मुख्यमंत्री योगी ने लखीमपुर खीरी के Miyanpur Village का नाम रविंद्र नगर रखा, जानिए वजह

Chief Minister Yogi Renames Miyanpur Village in Lakhimpur Kheri to Ravindra Nagar—Find Out the Reason

चंदनचौकी में 4356 थारू परिवारों को 538 हेक्टेयर जमीन के स्वामित्व संबंधी अधिकार पत्र दिए।

लखीमपुर खीरी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखीमपुर खीरी के मोहम्मदी तहसील में आयोजित एक जनसभा में विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए, सरकार के कार्यों पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही उन्होंने Miyanpur Village का नाम बदलकर रविंद्र नगर करने की घोषणा की। इसके साथ ही पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से विस्थापित होकर बसाए गए बंगाली हिंदू परिवारों को भूमि का मलिकाना हक दिया। अन्य विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ दिया। सभा को संबोधित करते हुए विभाजनकारी राजनीति से सावधान रहने की बात कही। लखीमपुर में दो जगहों पर आयोजित कार्यक्रम में 817 करोड़ की 314 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इसके साथ ही 4356 थारू परिवारों और 2350 विस्थापित परिवारों को भूमि का मालिकाना हक संबंधी अधिकार पत्र प्रदान किए।

अभी पाकिस्तान और टुकड़ों में बंटेगा

सीएम योगी ने कहा कि पापी पाकिस्तान ने पहले भारत का विभाजन किया, फिर उसके दो टुकड़े हो गए, अब फिर टुकड़ों में बंटने वाला है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पाप की सजा वहां रह रहे हिंदू, सिख, बौद्ध, पारसी लोगों को मिली है। क्योंकि वहां किसी और जाति के लिए कोई जगह नहीं है। सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस का पाप देखा। आपका अधिकार लिया और वोट लेते रहे। लेकिन आपको जमीन का अधिकार नहीं दिया। आपकी पहचान छिपाने के लिए गांव का नाम भी मियांपुर रख दिया। एक भी मियां, यहां नहीं है, अब ये मियांपुर नाम नहीं रहेगा। अब इस गांव का नाम रविंद्र नगर होगा। गुरुदेव रविंद्र नाथ ठाकुर के नाम पर यह गांव जाना जाएगा। इससे पहले मुख्यमंत्री ने पलियाकलां के चंदनचौकी में 4356 थारू परिवारों को 538 हेक्टेयर जमीन के स्वामित्व संबंधी अधिकार पत्र दिए। 1976 से ये परिवार सिर्फ जमीन का उपयोग कर रहे थे, अब वे इसके मालिक बन गए हैं। इसके अलावा सीएम योगी ने यहां विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इसमें सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।

जहां प्रजा सुखी, वही सच्चा शासन- सीएम योगी

सीएम योगी ने कहा कि सच्चा शासन वही है, जहां प्रजा सुखी रहे। शासन की खुशी का आधार उसकी जनता की खुशी है। यह कार्य तभी होता है जब शासन सत्ता में संवेदना होती है। बिना भेदभाव के काम हो। आज जो काम हो रहा है ये उसी संवेदना का काम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों में संवेदनाओं का अभाव था। अपने परिवारवाद से ऊपर उठ पाते तो इन थारू परिवारों के बारे में सोच पाते।

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