराणसी में की। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस बार खुद विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, बल्कि पार्टी के दूसरे नेताओं को चुनाव लड़वाएंगे। अखिलेश यादव ने कहा कि वह शुभ-अशुभ को मानते हैं और इस बार वही करेंगे, जो उनके लिए पहले शुभ रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछली बार वह विधानसभा चुनाव जीते थे, लेकिन पार्टी को 202 विधायकों का आंकड़ा नहीं मिल सका था। इस बार उन्होंने तय किया है कि वह खुद चुनाव लड़ने के बजाय दूसरों को चुनाव लड़वाएंगे।
2012 में सांसद रहते बने थे मुख्यमंत्री
अखिलेश यादव ने वर्ष 2012 का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे, तब लोकसभा के सांसद थे। उन्होंने इसी राजनीतिक घटनाक्रम को अपने लिए शुभ बताते हुए कहा कि इस बार भी वही करेंगे, जो उनके लिए शुभ रहा है। उनके इस बयान से साफ है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव खुद प्रत्याशी के रूप में मैदान में नहीं उतरेंगे। हालांकि, पार्टी के चुनाव प्रचार और नेतृत्व की जिम्मेदारी उनके पास ही रहने की संभावना है।
योगी ने दी अयोध्या से मुकाबला करने की चुनौती
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बलरामपुर में एक कार्यक्रम के दौरान सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को अयोध्या से चुनाव लड़ने की खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव अयोध्या से नामांकन करें और वह भी वहां से नामांकन करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनावी मुकाबला आमने-सामने होना चाहिए और इसके लिए एक बार दोनों को अपनी किस्मत आजमा लेनी चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “आइए, आप भी अयोध्या में नामांकन करिए और मैं भी अयोध्या से नामांकन करता हूं। चलिए, एक बार किस्मत आजमा लेते हैं। तय हो जाए कि अयोध्या किसके साथ है।” उन्होंने कहा, “लड़ाई चेलों से क्यों? हम तो गुरु से ही लड़ेंगे।”
