Dehradun में रजिंशन भाजयुमो नेता की हत्या, नाराज हिंदू संगठनों ने किया प्रदर्शन

BJYM leader shot dead in Dehradun; angry Hindu organizations stage protest.

मामला दो पक्षों का होने की वजह से क्षेत्र में तनाव का माहौल है।

Dehradun । उत्तराखंड की राजधानी देहरादून रंजिशन शनिवार को सहसपुर कोतवाली क्षेत्र के बैरागीवाला के पूर्व प्रधान इस्पाक के भतीजे और अन्य लोगों ने मिलकर विनोद उसके भाई अशोक व राजेश पर हथियारों से हमला कर दिया। इसमें तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए। हरबर्टपुर स्थित अस्पताल में विनोद (45) ने दम तोड़ दिया। वह भाजपा के युवा मोर्चा का नेता बताया जा रहा है और पूर्व में बीडीसी का चुनाव भी लड़ चुका है।मामला दो पक्षों का होने की वजह से क्षेत्र में तनाव का माहौल है।

भाजना नेता की हत्या की खबर मिलते ही गांव में बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और अन्य संगठन के कार्यकर्ता एकत्र हो गए। उन्होंने धर्मस्थल और आरोपियों के मकान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। साथ ही कार्यकर्ताओं का एक दल दून-पांवटा राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरने पर बैठ गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार विनोद और उसके परिवार ने पूर्व प्रधान इस्पाक के कार्यकाल की सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत कई जानकारी मांगी थी,इसी रंजिश में दोनों पक्षों में विवाद चल रहा था। दोनों परिवारों में अक्सर झगड़े होते रहते थे। शनिवार को विनोद और उनके भाई सरकारी ट्यूबवेल से अपने खेत में पानी डाल रहे थे। बगल का खेत पूर्व प्रधान इस्पाक के भतीजे इम्तियाज का था। इम्तियाज के आपत्ति जताने पर दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया। इस दौरान अमन, यूनुस, अनीस और रज्जाक आदि भी मौके पर आ गए। फिर दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई।

इलाज के दौरान विनोद की मौत

आरोप है कि इम्तियाज और उसके साथियों ने विनोद, अशोक और राजेश पर भारी हथियारों से हमला बोल दिया। रज्जाक ने विनोद के सिर पर हथौड़े से वार किए। अन्य दोनों भाइयों को भी जमकर पीटा। घायल अवस्था में तीनों भाइयों को हरबर्टपुर स्थित लेहमन अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान विनोद की मौत हो गई।

सूचना पर बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और कुछ संत गांव में पहुंच गए। गांव में पहले से ही हिंदू समाज के लोगों की भीड़ जमा थी। आक्रोशित लोगों ने भी हाथों में लाठी डंडे उठा लिए। सूचना पर सहसपुर, विकासनगर, सेलाकुई और कालसी का पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। कार्यकर्ता उग्र होकर मस्जिद की ओर बढ़ गए। कार्यकर्ताओं ने मस्जिद को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। इस दौरान मस्जिद के आसपास से कार्यकर्ताओं पर कांच की बोतल और पत्थर फेंके गए। इसमें पुलिसकर्मी और कार्यकर्ता बाल-बाल बचे। उसके बाद भीड़ आरोपी के मकान तक जाने लगी। कुछ संत भी गांव के भीतर जाने का प्रयास करने लगे। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से उन्हें काबू किया। कुछ कार्यकर्ता दून-पांवटा राजमार्ग की ओर बढ़े। वह राजमार्ग पर बैठ गए और वाहनों की आवाजाही अवरुद्ध हो गई।

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